मानसून सत्र में 7 महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का फोकस: सुप्रीम कोर्ट और MSME में बड़े बदलाव की तैयारी
केंद्र सरकार मानसून सत्र में सात विधेयक पारित करने की योजना बना रही है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में वृद्धि और MSME सुधार शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने आगामी मानसून सत्र के लिए अपना विधायी एजेंडा पूरी तरह से तैयार कर लिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस सत्र के दौरान पांच नए विधेयकों और दो लंबित विधेयकों को पारित कराना है। इस विधायी कार्ययोजना को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार रविवार को आयोजित होने वाली सर्वदलीय बैठक में इन विधेयकों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करेगी। मानसून सत्र के लिए तैयार की गई विधेयकों की संभावित सूची में फिलहाल किसी संविधान संशोधन विधेयक का उल्लेख नहीं किया गया है।
विधायी रणनीति और सर्वदलीय बैठक
सरकार मानसून सत्र के दौरान इन सभी विधेयकों को पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी रणनीति के तहत, सरकार सबसे पहले सर्वदलीय बैठक में अन्य राजनीतिक दलों के साथ इन विधेयकों पर चर्चा करेगी। यदि अन्य दलों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो इन विधेयकों को मानसून सत्र में आसानी से पारित कराया जा सकेगा। हालांकि, यदि बैठक के दौरान अन्य दल इन प्रस्तावों का विरोध करते हैं, तो सरकार अपनी विधायी रणनीति में आवश्यक बदलाव कर सकती है।
लंबित और समीक्षाधीन विधेयक
सत्र के दौरान दो प्रमुख लंबित विधेयकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पहला विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA संशोधन बिल) है। यह विधेयक 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे अब इस सत्र में विचार और पारित करने के लिए रखा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी अनुदानों की पारदर्शिता को बढ़ाना है। दूसरा विधेयक विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 है, जिसे 15 दिसंबर, 2025 को पेश किया गया था। इस विधेयक को दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया था और इस सत्र में समिति की रिपोर्ट आने के बाद संसद में इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
अध्यादेशों का स्थान लेने वाले विधेयक
सरकार दो महत्वपूर्ण अध्यादेशों को कानून का रूप देने के लिए नए विधेयक पेश करेगी। इसमें आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल है। वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं को देखते हुए, यह विधेयक भारत के सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करने, वैश्विक पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने और बाजार में तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के माध्यम से सरकार एक अध्यादेश को कानून में बदलेगी। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके।
तीन नए महत्वपूर्ण विधेयक
सरकार तीन नए विधेयक भी पेश करने जा रही है। पहला जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 है, जो वर्ष 1969 के मूल अधिनियम की धारा 13(3) में बदलाव करेगा। यह संशोधन विलंबित जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियमों को अधिक कड़ा और व्यवस्थित बनाएगा। दूसरा राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 है, जिसके माध्यम से वर्ष 1971 के अधिनियम में संशोधन कर राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों को और अधिक सख्त किया जाएगा।
MSME सुधार और आर्थिक एजेंडा
तीसरा महत्वपूर्ण नया विधेयक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इसका उद्देश्य MSME क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और भरोसा आधारित नियमों को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह विधेयक देरी से होने वाले भुगतानों के तंत्र को मजबूत करने और राज्यों को अधिक अधिकार देने के लिए पेश किया जाएगा। इसके अलावा, मानसून सत्र में सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए अतिरिक्त अनुदानों की मांगों को भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिस पर संसद में चर्चा और मतदान होगा। यह सत्र मुख्य रूप से आर्थिक सुधारों और न्यायिक व प्रशासनिक मजबूती पर केंद्रित रहेगा। माना जा रहा है कि सरकार दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने के बाद ही परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संविधान संशोधन विधेयकों पर आगे बढ़ेगी।
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