चीन की राजनीति में हलचल शी जिनपिंग की टीम से चार साल में तीस प्रतिशत बड़े अफसर हटाए गए
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की टीम के बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई से सियासी हलचल तेज है। चार साल में तीस प्रतिशत अफसर हटे।
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की टीम के कई बड़े अधिकारियों पर लगातार हो रही कार्रवाई से देश की सियासी हलचल काफी तेज हो चुकी है। चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की टीम के बड़े-बड़े अधिकारी लगातार अपने पदों से हटाए जा रहे हैं, जिनमें देश की सत्ता चलाने वाली कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेता और सेना के ताकतवर अधिकारी भी शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई अधिकारी वही हैं, जिन्हें जिनपिंग ने वर्ष 2022 में अपनी टीम का विशेष हिस्सा बनाया था। अब भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोपों के बीच इन नेताओं पर लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इन नेताओं को अचानक हटाए जाने की वजह से चीन की राजनीति में भारी हलचल मची हुई है और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर जिनपिंग की अपनी टीम में इतनी बड़ी सफाई क्यों हो रही है। उपलब्ध आंकड़े इस बड़े बदलाव की गंभीरता को पूरी तरह से बयां करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के शोधकर्ता जीन क्रिस्टोफर मिटेलस्टेड के मुताबिक, वर्ष 2022 में चुने गए चीन के 24 सदस्यीय पोलित ब्यूरो में से तीन सदस्य अब तक पूरी तरह बाहर हो चुके हैं, जो वर्ष 1980 के बाद से एक टर्म में किसी मौजूदा पोलित ब्यूरो से हटाए गए सदस्यों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
इस पूरी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक चौथाई सदस्य अब पार्टी के इस अहम हिस्से का हिस्सा नहीं रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, चीन की सबसे बड़ी सैन्य कमान संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के शुरुआती सात सदस्यों में से पांच सदस्य भी अपने पदों से हट चुके हैं। 4 प्रतिशत सदस्य ही आगामी बैठक में शामिल हो पाएंगे, यानी इसका सीधा मतलब यह है कि करीब एक चौथाई सदस्य अब उस प्रभावशाली समूह का हिस्सा नहीं रह गए हैं। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना कोई नई बात नहीं है, और शी जिनपिंग लंबे समय से भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर पार्टी और सरकारी व्यवस्था में कड़े जांच अभियान चलाते आ रहे हैं। पोलित ब्यूरो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का शीर्ष नेतृत्व समूह माना जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के शोधकर्ता जीन क्रिस्टोफर मिटेलस्टेड के अनुसार, लगातार हो रही जांच और कड़ी कार्रवाई के कारण चीन की सेंट्रल कमेटी में सदस्यों की संख्या लगातार घट रही है। उनका यह भी अनुमान है कि आगामी बैठक में सदस्यों की यह मौजूदगी माओ के बाद के दौर में सबसे कम रह सकती है। यह संख्या पिछले साल अक्टूबर में दर्ज किए गए 168 पूर्ण सदस्यों और 147 वैकल्पिक सदस्यों के आंकड़े से भी नीचे जा सकती है।
आखिर इन बड़े और रसूखदार अफसरों पर इस तरह की कार्रवाई क्यों हो रही है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस बार चर्चा इसलिए बहुत ज्यादा है, क्योंकि कार्रवाई की आंच उन बड़े अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, जो देश की सत्ता और सेना में बेहद अहम पदों पर काबिज थे। पोलित ब्यूरो के दो प्रमुख सदस्यों झांग यूशिया और मा शिंगरुई के खिलाफ भी गंभीर कार्रवाई की बात सामने आई है। इन सभी पर भ्रष्टाचार और पार्टी के अनुशासन से जुड़े कई तरह के आरोप लगाए गए हैं। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से चीन के शीर्ष नेतृत्व में बहुत बड़े बदलाव साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में शी जिनपिंग का नाम सबसे ऊपर क्यों आ रहा है, इसका जवाब उनके पदों में छिपा है। शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के शीर्ष अध्यक्ष भी हैं। वर्ष 2022 में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का चयन उनके शासनकाल के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय ही हुआ था। इसी मुख्य वजह से उस समय चुने गए अधिकारियों के इस तरह हटने को सीधे तौर पर जिनपिंग की अपनी नेतृत्व व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। इनमें कई ऐसे नेता भी शामिल हैं, जिन्हें हमेशा उनकी निजी टीम का हिस्सा माना जाता था।
इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा देश की सेना से जुड़ा हुआ है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन देश की सेना पर सर्वोच्च नियंत्रण रखने वाली सबसे ताकतवर संस्था है। इसके शुरुआती सात सदस्यों में से पांच सदस्यों के हटाए जाने की पुख्ता जानकारी सामने आई है। इतने बड़े और व्यापक स्तर पर हुए बदलाव से चीन की पूरी सैन्य व्यवस्था पर सवाल उठना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। चीन की सेना केवल देश की बाहरी सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि देश की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में उसके शीर्ष और शक्तिशाली अधिकारियों पर इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर सेना के नेतृत्व, फैसले लेने की पूरी प्रक्रिया और भविष्य की रणनीतियों पर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इन बदलावों से आने वाले समय में चीन के राजनीतिक और सैन्य समीकरणों में एक नया मोड़ आ सकता है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी नजर रखी जा रही है।
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