इंडिगो को बड़ा झटका: मार्च 2026 तिमाही में हुआ 2536 करोड़ रुपये का भारी घाटा

इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन को मार्च 2026 तिमाही में 2536 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। ईंधन की कीमतों और रुपये की कमजोरी ने बिगाड़ा खेल।

May 29, 2026 - 19:35
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इंडिगो को बड़ा झटका: मार्च 2026 तिमाही में हुआ 2536 करोड़ रुपये का भारी घाटा

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का संचालन करने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा कर दी है। कंपनी के लिए यह तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रही है और उसे 2536 करोड़ रुपये का भारी शुद्ध घाटा उठाना पड़ा है। यह वित्तीय प्रदर्शन पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले काफी निराशाजनक है क्योंकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 3068 करोड़ रुपये का शानदार शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और घरेलू बाजार की परिस्थितियों ने एयरलाइन के मुनाफे को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

घाटे के मुख्य कारण और परिचालन चुनौतियां

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बड़े घाटे के पीछे कई प्रमुख कारण रहे हैं। घरेलू उड़ानों में क्षमता संबंधी सीमाओं के कारण एयरलाइन अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाई। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने कंपनी के खर्चों को बढ़ा दिया। एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी विमान ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भी कंपनी के बजट पर भारी दबाव डाला। परिचालन लागत में हुई इस वृद्धि ने कंपनी के मुनाफे को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में भी बाधाएं आईं, जिसका असर कंपनी के ओवरऑल परफॉर्मेंस पर पड़ा है।

आय में मामूली वृद्धि और एकमुश्त खर्च

हालांकि घाटे के बावजूद कंपनी की कुल आय में मामूली सुधार देखा गया है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान इंडिगो की ऑपरेशन से होने वाली आय बढ़कर 22438 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 22152 करोड़ रुपये था। इस तिमाही के दौरान कंपनी को 250 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च भी उठाना पड़ा, जिसने वित्तीय स्थिति को और अधिक प्रभावित किया। कंपनी ने बताया कि आय में वृद्धि के बावजूद खर्चों पर नियंत्रण न रह पाने के कारण शुद्ध लाभ घाटे में बदल गया।

विमानों की खरीद और भविष्य की योजनाएं

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए इंडिगो के बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला लिया है। बोर्ड ने कंपनी की सहयोगी इकाई इंटरग्लोब एविएशन फाइनेंशियल सर्विसेज IFSC प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए फाइनेंस लीज दायित्वों के आंशिक प्रीपेमेंट को मंजूरी दे दी है। कंपनी इसके लिए 450 मिलियन डॉलर तक की राशि का भुगतान चरणों में करेगी। एयरलाइन का कहना है कि इस बड़ी राशि का इस्तेमाल नए विमान, विमान इंजन और एयरक्राफ्ट पार्ट्स खरीदने के लिए किया जाएगा। इस कदम से कंपनी अपनी एयरक्राफ्ट ओनरशिप यानी विमानों पर मालिकाना हक बढ़ा सकेगी, जिससे भविष्य में लीज पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकेगा और परिचालन लागत को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया का बयान

इंडिगो के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने वित्त वर्ष 2026 के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह साल पूरे एयरलाइन सेक्टर के लिए बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन चुनौतियों के बावजूद कंपनी का मूल कारोबार अभी भी काफी मजबूत बना हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की क्षमता में 9 दशमलव 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और कुल आय में 6 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। भाटिया ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और विशेष मदों को हटा दिया जाए, तो कंपनी ने वास्तव में 7500 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है।

यात्रियों की संख्या और शेयर बाजार का हाल

परिचालन के मोर्चे पर बात करें तो तिमाही के दौरान एयरलाइन की क्षमता 3 दशमलव 4 प्रतिशत बढ़कर 43 दशमलव 6 अरब ASK रही। हालांकि, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान यात्रियों की संख्या 1 दशमलव 1 प्रतिशत घटकर 3 करोड़ 16 लाख रह गई। वहीं, विमानों में सीटों के भरने की दर यानी लोड फैक्टर भी घटकर 85 दशमलव 8 प्रतिशत पर आ गया। इन कमजोर वित्तीय नतीजों का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। 29 मई को नतीजों के बाद इंडिगो के शेयर 3 प्रतिशत तक गिर गए और अंत में 4420 रुपये पर बंद हुए।

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