मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी: चाइल्ड पोर्न और डीपफेक पर दी थी चेतावनी

मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक कंटेंट को लेकर भारत सरकार से माफी मांगी है। संसदीय समिति ने 3 दिन का अल्टीमेटम दिया था।

Aug 5, 2026 - 19:35
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मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी: चाइल्ड पोर्न और डीपफेक पर दी थी चेतावनी

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई विभिन्न गलतियों को लेकर भारत सरकार से आधिकारिक तौर पर माफी मांगी है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। यह माफीनामा ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार ने मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर संवेदनशील कंटेंट के प्रबंधन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी।

संसदीय समिति का तीन दिन का अल्टीमेटम

हाल ही में संसदीय समिति ने मेटा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सीईओ मार्क जुकरबर्ग को 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर माफी नहीं मांगी गई, तो भारत के आईटी कानूनों के तहत मेटा को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और छूट को वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। इस सुरक्षा के हटने का अर्थ यह होगा कि मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर मौजूद किसी भी तीसरे पक्ष के कंटेंट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा। इस अल्टीमेटम के बाद, मेटा ने कानूनी सुरक्षा खोने के जोखिम को कम करने के लिए माफी मांगी है।

पीएम मोदी के वीडियो को लेकर विवाद

विवाद का एक मुख्य कारण 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पोस्ट किया गया एक वीडियो था। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक को एक बड़ी समस्या बताया था और ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी। हालांकि, मेटा ने इस वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। बाद में कंपनी ने पोस्ट को बहाल कर दिया और इसे एक तकनीकी गड़बड़ी बताया, लेकिन आईटी मंत्रालय ने इस सफाई को संतोषजनक नहीं माना। सरकार ने इसे वीआईपी अकाउंट्स की सुरक्षा में एक बड़ी चूक के रूप में देखा है।

आईटी मंत्रालय ने मेटा अधिकारियों को किया तलब

इन लगातार हो रही गलतियों के जवाब में, आईटी मंत्रालय ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है, जहां 5 और 6 अगस्त को दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक चल रही है। आईटी सचिव एस कृष्णन ने बताया कि मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि मेटा भारतीय कानूनों का कितना पालन कर रही है। बैठक में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि वीआईपी अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए बनाए गए 'सेफगार्ड्स' क्यों फेल हुए और इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM) की मौजूदगी को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, व्हाट्सएप की नई यूजरनेम पॉलिसी पर भी सवाल पूछे जा रहे हैं।

मेटा इंडिया हेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर

यह मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है और हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर बनाए गए मॉर्फ्ड और एआई-जनरेटेड पोस्ट के मामले में मेटा इंडिया के हेड अरुण श्रीनिवास और कुछ फेसबुक व इंस्टाग्राम अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सरकार का कहना है कि मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनी के सिस्टम इतने मजबूत होने चाहिए कि ऐसी गलतियां दोबारा न हों और उन्हें भारतीय कानूनों का पूरी तरह से पालन करना होगा।

करोड़ों भारतीय यूजर्स पर प्रभाव

भारत मेटा के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए इन चर्चाओं का परिणाम करोड़ों नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। मेटा के किसी भी फैसले का सीधा असर इन करोड़ों भारतीयों पर पड़ता है। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया कंपनियों के कंटेंट हटाने के नियमों पर निगरानी बढ़ सकती है और गलत तरीके से पोस्ट हटाने पर कंपनियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

बैठक के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे

5 और 6 अगस्त की इस बैठक में केवल पीएम मोदी की पोस्ट का मुद्दा ही नहीं है। आईटी मंत्रालय मेटा से उन पुराने नोटिसों का भी ब्योरा मांग रहा है जो इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट और व्हाट्सएप की यूजरनेम पॉलिसी को लेकर जारी किए गए थे। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मेटा के पास भारतीय कानूनों को लागू करने के लिए एक ठोस व्यवस्था हो ताकि भविष्य में ऐसी तकनीकी या नीतिगत त्रुटियां न हों।

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