मानसून की रफ्तार थमी: 372 जिलों में बारिश की कमी, खेती पर संकट गहराया

देश के 372 जिलों में मानसून कमजोर, 68 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित। 20 जुलाई के बाद मानसून के फिर सक्रिय होने की उम्मीद। खेती पर बुआई का संकट।

Jul 13, 2026 - 22:35
 0  1
मानसून की रफ्तार थमी: 372 जिलों में बारिश की कमी, खेती पर संकट गहराया

देशभर में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से खेती-किसानी पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जहां मंगलवार को कई राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार कमजोर मानसून और घटती बुआई को लेकर काफी चिंतित है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के 372 जिलों में मानसून की स्थिति सामान्य से कमजोर बनी हुई है, जबकि 68 जिले इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। फिलहाल 20 जुलाई तक देश के बड़े हिस्से में व्यापक बारिश की संभावना नहीं जताई गई है। केवल तराई क्षेत्रों में ही हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 20 जुलाई के बाद मानसून एक बार फिर से अपनी रफ्तार पकड़ सकता है।

विभिन्न राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कई इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है और इसके अलावा, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ मौसम खराब रहने की चेतावनी दी गई है। गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है, जिससे स्थानीय जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

दिल्ली-NCR और उत्तर भारत का मौसम

दिल्ली-NCR के क्षेत्र में फिलहाल भारी बारिश की कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक बीच-बीच में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, तापमान में बहुत अधिक गिरावट आने की उम्मीद नहीं है और उत्तर भारत के हिमालयी राज्यों, जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा और कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में केवल छिटपुट बारिश होने के आसार हैं।

राजस्थान और पूर्वी भारत की स्थिति

राजस्थान में अगले एक सप्ताह तक मानसून के कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बना रहेगा, जबकि पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी तेज हवाएं चलने की आशंका है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश जरूर हो सकती है, लेकिन व्यापक वर्षा की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है। पूर्वी भारत की बात करें तो बिहार में भारी बारिश की संभावना है, जबकि झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में भी अच्छी बारिश का अनुमान लगाया गया है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जिसके लिए मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

खेती पर मानसून का प्रभाव और भविष्य का अनुमान

मानसून की सुस्त चाल का सबसे गंभीर असर खेती पर दिखाई दे रहा है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस समय तक करीब 1 करोड़ हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुआई हो पाई है। यही कारण है कि केंद्र सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार का मानना है कि यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून फिर से सक्रिय हो जाता है, तो खेती की स्थिति में सुधार संभव है और इस बार की परिस्थितियों को देखते हुए बुआई का सीजन अगस्त के मध्य तक बढ़ने की संभावना है, जो सामान्य तौर पर जुलाई के अंत तक पूरा हो जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 20 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में नई मौसमी गतिविधियां बनने की उम्मीद है, जिससे मानसून फिर सक्रिय हो सकता है और खरीफ फसलों की स्थिति में सुधार आ सकता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow