डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, अमेरिका में जितने दिन चाहें रह सकते हैं फ्लावियो

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ब्राजील चुनाव हारने वाले फ्लावियो बोल्सोनारो जब तक चाहें अमेरिका में रह सकते हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने उन्हें लाने में

Nov 1, 2026 - 13:35
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डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, अमेरिका में जितने दिन चाहें रह सकते हैं फ्लावियो

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में हार का सामना करने के बाद अमेरिका पहुंचे फ्लावियो बोल्सोनारो को लेकर अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद और चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि फ्लावियो अमेरिका में जितने समय तक चाहें, उतनी अवधि तक रह सकते हैं और इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दूसरी ओर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें यह कहा जा रहा था कि ट्रंप प्रशासन ने फ्लावियो को ब्राजील से अमेरिका लाने में किसी भी प्रकार की कोई मदद की थी। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका सरकार इस पूरी योजना में कहीं से भी शामिल नहीं थी।

फ्लावियो बोल्सोनारो ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में पराजित होने के बाद बुधवार को अमेरिका के मियामी शहर पहुंचे थे। उनके इस आगमन से ठीक एक दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई थी कि फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका का वैध वीजा प्रदान किया जाएगा। फ्लावियो ने 25 अक्टूबर को आयोजित हुए ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लिया था जहां उन्हें मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनावी हार के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य और देश छोड़ने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे जो अब सच साबित हुए हैं।

अटलांटा में यूएस और ब्राजील के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण मुलाकात

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को अटलांटा में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में दोहराया कि अमेरिकी सरकार फ्लावियो को अमेरिका लाने की किसी भी प्रकार की योजना या अभियान में शामिल नहीं थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका को केवल इस बात की जानकारी मिली थी कि फ्लावियो अमेरिका पहुंच चुके हैं। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि फ्लावियो के पास पहले से ही अमेरिकी वीजा मौजूद था और राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें अमेरिका में आने की अनुमति प्रदान की थी।

अपनी कूटनीतिक बैठकों के सिलसिले में रुबियो ने यह भी साझा किया कि उन्होंने शुक्रवार और शनिवार को ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से भी आधिकारिक मुलाकात की है। दोनों देशों के उच्च अधिकारी आगामी नवंबर महीने में फ्रांस में आयोजित होने वाली विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक में एक बार फिर से मिल सकते हैं। इसके अलावा दोनों देशों के विदेश मंत्री आने वाले हफ्तों में दोबारा फोन या अन्य माध्यमों से बातचीत करेंगे। यह उच्च स्तरीय मुलाकातें दिसंबर के महीने में मियामी में होने वाली जी-20 देशों के नेताओं की शिखर बैठक से ठीक पहले आयोजित की जा रही हैं जिससे दोनों देशों के बीच संवाद बना हुआ है।

चुनावी हार के बाद देश छोड़कर अमेरिका पहुंचे फ्लावियो

गौरतलब है कि फ्लावियो ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी आधिकारिक हार को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने बिना किसी ठोस सबूत के सार्वजनिक रूप से चुनाव में धोखाधड़ी होने का गंभीर आरोप लगाया है। उनके इस रुख की समानता उनके पिता और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो से की जा रही है जिन्होंने वर्ष 2022 में लूला दा सिल्वा से मिली हार को स्वीकार नहीं किया था। वर्तमान में जायर बोल्सोनारो तख्तापलट की साजिश रचने के एक गंभीर मामले में 27 साल की लंबी सजा काट रहे हैं और जेल में बंद हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान फ्लावियो को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अप्रत्यक्ष समर्थन भी प्राप्त हुआ था। ब्राजील में फ्लावियो के खिलाफ भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और भारी टैक्स चोरी जैसे कई गंभीर मामलों की जांच चल रही है और ब्राजील की पुलिस ने उनके देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए उन्हें अपना पासपोर्ट तत्काल जमा कराने का सख्त आदेश दिया था। इसके अलावा आगामी 1 फरवरी से ब्राजील की नई संसद अपना नियमित कामकाज शुरू कर देगी। इस नई संसद के गठन के साथ ही फ्लावियो की सीनेटर की सीट हमेशा के लिए चली जाएगी जिससे उनकी राजनीतिक मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

अमेरिका और ब्राजील के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित अपने प्रसिद्ध मार-ए-लागो क्लब में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी फिलहाल फ्लावियो से मिलने की कोई योजना नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका में फ्लावियो के रहने पर किसी भी प्रकार की कोई समय सीमा या पाबंदी नहीं लगाई गई है। इस बीच मार्को रुबियो और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के बीच हुई बातचीत से दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से खराब हुए कूटनीतिक रिश्तों में सुधार की उम्मीद बंधती नजर आ रही है।

पिछले कई महीनों से अमेरिका और ब्राजील के द्विपक्षीय संबंधों में काफी तनाव बना हुआ था। अब दोनों देशों की सरकारें आपसी तनाव को कम करने और कूटनीतिक संवाद स्थापित करने के नए रास्ते तलाश रही हैं। फ्लावियो बोल्सोनारो का यह अमेरिका प्रवास आने वाले दिनों में दोनों देशों की राजनीति और कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इस पूरे प्रकरण पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी गहरी नजर बनी हुई है क्योंकि इससे दक्षिण अमेरिकी राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है।

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