एयर इंडिया पायलट डोप टेस्ट में फेल, फुकेट दिल्ली फ्लाइट के 300 फीट नीचे गिरने का मामला

एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के पायलट के मादक पदार्थ सेवन की पुष्टि हुई है। AAIB ने DGCA से कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है।

Sep 4, 2026 - 15:35
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एयर इंडिया पायलट डोप टेस्ट में फेल, फुकेट दिल्ली फ्लाइट के 300 फीट नीचे गिरने का मामला

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी AAIB ने शुक्रवार को एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आने वाली फ्लाइट के मामले में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विमान के मुख्य पायलट की जांच में मादक पदार्थ यानी साइकोएक्टिव सब्सटेंस के सेवन की पुष्टि हुई है। जांच एजेंसी ने इस स्थिति को गंभीर चिंता का विषय करार दिया है। यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब हवा में उड़ता हुआ विमान अचानक सैकड़ों फीट नीचे आ गया था और कई यात्री चोटिल हो गए थे।

विमान और घटना का विस्तृत विवरण

यह घटना 4 अगस्त को हुई थी जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भर रही थी। इस उड़ान के लिए एयरबस A320-251N विमान का उपयोग किया जा रहा था जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-EXO था। विमान में उस समय कुल 145 लोग सवार थे जिनमें 2 पायलट और चालक दल के 6 सदस्य शामिल थे। उड़ान के दौरान विमान अचानक 300 फीट नीचे आ गया था जिससे विमान के भीतर अफरा-तफरी मच गई थी और सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए थे।

घायलों की संख्या और चिकित्सा सहायता

विमान के अचानक नीचे आने की वजह से कई यात्री और क्रू मेंबर्स को चोटें आई थीं। 10 पेज की इस शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार जब विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा तो कुल 24 लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई थी। इन 24 लोगों में से 4 लोगों को गंभीर चोटें आई थीं। AAIB ने इकट्ठा किए गए सबूतों और लोगों को लगी चोटों की गंभीरता के आधार पर इस पूरी घटना को दुर्घटना की श्रेणी में रखा है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

पायलट के डोप टेस्ट की रिपोर्ट और कार्रवाई

जांच के दौरान चालक दल के सदस्यों का परीक्षण किया गया जिसमें मुख्य पायलट की रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया। AAIB ने बताया कि मुख्य पायलट की साइकोएक्टिव सब्सटेंस से जुड़ी जांच रिपोर्ट निगेटिव नहीं पाई गई है। ब्यूरो ने स्पष्ट किया कि पायलट द्वारा मादक पदार्थ का सेवन करना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा और गंभीर मुद्दा है। इसी को देखते हुए AAIB ने विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA से सिफारिश की है कि ऐसे पदार्थों के उपयोग को रोकने के लिए प्राथमिकता के आधार पर उचित और कड़ी कार्रवाई की जाए।

जांच की प्रक्रिया और टर्बुलेंस का दावा

शुरुआती जानकारी में यह बताया गया था कि दिल्ली आते समय विमान को टर्बुलेंस यानी हवा के दबाव में बदलाव का सामना करना पड़ा था। हालांकि जांच एजेंसी अब हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है। AAIB की जांच टीम ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ही चालक दल और उड़ान दल के सदस्यों से बातचीत की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उड़ान दल के दोनों सदस्यों से इसके बाद अलग-अलग पूछताछ भी की गई है। वर्तमान में जांच एजेंसी विभिन्न पक्षों से जुटाए गए आंकड़ों और रिकॉर्ड्स का विश्लेषण कर रही है ताकि घटना के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

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