भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटा, 723.608 अरब डॉलर रहा

20 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.608 अरब डॉलर रह गया है। आरबीआई के आंकड़ों की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Feb 28, 2026 - 06:35
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटा, 723.608 अरब डॉलर रहा

11 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है। 608 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है। हालांकि इस गिरावट के बावजूद, भारत का भंडार वैश्विक स्तर पर अत्यंत मजबूत स्थिति में बना हुआ है और यह देश की बाहरी आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड और पिछले सप्ताह की स्थिति

727 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time High) पर पहुंच गया था। 774 अरब डॉलर का रिकॉर्ड बनाया था। 11 अरब डॉलर की कमी को अर्थशास्त्री एक सामान्य बाजार सुधार और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में होने वाले बदलावों के परिणाम के रूप में देख रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान भारत के भंडार में निरंतर वृद्धि देखी गई है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में बदलाव का प्रभाव

विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा 'विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां' (Foreign Currency Assets - FCA) होती हैं। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, समीक्षाधीन सप्ताह में एफसीए में उल्लेखनीय कमी आई है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की होल्डिंग भी शामिल होती है। जब वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में मजबूत होता है, तो इन गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में डॉलर के संदर्भ में कमी आती है, जिसका सीधा असर कुल भंडार के आंकड़ों पर पड़ता है। अधिकारियों के अनुसार, भंडार में आई हालिया गिरावट का एक मुख्य कारण डॉलर की मजबूती और विनिमय दर में होने वाला उतार-चढ़ाव है।

स्वर्ण भंडार और विशेष आहरण अधिकार की स्थिति

विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य महत्वपूर्ण घटकों में स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) और विशेष आहरण अधिकार (SDR) शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में होने वाले बदलावों के कारण उतार-चढ़ाव देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे गए विशेष आहरण अधिकार और भारत की आरक्षित स्थिति (Reserve Position) भी कुल भंडार का हिस्सा हैं। आरबीआई इन घटकों का प्रबंधन इस तरह से करता है कि देश के पास किसी भी आपातकालीन स्थिति या भुगतान संतुलन के संकट से निपटने के लिए पर्याप्त तरलता बनी रहे। वर्तमान में भारत का स्वर्ण भंडार भी ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर बना हुआ है, जो विविधीकरण की रणनीति का हिस्सा है।

आरबीआई का बाजार हस्तक्षेप और मुद्रा स्थिरता

बाजार विशेषज्ञों और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक अक्सर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है ताकि भारतीय रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक अस्थिरता को रोका जा सके। जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक डॉलर की बिक्री करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आती है। इसके विपरीत, जब बाजार में डॉलर की आवक अधिक होती है, तो आरबीआई डॉलर खरीदकर भंडार बढ़ाता है और 20 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की गतिविधियों और वैश्विक व्यापारिक लेन-देन ने भी भंडार की स्थिति को प्रभावित किया है। आरबीआई का प्राथमिक उद्देश्य रुपये को एक निश्चित दायरे में रखना और आयातकों व निर्यातकों के लिए स्थिरता सुनिश्चित करना है।

आर्थिक सुरक्षा कवच और वैश्विक तुलना

608 अरब डॉलर का वर्तमान भंडार भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। यह भंडार देश के लगभग एक वर्ष से अधिक के आयात बिल को कवर करने के लिए पर्याप्त है। वैश्विक स्तर पर चीन, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के बाद भारत सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में शामिल है। यह मजबूत स्थिति अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और विदेशी निवेशकों के बीच भारत की साख को बढ़ाती है। अधिकारियों का कहना है कि मजबूत निर्यात प्रदर्शन और स्थिर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह के कारण आने वाले समय में भंडार की स्थिति और भी सुदृढ़ होने की संभावना है। वर्तमान गिरावट को केवल एक अल्पकालिक तकनीकी बदलाव माना जा रहा है।

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