इंडोनेशिया का अमेरिका के साथ बड़ा रक्षा समझौता, विदेश मंत्रालय ने बताया 'आत्मघाती' कदम

इंडोनेशिया और अमेरिका के बीच नए रक्षा समझौते से अमेरिकी लड़ाकू विमानों को इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में बिना अनुमति पहुंच मिलेगी, जिसका वहां के विदेश मंत्रालय ने विरोध किया है।

Apr 14, 2026 - 17:35
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इंडोनेशिया का अमेरिका के साथ बड़ा रक्षा समझौता, विदेश मंत्रालय ने बताया 'आत्मघाती' कदम

इंडोनेशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक नए रक्षा समझौते को लेकर वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने अमेरिका के साथ एक ऐसे रक्षा सहयोग के प्रारूप पर सहमति जताई है, जो अमेरिकी वायुसेना को इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में व्यापक पहुंच प्रदान करता है। इस समझौते के तहत अमेरिकी लड़ाकू विमान बिना किसी विशेष पूर्व अनुमति के इंडोनेशिया के आसमान में उड़ान भर सकेंगे और वहां लैंड कर सकेंगे। इस आशय पत्र (Letter of Intent) को तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसने इंडोनेशिया के भीतर ही एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।

मंत्रालयों के बीच अभूतपूर्व टकराव

समाचार एजेंसी रॉयटर्स और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस रक्षा समझौते को लेकर इंडोनेशिया के दो प्रमुख मंत्रालयों के बीच सीधा टकराव देखा जा रहा है। इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित इस डील का औपचारिक विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय को लिखे एक पत्र में इस समझौते को 'आत्मघाती' करार देते हुए चेतावनी दी है कि इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। यह इंडोनेशिया के इतिहास में दुर्लभ अवसर है जब किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते पर विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के विचार इतने विपरीत हैं। विदेश मंत्रालय का तर्क है कि यह कदम देश की संप्रभुता और उसकी पारंपरिक तटस्थता की नीति के खिलाफ जा सकता है।

राष्ट्रपति प्रबोवो की नई रक्षा नीति

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, इस समझौते का प्रारूप इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में तैयार किया गया है और राष्ट्रपति प्रबोवो, जो पहले रक्षा मंत्री रह चुके हैं, उनके कार्यकाल में इंडोनेशिया का झुकाव स्पष्ट रूप से अमेरिका की ओर बढ़ा है। अगस्त 2025 में आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के बाद, प्रबोवो सरकार ने अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों को और मजबूत किया है। इसमें गाजा शांति मिशन के लिए 8,000 शांति सैनिकों को भेजने का निर्णय और अमेरिका के साथ किए गए विभिन्न टैरिफ समझौते शामिल हैं, जिनका घरेलू स्तर पर विरोध भी हुआ है।

रणनीतिक स्थिति और दक्षिण चीन सागर

इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर के केंद्र में रखती है। अमेरिका के लिए इंडोनेशिया के साथ यह समझौता रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से आसियान देशों की निगरानी और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देना आसान हो जाएगा और एक समय में गुट निरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) के प्रमुख स्तंभ रहे इंडोनेशिया का 2020 के बाद से अमेरिका के पक्ष में जाना वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जकार्ता पोस्ट जैसे स्थानीय समाचार पत्रों ने भी इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं कि क्या इंडोनेशिया अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को दांव पर लगा रहा है।

घरेलू विरोध और भविष्य की चुनौतियां

इस रक्षा समझौते से पहले भी इंडोनेशिया में अमेरिकी प्रभाव को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। फरवरी में हुए टैरिफ सौदे के खिलाफ इंडोनेशिया के लगभग 65 नागरिक संगठनों ने याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार अमेरिका के सामने 'सरेंडर' कर रही है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी विमानों को बिना अनुमति पहुंच देना इंडोनेशिया की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जोखिम भरा हो सकता है। फिलहाल, इस डील के कई तकनीकी पहलुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सरकार के भीतर चल रहा आंतरिक विरोध इस समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन में बड़ी बाधा बन सकता है।

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