धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल, CJP ने बताया लोकतंत्र की बड़ी जीत

नीट पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। जंतर-मंतर पर छात्रों का जश्न, विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया।

Jul 25, 2026 - 18:35
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल, CJP ने बताया लोकतंत्र की बड़ी जीत

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के ऐलान के साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर और देश भर के युवाओं के बीच जश्न की लहर दौड़ गई है। नीट पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र सड़कों पर थे और उनकी इस निरंतर लड़ाई ने आखिरकार रंग दिखाया है। इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में स्वीकार किया। छात्रों का मानना है कि यह इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की हार है जिसने लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। पूरे देश के छात्र इस लंबे समय से चल रही लड़ाई को अब एक निर्णायक मोड़ पर देख रहे हैं और जंतर-मंतर पर छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इसे लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया।

लोकतंत्र की जीत: सीजेपी संस्थापक का बयान

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने कहा कि जब जनता और विशेष रूप से युवा अपनी मांगों को लेकर अडिग रहते हैं, तो सत्ता को झुकना ही पड़ता है। दिपके के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि जवाबदेही से कोई बच नहीं सकता। उन्होंने इस आंदोलन में शामिल हर छात्र और नागरिक को बधाई दी जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपना हौसला नहीं खोया। सीजेपी इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही है और उनका कहना है कि यह तो बस एक शुरुआत है।

विपक्षी नेताओं ने युवा शक्ति को किया सलाम

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने छात्रों के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि युवा शक्ति जिंदाबाद, छात्र शक्ति जिंदाबाद। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियों को दोहराते हुए कहा कि जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है। सिंह ने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों युवाओं ने अपने आंदोलन के बदौलत कुम्भकरण की नींद में सो रही मोदी सरकार को जगाया और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर किया। उन्होंने आगे कहा कि पेपर लीक से शुरू हुई यह लड़ाई अब रोज़गार के मुद्दे तक जाएगी और अब देश में हर गलती की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने आंदोलन की इस विजय पर सभी को बधाई दी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों की गूंज आखिरकार अंहकारी सत्ता की दहलीज़ तक पहुंच गई है। खरगे ने इसे करोड़ों युवाओं की जीत बताया जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज उठाई। उन्होंने इसे सत्य की जीत और मोदी सरकार के हठ की हार करार दिया। खरगे ने उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जिन्होंने इस भ्रष्ट व्यवस्था के कारण अपने बच्चों को खोया। उन्होंने साझा विपक्ष की भूमिका की भी सराहना की जिसने संसद से सड़क तक छात्रों के हित में आवाज उठाई। खरगे ने मांग की कि अब प्रधानमंत्री मोदी को युवा पीढ़ी से माफी मांगनी चाहिए और उन अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने छात्रों पर लाठी-डंडे और पैलेट गन चलवाई।

केजरीवाल और सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरे देश को बधाई दी और इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। वहीं, मशहूर शिक्षा सुधारक और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने इसे 'सीधा लोकतंत्र' कहा जो सड़कों से निकला है। उन्होंने कहा कि यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। वांगचुक ने सीजेपी और देश की 'जेन ज़ेड' (Gen Z) को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने उन सभी नागरिकों का धन्यवाद किया जिन्होंने डर को त्यागकर देश के हर कोने से अपनी आवाज बुलंद की। वांगचुक ने कहा कि अब हम जवाबदेही से सुधार की दिशा में बढ़ रहे हैं। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने भी इस मौके पर कहा कि यह अभी केवल शुरुआत है और हमें इस लड़ाई को इसके तार्किक अंत तक ले जाना है।

शरद पवार ने सराहा 28 दिनों का संघर्ष

एनसीपी नेता शरद पवार ने जंतर-मंतर पर डटे युवाओं के धैर्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं ने लगातार 28 दिनों तक जो संघर्ष और दृढ़ संकल्प दिखाया, वह वाकई तारीफ के काबिल है। पवार ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की जोरदार मांग के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आखिरकार आज इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस लड़ाई को लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक बताया, जो बिना डरे ज़ुल्म के खिलाफ मज़बूती से खड़ी रही और सरकार को अन्याय के लिए नैतिक ज़िम्मेदारी लेने पर मजबूर किया।

CJP की मांगों की अपडेटेड लिस्ट

इस्तीफे के बाद सीजेपी ने अपनी मांगों की सूची को अपडेट किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अभी भी कई महत्वपूर्ण मांगें अधूरी हैं:

  • 1. धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना चाहिए – यह मांग पूरी हो गई है
  • 2. आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा – अभी लंबित है
  • 3. विरोध करने वाले किसी भी छात्र के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए – अभी लंबित है
  • 4. आरएएफ (RAF) और दिल्ली पुलिस की तरफ़ से सार्वजनिक माफ़ी – अभी लंबित है

जंतर-मंतर पर मौजूद छात्र और पूरा देश अभी भी इन बाकी मांगों पर सरकार की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। छात्रों का कहना है कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं और शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं दिखता, उनका सतर्क रहना जरूरी है।

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