ट्रंप का बड़ा फैसला, रूस पर नए प्रतिबंध लगाने से किया इनकार, जेलेंस्की पर लगाया गंभीर आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने का फैसला टाला और कहा कि वह युद्ध खत्म करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने जेलेंस्की पर गंभीर आरोप भी लगाए।

Oct 19, 2026 - 13:35
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ट्रंप का बड़ा फैसला, रूस पर नए प्रतिबंध लगाने से किया इनकार, जेलेंस्की पर लगाया गंभीर आरोप

अमेरिकी राजनीतिक गलियारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए प्रतिबंधों के दस्तावेजों पर फिलहाल हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की मुख्य वजह का खुलासा करते हुए स्पष्ट किया है कि वे इस समय रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध को समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक बातचीत के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया है कि यदि इस संवेदनशील दौर में रूस के खिलाफ कोई कड़ा प्रतिबंधात्मक कदम उठाया जाता है, तो इससे रूस बातचीत की मेज से पीछे हट सकता है, जिससे शांति स्थापित करने के सभी प्रयास विफल हो सकते हैं। ट्रंप का यह रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य मॉस्को के साथ संवाद के चैनलों को खुला रखना है।

अपनी बात को सार्वजनिक करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल का सहारा लिया। ट्रुथ सोशल पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने यह दावा किया कि वर्तमान में रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते को लेकर हो रही वार्ताओं में काफी अच्छी प्रगति दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच बंधकों की रिहाई और उनकी वापसी को लेकर भी गंभीर बातचीत का दौर जारी है। ट्रंप के तर्कों के अनुसार, यदि उन्होंने इस वक्त प्रतिबंधों से जुड़े दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर कर दिए होते, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर चल रही शांति वार्ताओं पर पड़ता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इन दस्तावेजों पर भविष्य में अपनी इच्छा से या जरूरत पड़ने पर किसी भी समय हस्ताक्षर करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं, लेकिन फिलहाल उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रूस के साथ बातचीत के रास्ते को बनाए रखना है ताकि किसी भी तरह की प्रगति बाधित न हो।

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस और ईरान के संबंधों को लेकर भी एक दिलचस्प टिप्पणी की है। ट्रंप के अनुसार, रूस वर्तमान में ईरान की उतनी सहायता नहीं कर रहा है, जितनी वह सैद्धांतिक रूप से कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इच्छा जताई है कि कूटनीतिक संतुलन की दृष्टि से यही वर्तमान स्थिति आगे भी बनी रहनी चाहिए, ताकि पश्चिम एशिया और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा समीकरणों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े और रूस के साथ कूटनीतिक नरमी बरतने के पीछे ट्रंप की यह भी मंशा है कि मॉस्को को किसी भी प्रकार से नाराज न किया जाए, जिससे वैश्विक राजनीति में अमेरिका के शांति प्रयासों को झटका लगे।

हालांकि एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप रूस के प्रति नरमी का रुख अपना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि वे लगातार रूस की डीजल रिफाइनरियों को निशाना बनाकर उन पर हमले कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, इन यूक्रेनी हमलों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल की सप्लाई चेन और वैश्विक ईंधन बाजार पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इस स्थिति की वजह से अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था और बाजार भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ट्रंप ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन आर्थिक प्रभावों के कारण देश के आम किसानों, मवेशीपालकों और विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

रूस की आर्थिक स्थिति और तेल विपणन पर बात करते हुए ट्रंप ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की तरफ से लगातार हमले किए जाने के बावजूद रूस पर कोई विशेष बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है, और रूस इसके बावजूद दुनिया भर के बाजारों में बेहद कम कीमत पर लाखों बैरल डीजल का खुलकर व्यापार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि यूक्रेनी रणनीतिक हमले वैश्विक ऊर्जा बाजार को तो अस्थिर कर रहे हैं, लेकिन रूस की व्यावसायिक क्षमता पर इसका अपेक्षित कमजोर करने वाला असर नहीं दिख रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में अमेरिकी नागरिकों और व्यवसायों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ट्रंप ने खुलकर आरोप लगाया कि जेलेंस्की वास्तव में इस युद्ध को समाप्त करने की कोई इच्छा नहीं रखते हैं, और शायद अतीत में भी उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं रही होगी। अपने इस दावे के समर्थन में ट्रंप ने अतीत का हवाला देते हुए कहा कि आज की तुलना में दो साल पहले की भू-राजनीतिक परिस्थितियां बहुत अलग थीं और जेलेंस्की को उस समय आज के मुकाबले कहीं अधिक बेहतर और अनुकूल शांति समझौता मिल सकता था, जिसका लाभ उन्होंने नहीं उठाया।

यूक्रेन को मिल रही बाहरी वित्तीय और आर्थिक सहायता का जिक्र करते हुए ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश आज भी राष्ट्रपति जेलेंस्की को भारी मात्रा में बड़ी आर्थिक मदद और सहायता पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को भी आड़े हाथों लिया और उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान यूक्रेन को बेहिसाब अमेरिकी धन और वित्तीय सहायता पहुंचाई, जिससे इस लंबे खिंचने वाले संघर्ष को और बढ़ावा मिला। ट्रंप के अनुसार, इस प्रकार की अंधाधुंध विदेशी वित्तीय सहायता ने युद्ध के समाधान की दिशा में रचनात्मक भूमिका निभाने के बजाय संघर्ष को लंबा खींचने का ही काम किया है।

यूक्रेन की वर्तमान दयनीय स्थिति का विस्तृत चित्रण करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि इस लंबे युद्ध के कारण यूक्रेन का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है और देश की भारी-भरकम उपजाऊ जमीन अब उनके हाथ से निकलकर दूसरे नियंत्रण में चली गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस संघर्ष के चलते यूक्रेन की समुद्र तक सीधी पहुंच पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है, जो किसी भी देश की आर्थिक और सामरिक दृष्टि से बहुत बड़ा झटका है। मानवीय क्षति का जिक्र करते हुए ट्रंप ने बताया कि देश की पुरुष आबादी में भारी कमी आई है, क्योंकि युद्ध के मैदान में बड़ी संख्या में पुरुष या तो मारे जा चुके हैं या फिर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिससे देश का सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

अपनी बात के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि उनकी मूल और अंतिम इच्छा इस विनाशकारी रूस-यूक्रेन युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने की है। उन्होंने अपनी नीति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलहाल उनकी सबसे पहली और बड़ी प्राथमिकता रूस के साथ सभी उपलब्ध चैनलों के माध्यम से बातचीत की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखना है, ताकि किसी भी ऐसे अदूरदर्शी कदम से बचा जा सके जो शांति स्थापित करने की इन नाजुक और महत्वपूर्ण कोशिशों को नुकसान पहुंचा सके। ट्रंप का यह संपूर्ण दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि वे कूटनीतिक संवाद और कड़े प्रतिबंधों से बचने की नीति को प्राथमिकता देते हुए इस संघर्ष का कूटनीतिक समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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