यूपीआई के 10 साल पूरे: डिजिटल पेमेंट में भारत ने ऐसे कायम की दुनिया में बादशाहत

यूपीआई ने भारत में वित्तीय क्रांति के 10 साल पूरे किए, ट्रांजेक्शन में 13000 गुना की वृद्धि और 11 देशों में वैश्विक विस्तार हासिल किया।

Aug 25, 2026 - 17:35
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यूपीआई के 10 साल पूरे: डिजिटल पेमेंट में भारत ने ऐसे कायम की दुनिया में बादशाहत

भारत में डिजिटल लेन-देन की पूरी तस्वीर को बदलने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने अपनी शानदार यात्रा के 10 साल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस एक दशक के दौरान यूपीआई के ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में करीब 13000 गुना की ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह भारत के वित्तीय इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है और यूपीआई का सफर महज 44 बैंकों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन आज इस नेटवर्क का हिस्सा 703 बैंक बन चुके हैं। जुलाई 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब इस सिस्टम से जुड़ने वाले बैंकों की संख्या बढ़कर 741 हो गई है। वर्तमान में हर रोज 66 करोड़ से ज्यादा लेन-देन यूपीआई के जरिए पूरी सफलता के साथ किए जा रहे हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को दर्शाता है।

एक बड़ी वित्तीय क्रांति की शुरुआत

25 अगस्त 2016 का दिन भारत के वित्तीय इतिहास में एक बहुत बड़ी क्रांति की शुरुआत के रूप में दर्ज है। इसी दिन यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया था। आज जब यूपीआई ने अपनी कामयाबी के 10 साल पूरे कर लिए हैं, तो वह दौर याद आता है जब लोग कैश के बिना घर से निकलने में घबराते थे। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। छोटी से छोटी दुकान से लेकर बड़े-बड़े मॉल्स तक, हर जगह यूपीआई क्यूआर कोड नजर आता है और साल 2016 में जब इसकी टेस्टिंग शुरू हुई थी, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि यह तकनीक इतनी जल्दी लोगों की रोजमर्रा की आदत बन जाएगी। टेस्टिंग के कुछ ही महीनों बाद भीम ऐप लॉन्च हुआ और इसके बाद यूपीआई ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल दर साल इसमें नए और आधुनिक फीचर्स जुड़ते चले गए।

तकनीकी विकास और नए फीचर्स

यूपीआई की सफलता के पीछे निरंतर होने वाले तकनीकी सुधारों का बड़ा हाथ है। साल 2017 में डायनामिक क्यूआर कोड की शुरुआत हुई जिसने भुगतान को और आसान बना दिया। साल 2018 में यूपीआई 2 के जरिए इसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाया गया। इसके बाद ऑटोपे, क्रेडिट लाइन और यूपीआई सर्कल जैसे बेहतरीन फीचर्स जोड़े गए। टैक्स पेमेंट की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए इसकी लिमिट बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई। साल 2025 तक आते-आते स्मार्टफोन पर फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक से सीधे पेमेंट करने की सुविधा भी शुरू हो गई। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में यूपीआई ने डिजिटल लेन-देन के मामले में 13000 गुना की लंबी छलांग लगाई है।

लेन-देन में दर्ज किया गया रिकॉर्ड उछाल

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपीआई की प्रगति हैरान करने वाली है और वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई का ट्रांजेक्शन वॉल्यूम महज 2 करोड़ था। अब 2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर 24162 करोड़ के पार पहुंच गया है। इसी तरह अगर ट्रांजेक्शन वैल्यू की बात करें तो यह 7 हजार करोड़ रुपये से उछलकर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निगरानी में इस बेहतरीन सिस्टम को तैयार किया था। इसकी शानदार तकनीक ने इसे दुनिया भर में रियल-टाइम पेमेंट्स का एक बड़ा बेंचमार्क बना दिया है। शुरुआत में इससे सिर्फ 44 बैंक जुड़े थे, लेकिन जुलाई 2026 तक यह संख्या 741 बैंकों तक पहुंच गई है।

साल 2026 में बने नए कीर्तिमान

यूपीआई के लिए साल 2026 उपलब्धियों से भरा रहा है। मई 2026 में पहली बार मासिक ट्रांजेक्शन वॉल्यूम 2300 करोड़ के पार चला गया। इस महीने में कुल 2320 करोड़ लेन-देन दर्ज किए गए। इसके बाद जुलाई 2026 में यह आंकड़ा और बढ़कर 2366 करोड़ ट्रांजेक्शन तक पहुंच गया। यह यूपीआई के 10 साल के सफर में अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है। आज हर रोज औसतन 66 करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन सफलतापूर्वक पूरे किए जा रहे हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं।

बिना इंटरनेट के डिजिटल पेमेंट की सुविधा

डिजिटल डिवाइड को खत्म करने के लिए यूपीआई ने विशेष प्रयास किए हैं। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, उनके लिए यूपीआई 123पे लॉन्च किया गया था। इससे फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले लोग बिना इंटरनेट के भी आईवीआर या मिस्ड कॉल के जरिए पैसे भेज सकते हैं। हाल ही में इसकी लिमिट बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दी गई है। छोटे पेमेंट्स को तेजी से करने के लिए यूपीआई लाइट वॉलेट की सुविधा भी दी गई है, जिसकी लिमिट अब बढ़ाकर 5 हजार रुपये कर दी गई है। इन सुविधाओं ने दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी डिजिटल इकॉनमी का हिस्सा बना दिया है।

दुनिया के 11 देशों में यूपीआई का डंका

यूपीआई की सफलता की गूंज अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी सरजमीं पर भी इसका जलवा कायम है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इसे ट्रांजेक्शन वॉल्यूम के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। साल 2025 तक ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी रही है। जून 2026 में ग्रीस और कंबोडिया भी इस लिस्ट में शामिल हो गए। वहीं 30 जुलाई 2026 को मालदीव के सिस्टम के साथ इसे जोड़कर क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में यूएई, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव जैसे 11 देशों में यूपीआई सफलतापूर्वक काम कर रहा है।

अगले दशक के लिए भविष्य की योजनाएं

सरकार का मुख्य फोकस अब यूपीआई को और भी ज्यादा सुलभ और समावेशी बनाने पर है और यूपीआई ने भारत में डिजिटल खाई को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब लक्ष्य छोटे कारोबारियों से लेकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हर व्यक्ति को डिजिटल इकॉनमी से जोड़ना है। अगले दशक में यूपीआई इकोसिस्टम में नए यूजर्स को जोड़ने के साथ-साथ तकनीकी विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा और इससे भारत डिजिटल पेमेंट्स के मामले में दुनिया का निर्विवाद रूप से सबसे बड़ा लीडर बना रहेगा और वैश्विक स्तर पर अपनी बादशाहत कायम रखेगा।

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