चीन की नई सैन्य चाल: लाओस में बनाया एयर बेस, वियतनाम की बढ़ी चिंता

चीन ने लाओस के बान क्यून में नया एयरबेस शुरू किया है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव और वियतनाम की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

Oct 5, 2026 - 17:35
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चीन की नई सैन्य चाल: लाओस में बनाया एयर बेस, वियतनाम की बढ़ी चिंता

चीन ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति को एक नया और बड़ा विस्तार देते हुए लाओस में अपना नया एयरबेस सक्रिय कर दिया है और यह कदम क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। 29 सितंबर 2026 को चीन के रक्षा मंत्रालय ने लाओस के बान क्यून एयरपोर्ट पर चीन-लाओस जॉइंट सपोर्ट एंड ट्रेनिंग सेंटर और चीन-लाओस फ्रेंडशिप एविएशन एकेडमी के संचालन की आधिकारिक घोषणा की। हालांकि चीन इस केंद्र को केवल पायलट ट्रेनिंग और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने का एक जरिया बता रहा है, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बेस की अहमियत बीजिंग के दावों से कहीं अधिक गहरी हो सकती है।

रणनीतिक स्थान और बुनियादी ढांचा

चीन का यह नया एयर बेस लाओस की राजधानी वियनतियाने से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर में बान क्यून में स्थित है। इस बेस पर बुनियादी ढांचा काफी मजबूत है, जिसमें लगभग 2000 मीटर लंबा रनवे शामिल है। इसके अलावा, यहां टैक्सीवे, पार्किंग एप्रन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और पांच हैंगर बनाए गए हैं। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि यह पहले अमेरिकी सैन्य और सीआईए के एयरबेस नेटवर्क के तहत आने वाले लिमा साइट 44 का हिस्सा था। अब इस रणनीतिक स्थान पर चीन का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया है।

राजनयिक संदर्भ और आधिकारिक रुख

इस नए बेस के उद्घाटन समारोह में लाओस के रक्षा मंत्री खामलींग औथाकेसन ने शिरकत की। यह उद्घाटन जून में लाओस के राष्ट्रपति थोंगलून सिसोलिथ के बीजिंग दौरे के बाद हुआ है, जहां उन्होंने चेयरमैन शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। उस दौरान शी जिनपिंग ने राष्ट्रीय रक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर रणनीतिक बातचीत की थी। चीन का दावा है कि इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य लाओस की एयरफोर्स के पायलटों की ट्रेनिंग को मजबूत करना है। चीन का कहना है कि दोनों देश इसे मिलकर चलाएंगे और इसका उद्देश्य सैन्य सहयोग बढ़ाना और इलाके में शांति और स्थिरता में योगदान देना है। चीन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह बेस किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और वियतनाम की चिंताएं

चीन के इन दावों के बावजूद, इस घटनाक्रम से सबसे ज्यादा चिंता वियतनाम को होने वाली है। चीन और वियतनाम के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक तनाव रहा है, जिसमें 1979 का हमला भी शामिल है। यह एयरबेस पीएलए को अपनी मौजूदा दक्षिण-पश्चिमी सीमा से लगभग 400 किलोमीटर दक्षिण में इंडोचीन प्रायद्वीप में पैर जमाने का मौका देता है। इसकी स्थिति वियतनाम के ठीक पश्चिम में है, जिसका अर्थ है कि चीन इसका इस्तेमाल इंडोचीन में गहराई तक प्रभाव डालने के लिए कर सकता है और वियतनाम के लिए चीन की यह स्थायी सैन्य मौजूदगी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

सैन्य निर्भरता और हथियारों की तैनाती

इस घटनाक्रम के बाद एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या लाओस अब चीन पर अधिक निर्भर हो जाएगा। वर्तमान में लाओस की एयरफोर्स छोटी है और उसके पास रूसी और चीनी मूल के विमान और हेलीकॉप्टर हैं और विशेषज्ञों को आशंका है कि चीन धीरे-धीरे लाओस को रूसी सैन्य उपकरणों से हटाकर अपने विमानों और हथियारों की ओर ले जा सकता है, जिससे लाओस की सैन्य निर्भरता बीजिंग पर बढ़ जाएगी। हालांकि चीन ने यह खुलासा नहीं किया है कि वह वहां कौन से विमान या कितने सैनिक तैनात करेगा, लेकिन सूत्रों के अनुसार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (पीएलएएएफ) वहां जेएल-8 जेट ट्रेनर्स और लाओटियन के-8डब्ल्यू विमान तैनात कर सकती है।

कंबोडिया और जिबूती के बाद अगला कदम

दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की सैन्य पहुंच अब केवल लाओस तक सीमित नहीं है। इससे पहले चीन ने कंबोडिया के रीम नेवल बेस में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, जहां अप्रैल 2025 में एक जॉइंट सपोर्ट ट्रेनिंग सेंटर खोला गया था। लाओस का बान क्यून बेस चीन की सीमा के बाहर पीएलए का पहला एयरफोर्स-विशिष्ट बेस माना जा रहा है। इससे पहले चीन का विदेशी सैन्य बेस 2017 में जिबूती में बनाया गया था। यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका दौरे पर कहा था कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार बनना चाहिए।

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