मुकेश अंबानी की घोषणा: भारत में AI के लिए ₹10 लाख करोड़ निवेश

मुकेश अंबानी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ₹10 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की। जानें भारत को एआई सुपरपावर बनाने का पूरा प्लान।

Feb 19, 2026 - 14:35
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मुकेश अंबानी की घोषणा: भारत में AI के लिए ₹10 लाख करोड़ निवेश

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। अंबानी ने घोषणा की कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो इंटेलिजेंस मिलकर अगले सात वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का निवेश करेंगे। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य भारत को 21वीं सदी की सबसे बड़ी एआई ताकतों में शामिल करना और तकनीक को आम नागरिक तक पहुंचाना है।

मुकेश अंबानी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जिस प्रकार रिलायंस जियो ने देश में डेटा क्रांति लाकर इंटरनेट को सुलभ बनाया था, उसी प्रकार अब 'इंटेलिजेंस युग' की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी एआई क्षमताओं के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत इंटेलिजेंस को किराए पर नहीं ले सकता, बल्कि इसे देश के भीतर ही विकसित और लोकतांत्रिक बनाना होगा।

₹10 लाख करोड़ का निवेश और रणनीतिक विजन

मुकेश अंबानी द्वारा घोषित ₹10 लाख करोड़ का निवेश अगले सात वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस भारी-भरकम निवेश का एक बड़ा हिस्सा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षमताओं को बढ़ाने में खर्च होगा। अंबानी के अनुसार, रिलायंस का लक्ष्य एआई सेवाओं की लागत को डेटा की तरह ही किफायती बनाना है ताकि यह केवल बड़े कॉर्पोरेट घरानों तक सीमित न रहकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और आम जनता के लिए भी उपलब्ध हो सके।

गीगावॉट-स्केल डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी का एकीकरण

एआई की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रिलायंस जामनगर में मल्टी-गीगावॉट क्षमता वाले एआई-रेडी डेटा सेंटर स्थापित कर रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वर्ष की दूसरी छमाही तक 120 मेगावॉट की क्षमता ऑनलाइन आ जाएगी, जिसे भविष्य में गीगावॉट स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। इन डेटा सेंटर्स को ऊर्जा प्रदान करने के लिए कच्छ और आंध्र प्रदेश में सौर ऊर्जा आधारित 10 गीगावॉट तक की ग्रीन पावर क्षमता का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एक नेशनल एज कंप्यूट नेटवर्क भी तैयार किया जाएगा, जो देशभर में कम लेटेंसी और कम लागत पर एआई सेवाएं सुनिश्चित करेगा।

स्थानीय भाषाओं और संस्कृति में एआई का विकास

अंबानी ने एआई के भाषाई और सांस्कृतिक पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि एआई को भारत की विविध भाषाओं और संस्कृति के अनुरूप ढालना अनिवार्य है। जियो का लक्ष्य ऐसे एआई मॉडल विकसित करना है जो स्थानीय भाषाओं में संवाद कर सकें। अंबानी ने विश्वास व्यक्त किया कि एआई 'भारत की मिट्टी में फलेगा' और देश के किसानों, छात्रों और छोटे व्यवसायियों के लिए उनकी अपनी भाषा में मददगार साबित होगा और यह पहल डिजिटल विभाजन को कम करने और तकनीक को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में एआई का अनुप्रयोग

रिलायंस इंडस्ट्रीज विभिन्न सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में एआई के व्यावहारिक उपयोग पर काम कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में, कई भाषाओं में पढ़ाने वाले एआई शिक्षकों को विकसित किया जा रहा है जो छात्रों को व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव प्रदान करेंगे। स्वास्थ्य सेवा में, स्थानीय भाषाओं में चिकित्सा सलाह देने वाले एआई गाइड तैयार किए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र के लिए, सैटेलाइट डेटा और एआई के संयोजन से किसानों को फसल प्रबंधन और मौसम संबंधी सटीक सुझाव देने वाला सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य बुनियादी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उन्हें अधिक सुलभ बनाना है।

भारत की डिजिटल शक्ति और भविष्य की संभावनाएं

मुकेश अंबानी ने भारत की विशाल जनसंख्या, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कम डेटा लागत को एआई सुपरपावर बनने के लिए सबसे बड़ी ताकत बताया और उन्होंने उल्लेख किया कि आधार, यूपीआई (UPI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने एक ऐसी नींव तैयार की है जिस पर एआई की भव्य इमारत खड़ी की जा सकती है। अंबानी के अनुसार, यदि एआई को लोकतांत्रिक और किफायती बनाया जाता है, तो यह देश में गरीबी उन्मूलन और आर्थिक समृद्धि बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

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