कच्चे तेल में भारी गिरावट: 6 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक कमी, जानें मुख्य कारण

अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की खबरों से कच्चे तेल में 13% की रिकॉर्ड गिरावट। जानें ब्रेंट क्रूड और सप्लाई चेन पर इसका असर।

Apr 11, 2026 - 15:35
 0  1
कच्चे तेल में भारी गिरावट: 6 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक कमी, जानें मुख्य कारण

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित राजनयिक वार्ता और दो सप्ताह के संघर्षविराम की घोषणा के बाद बाजार में व्याप्त 'रिस्क प्रीमियम' कम हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते एक हफ्ते में कच्चे तेल के दामों में 13% से अधिक की कमी आई है, जो साल 2020 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड के दाम गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गए हैं, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और आपूर्ति की स्थिति

बाजार विशेषज्ञों और अधिकारियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि घोषित किया गया संघर्षविराम कितना प्रभावी रहता है और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से होने वाला आवागमन फिलहाल तेहरान से जुड़े जहाजों तक ही सीमित है। राजनयिक प्रयासों का मुख्य उद्देश्य इस जलमार्ग के माध्यम से तेल की निर्बाध आपूर्ति को फिर से बहाल करना है। हालांकि, फरवरी के अंत में शुरू हुए तनाव के बाद से कीमतें अभी भी युद्ध-पूर्व स्तर के मुकाबले 30% अधिक बनी हुई हैं।

ईरानी तेल और अमेरिकी प्रतिबंधों पर दबाव

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों और उनमें दी जाने वाली छूट को लेकर भी वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है और जानकारी के अनुसार, एशिया के कई देश, जो हाल के हफ्तों में ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं, अमेरिकी वित्त विभाग पर दबाव बना रहे हैं कि रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए दी गई छूट की अवधि को आगे बढ़ाया जाए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस के नेतृत्व में इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली बातचीत को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ऊर्जा बुनियादी ढांचे को पहुंचा नुकसान

बीते सप्ताह ईरान द्वारा किए गए हमलों ने क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को काफी प्रभावित किया है और सऊदी अरब के आधिकारिक बयानों के अनुसार, इन हमलों के कारण उसकी 'पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन' से होने वाले तेल के प्रवाह में कमी आई है। इस पाइपलाइन का उपयोग सऊदी अरब लाल सागर के माध्यम से तेल निर्यात करने के लिए करता है। बुनियादी ढांचे को हुई इस क्षति ने आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता पैदा की है, जिसे ठीक करने के प्रयास जारी हैं।

रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग

मध्य-पूर्व के तेल पर निर्भर देशों ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) का उपयोग शुरू कर दिया है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के अनुसार, जापान मई महीने में अपने भंडार से लगभग 20 दिनों की आवश्यकता के बराबर तेल जारी करेगा। इसी तरह, चीन ने अपनी सरकारी रिफाइनरियों को वाणिज्यिक तेल भंडारों के इस्तेमाल की अनुमति दी है। भारत में भी बड़ी निजी रिफाइनरियों ने आपूर्ति को व्यवस्थित करने के लिए कुछ परिचालन उपाय लागू किए हैं।

वैश्विक नेताओं की बयानबाजी और कूटनीति

इस संकट के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से ईरान की स्थिति पर टिप्पणी की है, वहीं ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बाघेर गसलिबफ ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में संघर्षविराम वार्ता शुरू होने की पहली शर्त है। दूसरी ओर, यूक्रेन के वार्ताकारों ने भी रूस के साथ संभावित शांति समझौते की दिशा में कुछ प्रगति के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow