यूपी चुनाव 2027: अमित शाह ने बनाई सीटों की 4 कैटेगरी, जीत ही टिकट का आधार

अमित शाह ने यूपी 2027 चुनाव के लिए मिशन 2027 का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। जीत की गारंटी के आधार पर टिकट मिलेंगे और सीटों को 4 श्रेणियों में बांटा गया है।

Jul 16, 2026 - 22:35
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यूपी चुनाव 2027: अमित शाह ने बनाई सीटों की 4 कैटेगरी, जीत ही टिकट का आधार

उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी जंग का काउंटडाउन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है और भारतीय जनता पार्टी ने इसके लिए मिशन 2027 का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, जिन्हें उत्तर प्रदेश में पार्टी की पिछली जीत का रणनीतिकार माना जाता है, इस अभियान की कमान संभाल रहे हैं। आने वाले दिनों में अमित शाह ब्रज संभाग और बुंदेलखंड संभाग से चुनावी बिगुल फूकेंगे। उनकी रणनीति बिल्कुल साफ है कि इस बार टिकट वितरण का सबसे बड़ा पैमाना केवल जीत की गारंटी होगा। गृहमंत्री इस बार राज्य के सभी 6 रीजन का दौरा करेंगे ताकि जमीनी स्तर पर तैयारियों का जायजा लिया जा सके और आगामी चुनावों के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा सके।

चुनावी आंकड़े और 2022 का प्रदर्शन

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर चुनावी हिसाब-किताब शुरू कर दिया है। अगर 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बीजेपी ने 376 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसका मतलब है कि पार्टी को 121 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि बीजेपी गठबंधन ने कुल मिलाकर 273 सीटें जीती थीं। पार्टी का विशेष ध्यान उन 49 सीटों पर है जहां जीत और हार का अंतर 5000 वोट से भी कम था। संगठन का मानना है कि इन सीटों पर बूथ प्रबंधन और सही उम्मीदवार के चयन से परिणाम को बदला जा सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव के झटके के बावजूद बीजेपी 2027 को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है।

सीटों की 4 कैटेगरी और विशेष रणनीति

रणनीति को प्रभावी बनाने के लिए बीजेपी ने सीटों को चार अलग-अलग कैटेगरी में बांट दिया है। A कैटेगरी में वे सीटें शामिल हैं जहां बीजेपी पिछले तीन चुनावों से लगातार जीत रही है और b कैटेगरी उन सीटों के लिए है जहां पार्टी कम अंतर से जीती थी। C कैटेगरी में उन सीटों को रखा गया है जहां पार्टी पिछले दो बार से लगातार कम अंतर से हार रही है। सबसे कठिन सीटों के लिए D कैटेगरी बनाई गई है, जो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ माने जाते हैं। हर कैटेगरी के लिए अलग रणनीति, अलग संगठन और अलग चुनावी चेहरा तय किया जाएगा ताकि विपक्षी किलों को भेदा जा सके।

61 अजेय सीटों पर विशेष फोकस

मिशन 2027 के तहत उन 61 सीटों पर खास फोकस किया जा रहा है जहां बीजेपी पिछले तीन विधानसभा चुनावों यानी 2012, 2017 और 2022 में एक बार भी जीत हासिल नहीं कर सकी है। इन सीटों पर बूथ फीडबैक, जातीय समीकरण और लाभार्थियों से संपर्क के लिए नए सिरे से सर्वे कराया जा रहा है। संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के लिए कड़े मापदंड अपनाए जा रहे हैं। अमित शाह खुद इन आंकड़ों की निगरानी कर रहे हैं ताकि इन मुश्किल सीटों पर भी कमल खिलाया जा सके और पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि शाह की चाणक्य नीति से तीसरी बार भी बड़ी जीत हासिल होगी।

दिग्गज नेताओं की स्क्रीनिंग और टिकट का फॉर्मूला

टिकट वितरण को लेकर बीजेपी के भीतर बड़ा मंथन शुरू हो गया है और सूत्रों के अनुसार, उन नेताओं का पूरा चुनावी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है जो तीन या उससे ज्यादा बार चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें यह देखा जा रहा है कि पिछली बार वे कितने वोट से हारे, उनके अपने बूथ पर प्रदर्शन कैसा रहा और संगठन में उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ पुराना चेहरा होना अब टिकट की गारंटी नहीं है। अगर किसी नेता की जीत की संभावना कमजोर पाई जाती है, तो उसका टिकट काटा जा सकता है और नए चेहरे को मौका दिया जा सकता है।

राम मंदिर विवाद और विपक्ष की घेराबंदी

बीजेपी के सामने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का विवाद एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इस मामले में जांच और गिरफ्तारियां हुई हैं और ट्रस्ट में बड़े संगठनात्मक बदलाव किए गए हैं, जिसमें CEO का पद बनाना भी शामिल है। चूंकि राम मंदिर बीजेपी की वैचारिक पहचान का केंद्र है, इसलिए यह विवाद राजनीतिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर पार्टी के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव रथ यात्रा के जरिए जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं और PDA रणनीति के साथ बीजेपी को घेर रहे हैं। समाजवादी पार्टी इस चढ़ावा चोरी के मुद्दे को योगी सरकार के खिलाफ प्रचारित करने की योजना बना रही है, जबकि कांग्रेस ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

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