कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: ईरान विवाद से तेल कंपनियों की चांदी, टेक शेयरों में भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से गहराते तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर के शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

Aug 19, 2026 - 09:35
 0  0
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: ईरान विवाद से तेल कंपनियों की चांदी, टेक शेयरों में भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से गहराते तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर के शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार हो रही भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया है। एक तरफ जहां इस महंगे तेल ने वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की चिंताओं को जन्म दिया है, वहीं शेयर बाजार में एनर्जी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए यह स्थिति किसी बड़े अवसर से कम नहीं है। मंगलवार को एनर्जी शेयरों ने अपना नया रिकॉर्ड स्तर छू लिया, जबकि बाजार के अन्य प्रमुख सेक्टर भारी दबाव में नजर आए और कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक विकास दर पर असर पड़ने की संभावना है।

एनर्जी शेयरों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी

ब्लूमबर्ग की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, एसएंडपी 500 का एनर्जी सेक्टर इंडेक्स 1 दशमलव 8 प्रतिशत की बड़ी छलांग लगाकर अपने इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले इस इंडेक्स ने मार्च में अपना पिछला रिकॉर्ड बनाया था। जुलाई के महीने में जिन एनर्जी शेयरों में भारी गिरावट देखी गई थी, वे अब अपने निचले स्तरों से 21 प्रतिशत तक उछल चुके हैं। दुनिया की दिग्गज तेल उत्पादक कंपनियां जैसे शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल इस समय जबरदस्त मुनाफा कमा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, दूसरी तिमाही में शेवरॉन की कमाई में 240 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि एक्सॉनमोबिल के मुनाफे में 115 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिफाइनरी कंपनियों को भी इस वैश्विक आपूर्ति संकट का सीधा लाभ मिल रहा है और वे रिकॉर्ड प्रॉफिट दर्ज कर रही हैं। यह मुनाफा मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार के कारण संभव हुआ है।

युद्ध के लंबा खिंचने की आशंका और बाजार का रुख

बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों के नजरिए में एक बड़ा बदलाव आया है। कुछ समय पहले तक निवेशकों को यह उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही कोई कूटनीतिक समझौता हो जाएगा और तनाव कम होगा। इसी युद्ध विराम की उम्मीद में तेल कंपनियों के शेयरों में कुछ गिरावट भी आई थी और लेकिन अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मध्य पूर्व में तनाव इतनी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। टोरटॉयज कैपिटल के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर रॉब थम्मेल का कहना है कि पहले कई निवेशक एनर्जी शेयरों की इस तेजी का फायदा उठाने से चूक गए थे, लेकिन अब वे कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। निवेशक अब यह मानकर चल रहे हैं कि सप्लाई बाधित रहने से आने वाले लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर ही बनी रहेंगी। यह धारणा बाजार में एनर्जी शेयरों की मांग को और बढ़ा रही है।

महंगाई का बढ़ता डर और टेक शेयरों में गिरावट

एक तरफ जहां एनर्जी कंपनियां भारी मुनाफा बटोर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बाकी शेयर बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल है और महंगे कच्चे तेल का सीधा अर्थ है कि दुनिया भर में परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ेगी, जिससे आम जरूरत की चीजों के दाम बढ़ना तय है। इसी महंगाई के डर से मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी बिकवाली का दौर देखा गया। एसएंडपी 500 इंडेक्स में 0 दशमलव 7 प्रतिशत और नैस्डैक में 1 दशमलव 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एनवीडिया और इंटेल जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के शेयर इस दौरान बुरी तरह लुढ़क गए और अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4 दशमलव 70 प्रतिशत के पार चली गई है, जो जून 2007 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। बॉन्ड यील्ड में इस बढ़ोतरी ने निवेशकों को जोखिम वाली संपत्तियों जैसे कि टेक शेयरों से दूर कर दिया है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें भविष्य की कमाई के मूल्य को कम कर देती हैं।

यूरोपीय बाजारों की स्थिति और लंदन का अपवाद

यूरोप के बाजारों में भी इस तनाव का व्यापक असर देखा जा रहा है, जहां ऊर्जा संकट की आहट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और हालांकि, लंदन का शेयर बाजार यानी एफटीएसई 100 इस बड़ी गिरावट से बचने में सफल रहा। इसका मुख्य कारण यह है कि लंदन के बाजार में बीपी और शेल जैसी बड़ी एनर्जी कंपनियों का काफी दबदबा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इन कंपनियों के शेयरों में तेजी आई, जिसने बाजार को गिरने से बचा लिया। इसके विपरीत, जिन बाजारों में टेक कंपनियों की हिस्सेदारी ज्यादा है, वहां निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे वैश्विक भू-राजनीति और कच्चे तेल की कीमतें दुनिया भर के वित्तीय पोर्टफोलियो को प्रभावित कर रही हैं। आने वाले दिनों में यदि तनाव और बढ़ता है, तो बाजार में यह विभाजन और भी गहरा हो सकता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow