दिल्ली विंटर एक्शन प्लान: सीएम रेखा गुप्ता ने नॉन-BS6 वाहनों पर बैन और डबल पार्किंग फीस का किया ऐलान
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने 2026 के लिए विंटर एक्शन प्लान जारी किया है, जिसमें नॉन-BS6 वाहनों पर प्रतिबंध, पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी और निर्माण कार्यों पर सख्त निगरानी शामिल है।
दिल्ली सरकार ने सर्दियों के मौसम में राजधानी में बढ़ने वाले प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को शीतकालीन वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजना की घोषणा करते हुए बताया कि इस बार सरकार प्रदूषण बढ़ने का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि पहले से ही सख्त कदम उठाएगी और सीएम ने कहा कि अब तक प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंचने के बाद प्रतिबंध लगाए जाते थे, जिससे एजेंसियों और आम जनता को तैयारी का समय नहीं मिल पाता था। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने इस बार समय से पहले ही विंटर एक्शन प्लान 2026 का खाका पेश कर दिया है ताकि सभी संबंधित विभाग और नागरिक मानसिक रूप से तैयार रहें।
वाहनों के लिए कड़े नियम और प्रतिबंध
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण योजना 2026 के तहत वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-बीएस-6 (नॉन-BS VI) कमर्शियल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर पूरी तरह से रोक रहेगी। इसके साथ ही, दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन दें जिनके पास वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUCC) होगा। सरकार का मानना है कि इन उपायों से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले पुराने और अनियंत्रित वाहनों की संख्या में भारी कमी आएगी, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी और वर्क फ्रॉम होम
निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया जाएगा। इसके अलावा, सड़कों पर ट्रैफिक के दबाव और उससे होने वाले धुएं को कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में अलग-अलग समय (स्टैगर्ड टाइमिंग्स) पर काम शुरू करने की व्यवस्था लागू की जाएगी। कई कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा भी दी जाएगी ताकि सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम हो सके और प्रदूषण के स्तर को नीचे लाया जा सके।
निर्माण कार्यों पर सख्त निगरानी और एंटी-स्मॉग गन
सर्दियों के दौरान धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण स्थलों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सभी निर्माण एजेंसियों को पर्यावरण नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। विशेष रूप से 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच, जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होने की संभावना होती है, कुछ निर्माण कार्यों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हालांकि, आवश्यक और आपातकालीन परियोजनाओं को इन प्रतिबंधों से छूट दी जा सकती है और बड़े निर्माण स्थलों पर धूल को दबाने के लिए एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
ड्रोन से निगरानी और खुले में आग पर रोक
सर्दियों में कचरा और पत्तियां जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार इस बार आधुनिक तकनीक का सहारा लेगी। प्रदूषण फैलाने वाली ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन से निगरानी की जाएगी और फील्ड टीमों को भी सक्रिय किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आरडब्ल्यूए (RWA) और अन्य संस्थानों से विशेष अपील की है कि वे अपने सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों के लिए ठंड से बचने हेतु आग जलाने के बजाय सुरक्षित हीटिंग व्यवस्था करें। नियमों का उल्लंघन कर खुले में आग जलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सीएम ने जोर देकर कहा कि प्रदूषण के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार अकेले नहीं जीत सकती, इसमें दिल्ली के हर नागरिक और संस्थान का सहयोग अनिवार्य है।
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