पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की छापेमारी, आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद होने का दावा

असम पुलिस ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली आवास पर छापेमारी कर आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद करने का दावा किया है। यह कार्रवाई सीएम की पत्नी की शिकायत पर हुई।

Apr 7, 2026 - 14:35
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पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की छापेमारी, आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद होने का दावा

असम में विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के प्रचार के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़ी राजनीतिक हलचल देखी गई और मंगलवार को असम पुलिस की एक टीम दिल्ली पुलिस के सहयोग से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रवक्ता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची। यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइंया सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एक प्राथमिकी (FIR) के आधार पर की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी पवन खेड़ा द्वारा हाल ही में मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर लगाए गए भ्रष्टाचार और पासपोर्ट संबंधी आरोपों के सिलसिले में की गई है।

निजामुद्दीन स्थित आवास पर पुलिस की कार्रवाई

असम पुलिस की टीम मंगलवार सुबह दिल्ली के पॉश इलाके निजामुद्दीन स्थित पवन खेड़ा के घर पहुंची। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तलाशी अभियान कई घंटों तक चला। हालांकि, जिस समय पुलिस वहां पहुंची, पवन खेड़ा अपने घर पर मौजूद नहीं थे। तलाशी प्रक्रिया पूरी करने के बाद घर से बाहर निकली असम पुलिस की टीम ने मीडिया को जानकारी दी कि उन्हें तलाशी के दौरान कुछ 'आपत्तिजनक दस्तावेज' प्राप्त हुए हैं। पुलिस ने इन दस्तावेजों की प्रकृति के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि ये दस्तावेज मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान असम पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग प्रदान किया।

तीन पासपोर्ट और विदेशी नागरिकता के गंभीर आरोप

इस पूरी कानूनी कार्रवाई की जड़ें उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में हैं जो पवन खेड़ा ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित की थी। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइंया सरमा के पास कथित तौर पर तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। खेड़ा के दावों के अनुसार, उनके पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE), एंटीगुआ-बारबुडा और मिस्र के पासपोर्ट हैं। उन्होंने इन पासपोर्टों की वैधता अवधि का भी उल्लेख किया था, जिसमें कहा गया था कि ये क्रमशः मार्च 2027, अगस्त 2031 और फरवरी 2029 में समाप्त हो रहे हैं। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया था कि एक भारतीय नागरिक के पास विदेशी पासपोर्ट होना न केवल अवैध है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी नियमों का भी उल्लंघन है।

विदेशी संपत्ति और शेल कंपनियों का दावा

पासपोर्ट के अलावा, कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री के परिवार पर विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने के भी आरोप लगाए हैं और गुवाहाटी और दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ताओं के दौरान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से तीन विशिष्ट सवाल पूछे थे। पहला सवाल दुबई में कथित संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर था। दूसरा सवाल अमेरिका के व्योमिंग (Wyoming) प्रांत में पंजीकृत कंपनियों से संबंधित था। तीसरा आरोप यह था कि मुख्यमंत्री के परिवार की पूंजी कथित तौर पर शेल कंपनियों (Shell Companies) के माध्यम से निवेश की गई है। कांग्रेस ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री इन संपत्तियों के संबंध में चुनाव आयोग को एक अतिरिक्त हलफनामा सौंपें, क्योंकि उनके अनुसार इन संपत्तियों का उल्लेख नामांकन के समय दाखिल किए गए मूल हलफनामे में नहीं किया गया था।

मुख्यमंत्री की पत्नी की कानूनी कार्रवाई और एफआईआर

कांग्रेस के इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन्हें पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि वह और उनका परिवार इन 'झूठे आरोपों' के खिलाफ कानूनी कदम उठाएंगे। इसके तुरंत बाद, रिनिकी भुइंया सरमा ने असम में पुलिस के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पवन खेड़ा पर मानहानि और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया गया और इसी शिकायत के आधार पर असम पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच के लिए दिल्ली का रुख किया। मुख्यमंत्री ने रविवार को ही संकेत दे दिए थे कि चुनावी लाभ के लिए उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है और वे अदालत में अपनी बात रखेंगे।

असम चुनाव के अंतिम चरण का राजनीतिक संदर्भ

यह पूरी घटना असम में 9 अप्रैल को होने वाले अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले घटित हुई है। राज्य में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है और कांग्रेस इन आरोपों के जरिए सत्ताधारी भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है। पवन खेड़ा ने देरी से आरोप लगाने के सवाल पर कहा था कि उनके पास जानकारी पहले से थी, लेकिन तथ्यों की गहन जांच और सत्यापन के कारण प्रेस कॉन्फ्रेंस में समय लगा। दूसरी ओर, गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी थी कि वे धार्मिक ग्रंथों की शपथ लेकर इन आरोपों को नकारें और भाजपा ने इसे कांग्रेस की हताशा करार दिया है, जबकि कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई बता रही है। पुलिस की इस छापेमारी ने अब इस राजनीतिक विवाद को एक गंभीर कानूनी मोड़ दे दिया है।

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