पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका: इंडियन बास्केट कच्चा तेल 100 डॉलर के पार

भारतीय बास्केट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंचने से अक्टूबर में पेट्रोल और डीजल 3 से 5 रुपये महंगा होने की संभावना है।

Sep 8, 2026 - 19:35
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पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका: इंडियन बास्केट कच्चा तेल 100 डॉलर के पार

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द ही इजाफा देखने को मिल सकता है और इसके पीछे एक बड़ा कारण सामने आया है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत 100 डॉलर के स्तर को पार कर गई है। 8 सितंबर को इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत 100 डॉलर 75 सेंट दर्ज की गई है। इससे पहले बीते शुक्रवार को भी इसकी कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी। यह लगातार दूसरा कारोबारी दिन है जब देश में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से इंडियन बास्केट में यह उछाल देखने को मिला है।

मई के बाद पहली बार 100 डॉलर का स्तर पार

देश में कच्चे तेल की कीमतों का यह स्तर काफी समय बाद देखने को मिला है। इससे पहले आखिरी बार मई के महीने में इंडियन बास्केट के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गए थे। अगर पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल के महीने में इंडियन बास्केट के दाम 114 डॉलर 48 सेंट प्रति बैरल पर थे। इसके बाद मई के महीने में औसत कीमत 106 डॉलर 23 सेंट प्रति बैरल रही। जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में कीमतों में कुछ राहत मिली थी, जहां औसत दाम क्रमशः 83 डॉलर 22 सेंट, 82 डॉलर 4 सेंट और 90 डॉलर 19 सेंट प्रति बैरल दर्ज किए गए थे। लेकिन अब सितंबर में कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं, जो चिंता का विषय है।

जुलाई से अब तक 23 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि जुलाई महीने के बाद से इंडियन बास्केट में करीब 23 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। जुलाई में औसत कीमत 82 डॉलर 4 सेंट प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर 75 सेंट प्रति बैरल पर आ गई है। इसका सीधा मतलब है कि इंडियन बास्केट में करीब 18 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, अप्रैल के 114 डॉलर 48 सेंट के मुकाबले मौजूदा दाम अब भी करीब 12 प्रतिशत कम हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इंडियन बास्केट का 100 डॉलर के पार होना ही पर्याप्त संकेत है।

अक्टूबर में बढ़ सकते हैं पेट्रोल और डीजल के दाम

कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, अगर पूरे सितंबर के महीने में इंडियन बास्केट की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा बनी रहती है, तो अक्टूबर के महीने में आम जनता को महंगाई का झटका लग सकता है। उन्होंने अनुमान जताया है कि ऐसी स्थिति में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतों में काफी अनिश्चितता है। मिडिल ईस्ट में तनाव कीमतों को ऊपर ले जा रहा है, लेकिन भारत के लिए राहत की बात यह है कि देश के पास अब पहले से कहीं ज्यादा सप्लायर मौजूद हैं, जिससे कच्चे तेल की सप्लाई में फिलहाल कोई बड़ी बाधा नहीं दिख रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और भू-राजनीतिक तनाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतें उफान पर हैं और खाड़ी देशों का कच्चा तेल यानी ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर के पार पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी क्रूड के दाम में भी 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है और यह 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। सऊदी अरब की जिजान रिफाइनरी पर हुए हालिया हमलों ने भी बाजार में डर का माहौल पैदा किया है। इस रिफाइनरी की क्षमता रोजाना 400000 बैरल कच्चा तेल प्रोसेस करने की है और यमनी सेनाएं अक्सर इसे निशाना बनाती रही हैं। इसके अलावा, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में एक नया शिपिंग कॉरिडोर बनाने की घोषणा ने भी तेल की कीमतों में आग लगाने का काम किया है।

ईरान की अमेरिका को चेतावनी

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में वाशिंगटन को ईरान की नई मिसाइलों से स्पष्ट संकेत मिल चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो पर्शियन गल्फ में समुद्री निषेध क्षेत्र बनाकर नाकेबंदी की जाएगी। ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों और ठिकानों के प्रति अपने ऑपरेशनल रुख में भी बुनियादी बदलाव किया है। इन तमाम वैश्विक परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना कम दिख रही है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

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