ईरान अमेरिका समझौता: डेढ़ पन्ने के प्रस्ताव में शामिल 14 बड़ी शर्तें आईं सामने

ईरान और अमेरिका के बीच हुए 14 शर्तों वाले परमाणु समझौते की पूरी जानकारी। जानें यूरेनियम संवर्धन और आर्थिक प्रतिबंधों पर क्या हुआ फैसला।

Jun 16, 2026 - 20:35
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ईरान अमेरिका समझौता: डेढ़ पन्ने के प्रस्ताव में शामिल 14 बड़ी शर्तें आईं सामने

ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले ऐतिहासिक समझौते की विस्तृत जानकारी अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है और हालांकि इस समझौते का आधिकारिक पाठ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी किया जाना अभी बाकी है, लेकिन अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बयानों ने इस प्रस्ताव की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। यह प्रस्ताव मात्र डेढ़ पन्ने का है, जिस पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने डिजिटल हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता आगामी शुक्रवार यानी 19 जून से प्रभावी होने जा रहा है, जिसमें कुल 14 महत्वपूर्ण शर्तें शामिल की गई हैं।

समझौते की प्रकृति और क्षेत्रीय भागीदारी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, यह एक अस्थाई समझौता है जो शुरुआती तौर पर 60 दिनों की अवधि के लिए लागू रहेगा। इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता इसकी चतुष्कोणीय प्रकृति है। इसमें एक पक्ष की ओर से लेबनान और ईरान शामिल हैं, जबकि दूसरे पक्ष में अमेरिका और इजराइल खड़े हैं। अराघची ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता इन चारों देशों के बीच आपसी सहमति पर आधारित है। यदि इनमें से कोई भी एक देश शर्तों को मानने से पीछे हटता है, तो पूरा समझौता तत्काल प्रभाव से रद्द माना जाएगा। इस 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान और लेबनान पर किसी भी प्रकार का हमला नहीं किया जाएगा।

परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी

समझौते का एक मुख्य हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। जेडी वेंस के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और इसके लिए उसने एनपीटी कानून का संदर्भ दिया है। ज्ञात हो कि 2021 में ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की अपनी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया था। नई शर्तों के तहत, ईरान अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा केंद्र के सदस्यों को तेहरान आने और वहां मौजूद संवर्धित यूरेनियम की स्थिति की जांच करने की अनुमति देगा। इसके अलावा, ईरान अगले 10 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन की सीमा को 3 पॉइंट 67 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाएगा। यह छूट केवल ईरान की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए दी गई है।

आर्थिक लाभ और प्रतिबंधों की समाप्ति

इस समझौते के बदले में ईरान को बड़ी आर्थिक राहत मिलने वाली है। ईरान पर लागू आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त किया जाएगा और उसके फ्रीज किए गए पैसे वापस लौटाए जाएंगे। समझौते के पहले चरण में ईरान को 24 अरब डॉलर की भारी राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ईरान को हर्जाने के रूप में 300 अरब डॉलर देने की भी योजना है, लेकिन यह राशि तब दी जाएगी जब यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे का पूर्ण समाधान हो जाएगा। अगले 60 दिनों तक ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगेगा और वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल बेच सकेगा। समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल देगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं वसूलेगा।

सैन्य वापसी और भविष्य की सुरक्षा

सैन्य मोर्चे पर भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे और समझौते के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के क्षेत्रों, विशेषकर होर्मुज और ओमान की खाड़ी से अपने अतिरिक्त सैनिकों को वापस बुला लेगी। अमेरिका ओमान की खाड़ी से अपनी नाकाबंदी भी हटाएगा, जहां उसने वर्तमान में 10000 सैनिक तैनात कर रखे हैं। समझौते के पालन की निगरानी के लिए मध्यस्थ देश एक विशेष निगरानी व्यवस्था तैयार करेंगे। साथ ही, अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और तख्तापलट की कोशिश न करने का वादा किया है। अंत में, इस समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा ताकि भविष्य में इसे रद्द न किया जा सके। स्थाई समाधान के लिए पहली बैठक जिनेवा में आयोजित की जाएगी।

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