पाकिस्तान में साइबर अपराध पर बड़ा प्रहार: 8 अवैध कॉल सेंटरों पर छापा, 320 गिरफ्तार
पाकिस्तान की NCCIA ने लाहौर में आठ अवैध कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर 320 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 21 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
पाकिस्तान के लाहौर शहर में संगठित साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने आठ अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया है। इस व्यापक छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कुल 320 लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के अनुसार, ये कॉल सेंटर अवैध रूप से संचालित किए जा रहे थे और इनके माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी, ऑनलाइन उत्पीड़न और हनी-ट्रैपिंग जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। यह कार्रवाई पाकिस्तान में साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
लाहौर में छापेमारी और गिरफ्तारियों का विवरण
NCCIA ने इस सप्ताह लाहौर के विभिन्न इलाकों में स्थित आठ संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस ऑपरेशन के दौरान पकड़े गए 320 लोगों में 20 महिलाएं और 21 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि ये कॉल सेंटर पूरी तरह से अवैध थे और इनके पास संचालन के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग इन अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था। गिरफ्तार किए गए सभी व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस नेटवर्क की गहराई का पता लगाया जा सके।
गिरफ्तार विदेशी नागरिकों की पहचान
NCCIA के एडिशनल डायरेक्टर आतिफ अमीर ने शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार किए गए 21 विदेशी नागरिकों में विभिन्न देशों के लोग शामिल हैं। इनमें 12 नागरिक चीन के हैं, जबकि 5 फिलीपींस, 2 वियतनाम, 1 मलेशिया और 1 नेपाल का नागरिक है। इतनी बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों की संलिप्तता यह संकेत देती है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह हो सकता है जो पाकिस्तान की धरती का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर साइबर अपराध कर रहा था। एजेंसी अब इन विदेशी नागरिकों के वीजा और उनके यहां आने के उद्देश्यों की गहनता से जांच कर रही है।
हनी-ट्रैपिंग और सोशल मीडिया का दुरुपयोग
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इन कॉल सेंटरों के मुख्य संचालकों ने हनी-ट्रैपिंग के लिए विशेष रूप से 20 युवतियों को काम पर रखा था। आतिफ अमीर के अनुसार, इन युवतियों का काम सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसाना था। एक बार जब पीड़ित इनके झांसे में आ जाता था, तो उसे निजी बातचीत या अन्य माध्यमों से ब्लैकमेल किया जाता था और उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। यह गिरोह सामाजिक संबंधों का फायदा उठाकर लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी का जाल
एजेंसी की जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से 100 से अधिक संदिग्ध ऐसे थे जो विशेष रूप से विदेशों में रहने वाले लोगों को अपना निशाना बना रहे थे। ये संदिग्ध ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के नागरिकों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी कर रहे थे। इन देशों के नागरिकों को विभिन्न प्रकार के झांसे देकर उनके बैंक खातों और व्यक्तिगत जानकारी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था और हालांकि, आतिफ अमीर ने स्पष्ट किया कि इन सभी आरोपों की पुष्टि विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
कानूनी कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्यों की जांच
पुलिस ने सभी गिरफ्तार संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान के प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट, 2016 की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। यह कानून साइबर अपराधों से निपटने के लिए पाकिस्तान का मुख्य कानूनी ढांचा है। छापेमारी के दौरान जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरणों, जैसे कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। इन उपकरणों से प्राप्त डेटा इस गिरोह के काम करने के तरीके और उनके अन्य साथियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है।
साइबर अपराध रोकने के लिए AI का उपयोग
भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए NCCIA अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है और एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि वे ऑनलाइन अपराधों का पता लगाने और उनकी जांच करने की अपनी क्षमता को और अधिक मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। AI की मदद से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और अपराधियों के नेटवर्क को ट्रैक करना आसान हो जाएगा और एजेंसी का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहना है ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके।
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