भारतीयों की पहली पसंद बने पुतिन ट्रंप पर भरोसा घटा प्यू रिसर्च सर्वे का खुलासा
प्यू रिसर्च के नए सर्वे में 51 प्रतिशत भारतीयों ने व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा जताया है जबकि डोनाल्ड ट्रंप की रेटिंग गिरकर 39 प्रतिशत रह गई है।
प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए एक व्यापक नए सर्वेक्षण ने वैश्विक नेताओं के प्रति लोगों की धारणा में महत्वपूर्ण बदलावों का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारतीयों के बीच सबसे भरोसेमंद नेता के रूप में उभरे हैं। सर्वेक्षण में शामिल 51 प्रतिशत भारतीयों ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में पुतिन के नेतृत्व पर अपना विश्वास व्यक्त किया है। इसके विपरीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति भारतीयों के भरोसे में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है और यह सर्वेक्षण 8 फरवरी से 13 मई 2026 के बीच आयोजित किया गया था जिसमें 36 देशों के 42,151 लोगों की राय ली गई थी। यह डेटा वैश्विक स्तर पर अमेरिकी विदेश नीति और नेतृत्व के प्रति बढ़ती संशयवादी सोच को दर्शाता है।
वैश्विक नेताओं पर भारतीयों का भरोसा
सर्वेक्षण के परिणाम विभिन्न अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के संबंध में भारतीय जनता की विविध राय को उजागर करते हैं। जहां व्लादिमीर पुतिन 51 प्रतिशत समर्थन के साथ शीर्ष स्थान पर रहे वहीं डोनाल्ड ट्रंप को 39 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। अन्य नेताओं के मामले में भी भारतीयों की राय स्पष्ट रही। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर 34 प्रतिशत भारतीयों ने भरोसा जताया जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को 33 प्रतिशत लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को 29 प्रतिशत और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 25 प्रतिशत भारतीयों ने भरोसेमंद माना। यह आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान में भारतीय जनमत अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों की तुलना में रूसी नेतृत्व के साथ अधिक जुड़ा हुआ महसूस करता है।
भारत में ट्रंप की लोकप्रियता घटने के मुख्य कारण
सर्वेक्षण पिछले वर्ष की तुलना में भारत में डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट को रेखांकित करता है। वर्ष 2025 में 51 प्रतिशत भारतीयों ने ट्रंप पर भरोसा जताया था लेकिन 2026 में यह आंकड़ा घटकर 39 प्रतिशत रह गया है जो केवल एक वर्ष में 12 प्रतिशत अंकों की गिरावट है। रिपोर्ट इस गिरावट का श्रेय कई विवादास्पद नीतियों को देती है। केवल 32 प्रतिशत भारतीयों ने ट्रंप की आव्रजन नीतियों का समर्थन किया जबकि ईरान पर उनके रुख को केवल 28 प्रतिशत लोगों ने सही माना। वेनेजुएला के प्रति उनकी नीति को और भी कम यानी 17 प्रतिशत समर्थन मिला। इसके अलावा भारतीयों ने यूएसएआईडी जैसी अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों को बंद करने के फैसले और गाजा संघर्ष तथा रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप के रुख के प्रति असंतोष व्यक्त किया है।
भारत में अमेरिका की बदलती छवि
लगभग 20 वर्षों में पहली बार भारत में संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति सकारात्मक धारणा में बड़ी गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट याद दिलाती है कि 2005 में इराक युद्ध के चरम के दौरान भी दुनिया भर में आलोचना के बावजूद भारत में अमेरिका की 71 प्रतिशत सकारात्मक रेटिंग थी। हालांकि वर्तमान सर्वेक्षण बताता है कि यह लंबे समय से चली आ रही सकारात्मक छवि अब धुंधली हो रही है। वैश्विक स्तर पर भी स्थिति ऐसी ही है जहां 36 देशों के 76 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें ट्रंप के वैश्विक नेतृत्व पर कोई भरोसा नहीं है जबकि केवल 23 प्रतिशत ने उनके अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में विश्वास व्यक्त किया। औसतन दुनिया भर में केवल 32 प्रतिशत लोग मानते हैं कि अमेरिका अपनी विदेश नीति बनाते समय दूसरे देशों के हितों का ध्यान रखता है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और क्षेत्रीय भिन्नताएं
हालांकि कई क्षेत्रों में ट्रंप की लोकप्रियता कम हुई है लेकिन इजराइल एक उल्लेखनीय अपवाद बना हुआ है। इजराइल में 81 प्रतिशत लोग अमेरिका के बारे में सकारात्मक राय रखते हैं और 66 प्रतिशत लोग ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय फैसलों पर भरोसा करते हैं। इसके विपरीत यूरोप में समर्थन का स्तर बहुत कम है। जर्मनी में केवल 16 प्रतिशत लोग ट्रंप पर भरोसा करते हैं जो पुतिन पर भरोसा करने वाले 15 प्रतिशत और नेतन्याहू पर भरोसा करने वाले 15 प्रतिशत के लगभग बराबर है। हालांकि 72 प्रतिशत जर्मनों ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों में विश्वास व्यक्त किया। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में ट्रंप के लिए समर्थन लगभग नगण्य यानी 4 प्रतिशत है जबकि नेतन्याहू के लिए यह 2 प्रतिशत है। दिलचस्प बात यह है कि इन फिलिस्तीनी क्षेत्रों में 10 में से लगभग 4 लोगों ने व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग पर भरोसा जताया। कुल मिलाकर यह सर्वेक्षण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संक्रमण काल को दर्शाता है।
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