मोदी-ट्रंप की 490 दिन बाद मुलाकात: ट्रेड डील, H-1B वीजा और रक्षा सहयोग पर होगी बड़ी बात

फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप 490 दिनों के बाद द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें व्यापार और रक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

Jun 17, 2026 - 17:35
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मोदी-ट्रंप की 490 दिन बाद मुलाकात: ट्रेड डील, H-1B वीजा और रक्षा सहयोग पर होगी बड़ी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में आयोजित हो रहे G-7 शिखर सम्मेलन में एक विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं। इस वैश्विक मंच पर दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान परमाणु समझौता और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं। G-7 के सदस्य देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं। सम्मेलन के पहले दिन जारी किए गए संयुक्त बयान में इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय रणनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों से निपटने की भविष्य की योजनाओं पर जोर दिया गया है।

490 दिनों के बाद मोदी-ट्रंप की ऐतिहासिक मुलाकात

इस शिखर सम्मेलन का सबसे चर्चित हिस्सा प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक है। लगभग 16 महीनों या 490 दिनों के लंबे अंतराल के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी। इस बैठक के एजेंडे में व्यापार, ऊर्जा सहयोग, वीजा नीतियां और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। कूटनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को लेकर काफी उत्साह है क्योंकि इसके नतीजे दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेंगे।

व्यापार, टैरिफ और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा

बैठक के मुख्य बिंदुओं में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता शामिल है जिसे अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। अगले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के भारत दौरे से पहले, टैरिफ से जुड़े विवादों को सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ऊर्जा सहयोग के मामले में, अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल के आयात में कमी करे। हालांकि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन रूस का कच्चा तेल भारत के लिए आर्थिक रूप से सस्ता और फायदेमंद साबित हो रहा है। इस संतुलन को बनाए रखना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है।

H-1B वीजा नियमों को लेकर भी भारत अपनी चिंताओं को मजबूती से रखेगा। भारत की मांग है कि वीजा प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और नियमों में ढील दी जाए ताकि भारतीय पेशेवरों को आसानी हो सके। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत इन नियमों को सख्त करता रहा है। उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को देखते हुए इस मुद्दे पर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा।

रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा का एजेंडा

रक्षा क्षेत्र में दोनों देश संयुक्त उत्पादन और तकनीक के हस्तांतरण पर बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने के सौदे और संयुक्त निर्माण के लिए एक नया ढांचा तैयार करने पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और अमेरिका-ईरान संबंधों के प्रभाव पर भी बात होगी। प्रधानमंत्री मोदी इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। समुद्री सुरक्षा के लिहाज से होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर चर्चा होगी, जहां प्रधानमंत्री उन भारतीय नाविकों का मुद्दा उठा सकते हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में अपनी जान गंवाई है।

सकारात्मक माहौल और भारत का कूटनीतिक रुख

औपचारिक बैठक से पहले दोनों नेताओं के बीच हुई एक संक्षिप्त मुलाकात ने माहौल को सकारात्मक बना दिया है। ग्रुप फोटो के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सीट से उठकर जिस गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया, वह दोनों के बीच के व्यक्तिगत तालमेल को दर्शाता है। भारत इस सम्मेलन के जरिए न केवल अमेरिका के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक मजबूत आवाज के रूप में भी उभर रहा है।

G-7 का मुख्य एजेंडा भारत की प्राथमिकताओं से मेल खाता है, जिसमें यूक्रेन और यूरोप में शांति की स्थापना, टिकाऊ आर्थिक विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी चुनौतियों का समाधान शामिल है। मोदी-ट्रंप की इस मुलाकात को इस साल की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों में से एक माना जा रहा है, जिसके परिणाम वैश्विक आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा प्रभाव डालेंगे।

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