ककराना गांव में एक साथ उठीं चार अर्थियां, दो मासूम भी शामिल, अंतिम विदाई में रो पड़ा पूरा गांव

मुंबई में मृत मिले पूर्व नौसैनिक पूर्णमल मेहरा और उनके परिवार का झुंझुनूं के ककराना गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

Aug 18, 2026 - 23:35
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ककराना गांव में एक साथ उठीं चार अर्थियां, दो मासूम भी शामिल, अंतिम विदाई में रो पड़ा पूरा गांव

झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ककराना गांव के लिए सोमवार का दिन अत्यंत पीड़ादायक और हृदयविदारक रहा और मुंबई में अपने आवास पर मृत पाए गए पूर्व नौसैनिक पूर्णमल मेहरा, उनकी पत्नी ओमा और उनके दो मासूम बच्चों की पार्थिव देह जब गांव पहुंची, तो पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। एक ही परिवार के चार सदस्यों की इस तरह अचानक हुई मौत से हर ग्रामीण की आंखें नम थीं और पूरा गांव इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध नजर आया।

तिरंगा यात्रा और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई

चारों पार्थिव देहों को सबसे पहले गुढ़ागौड़जी थाने लाया गया, जहां से ग्रामीणों ने उन्हें एक भावुक तिरंगा यात्रा के रूप में ककराना गांव तक पहुंचाया। इस अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से परिवार को विदाई दी और पूर्णमल मेहरा ने भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं, इसलिए उनके सम्मान में जयपुर से सेना की एक विशेष टुकड़ी ककराना पहुंची। सेना के जवानों ने पूर्णमल मेहरा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी और इसके बाद पूर्णमल, उनकी पत्नी ओमा और दोनों बच्चों का पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

जोधपुर से शुरू हुआ था नौसेना का सफर

परिजनों ने बताया कि पूर्णमल मेहरा का चयन जोधपुर से भारतीय नौसेना में हुआ था। वह अपने काम के प्रति समर्पित थे और गांव से भी उनका गहरा जुड़ाव था और करीब 9 माह पहले वह अपने पूरे परिवार के साथ ककराना गांव आए थे। उस दौरान उन्होंने अपने परिजनों और ग्रामीणों से काफी समय बिताया और मुलाकात की थी। ग्रामीणों के लिए यह विश्वास करना कठिन हो रहा है कि जिस परिवार से वे कुछ समय पहले मिले थे, वह अब इस दुनिया में नहीं है।

दो माह पहले घर आई थी नन्ही परी

इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि करीब 2 माह पहले ही पूर्णमल के घर में एक बेटी का जन्म हुआ था। नन्ही बेटी के आगमन से पूरे परिवार में खुशियों का माहौल था और हर कोई उत्साहित था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और अचानक हुई इन चार मौतों ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। इस हादसे ने न केवल मेहरा परिवार बल्कि पूरे ककराना गांव पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

संपर्क टूटने के बाद बढ़ी थी चिंता

घटना के पीछे के घटनाक्रम को साझा करते हुए परिजनों ने बताया कि करीब 6 दिन पहले उनकी पूर्णमल से फोन पर सामान्य बातचीत हुई थी। उस समय सब कुछ ठीक लग रहा था। हालांकि, इसके बाद जब परिजनों ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो लगातार 3 दिन तक फोन करने के बावजूद दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। फोन न उठने के कारण परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी। इसके बाद जब मुंबई से उनकी मौत की खबर आई, तो पूरे गांव में मातम छा गया। घटना के बाद से ही बड़ी संख्या में लोग शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।

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