जीडीपी आंकड़ों पर घमासान: पूर्व वित्त सचिव के 2 पॉइंट 6 प्रतिशत ग्रोथ के दावे पर सरकार का कड़ा जवाब

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के 2 पॉइंट 6 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ के दावे को सरकार ने सांख्यिकीय रूप से गलत और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है।

Sep 2, 2026 - 15:35
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जीडीपी आंकड़ों पर घमासान: पूर्व वित्त सचिव के 2 पॉइंट 6 प्रतिशत ग्रोथ के दावे पर सरकार का कड़ा जवाब

भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की विकास दर को लेकर आर्थिक और नीतिगत गलियारों में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। यह बहस तब और तेज हो गई जब कांग्रेस पार्टी ने पूर्व वित्त सचिव के दावे को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग द्वारा भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर को महज 2 पॉइंट 6 प्रतिशत बताने वाले दावे को सरकारी सूत्रों और सांख्यिकीय विशेषज्ञों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। वित्त मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गर्ग द्वारा की गई यह गणना तकनीकी, गणितीय और सांख्यिकीय रूप से पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

सुभाष गर्ग का मुख्य दावा और तर्क

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने आधिकारिक जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए यह तर्क दिया था कि यदि महामारी से पहले के आंकड़ों और चालू तिमाही के बीच चक्रवृद्धि दर यानी सीएजीआर या किसी अलग आधार का उपयोग किया जाए, तो वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर केवल 2 पॉइंट 6 प्रतिशत ही बैठती है। उनके अनुसार, सरकार द्वारा प्रस्तुत 7 प्रतिशत से 8 प्रतिशत की सालाना जीडीपी ग्रोथ केवल बेस इफेक्ट और आंकड़ों के प्रेजेंटेशन का एक नतीजा है। गर्ग का मानना है कि यह आंकड़े इकोनॉमी के वास्तविक आकार को सही ढंग से प्रदर्शित नहीं करते हैं।

कांग्रेस के आरोप और राजनीतिक विवाद

विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी सरकार में पूर्व वित्त सचिव रहे सुभाष चंद्र गर्ग ने यह खुलासा किया है कि सरकार ने जीडीपी के आंकड़ों में किस तरह से हेर-फेर की है। पोस्ट में यह आरोप लगाया गया है कि सरकार ने इस साल की ग्रोथ रेट को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए जानबूझकर पिछले साल के जीडीपी आंकड़ों को कम करके दिखाया है और कांग्रेस का दावा है कि अगर आंकड़ों में यह हेरफेर नहीं की गई होती, तो वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7 पॉइंट 8 प्रतिशत के बजाय केवल 2 पॉइंट 6 प्रतिशत ही होती। पार्टी ने इसे सरकार के झूठ का पर्दाफाश बताया है।

सरकारी सूत्रों का तकनीकी स्पष्टीकरण

सरकारी सूत्रों और विभागीय अधिकारियों ने इन दावों का विस्तार से जवाब दिया है। उनके अनुसार, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ और विश्व बैंक की स्थापित मानक पद्धतियों के अनुसार ही जीडीपी वृद्धि की गणना सालाना आधार पर की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मनमाने ढंग से अलग-अलग अवधियों या आधार वर्षों को मिलाकर गणना करना वैश्विक सांख्यिकी के नियमों के पूरी तरह खिलाफ है। सरकारी विशेषज्ञों के अनुसार, रिकवरी फेज के दौरान किसी एक विशिष्ट आंकड़े को उठाकर उसे पूरी इकोनॉमी पर लागू करना सांख्यिकीय रूप से अमान्य है और इससे भ्रामक निष्कर्ष निकलते हैं।

आर्थिक संकेतकों की मजबूती का हवाला

सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि देश के अन्य आर्थिक संकेतक मजबूत विकास की पुष्टि करते हैं। रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन, लगातार बढ़ते यूपीआई ट्रांजैक्शन, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा हुआ पूंजीगत खर्च यह स्पष्ट करते हैं कि भारतीय इकोनॉमी 6 पॉइंट 7 प्रतिशत से 7 पॉइंट 8 प्रतिशत की वास्तविक दर से आगे बढ़ रही है। सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, सही तुलना के लिए दोनों अवधियों में एक ही तरीका और डेटा सोर्स का इस्तेमाल करना अनिवार्य होता है।

जीडीपी के आंकड़ों का गणित

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नई सीरीज के तहत नॉमिनल जीडीपी 80 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 88 लाख करोड़ 27 पैसे हो गई है, जो 10 पॉइंट 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। वहीं, रियल जीडीपी 75 लाख करोड़ 46 पैसे से बढ़कर 81 लाख करोड़ 36 पैसे हो गई है, जो 7 पॉइंट 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि अगस्त 2025 में पुरानी सीरीज के तहत 86 लाख करोड़ 5 पैसे का आंकड़ा जारी किया गया था। बाद में बेस-ईयर में बदलाव होने के कारण पूरी सीरीज के लिए कवरेज, सेक्टर के वेटेज, अनुमान लगाने के तरीके और डेटा सोर्स में बदलाव हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी पुरानी सीरीज के डिनॉमिनेटर को रखते हुए नई सीरीज से न्यूमरेटर को चुनकर गणना नहीं कर सकता है।

भ्रामक विश्लेषण के आर्थिक मायने

सरकारी सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि आर्थिक आंकड़ों का गलत या गैर-मानक विश्लेषण न केवल बाजार में भ्रम पैदा करता है, बल्कि इससे निवेशकों के भरोसे पर भी बुरा असर पड़ सकता है। सरकार ने दोहराया है कि भारत की जीडीपी गणना पूरी तरह पारदर्शी है और यह वैश्विक सांख्यिकीय सिद्धांतों पर आधारित है। भारत आज भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और पूर्व सचिव के दावों में कोई सांख्यिकीय आधार नहीं है।

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