यूपीआई के 10 साल पूरे: डिजिटल पेमेंट में भारत ने कायम की वैश्विक बादशाहत
यूपीआई ने 10 साल में 13,000 गुना की वृद्धि की है। 703 बैंकों और 11 देशों में फैले इस नेटवर्क से अब रोजाना 66 करोड़ लेनदेन हो रहे हैं।
भारत में डिजिटल लेनदेन की पूरी तस्वीर बदलने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने अपनी शानदार यात्रा के 10 साल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस एक दशक के दौरान इसके ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में करीब 13,000 गुना की ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो भारत के वित्तीय इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह वृद्धि देश भर में डिजिटल भुगतान के तरीकों को तेजी से अपनाने को दर्शाती है, जिससे भारत एक नकद-निर्भर समाज से डिजिटल-प्रथम अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ गया है।
वित्तीय क्रांति की शुरुआत और शानदार सफर
25 अगस्त 2016 का दिन भारत के आर्थिक और वित्तीय इतिहास में एक बड़ी क्रांति की शुरुआत के रूप में दर्ज है। इसी ऐतिहासिक दिन पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को लॉन्च किया गया था। आज यूपीआई ने अपनी कामयाबी के 10 साल पूरे कर लिए हैं। एक समय था जब लोग जेब में कैश रखे बिना घर से निकलने में घबराते थे और असुरक्षित महसूस करते थे, लेकिन आज देश की छोटी से छोटी दुकान से लेकर बड़े-बड़े मॉल्स तक हर जगह यूपीआई क्यूआर कोड नजर आता है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में यूपीआई ने डिजिटल लेनदेन के मामले में 13,000 गुना की लंबी छलांग लगाई है। यह सिस्टम अब हर हिंदुस्तानी की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अनिवार्य और अहम हिस्सा बन चुका है।
लेनदेन के आंकड़ों में आया रिकॉर्ड उछाल
यूपीआई की विकास यात्रा को पिछले कुछ वर्षों में दर्ज किए गए चौंकाने वाले आंकड़ों से समझा जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई का ट्रांजेक्शन वॉल्यूम महज 1 करोड़ 78 लाख था। अब वित्त वर्ष 2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर 24162 करोड़ के पार पहुंच गया है। इसी तरह अगर ट्रांजेक्शन वैल्यू यानी लेनदेन के मूल्य की बात करें तो यह 0 रुपये 7 पैसे लाख करोड़ रुपये से उछलकर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निगरानी में इस सिस्टम को तैयार किया था। इसकी शानदार और सुरक्षित तकनीक ने इसे दुनिया भर में रियल-टाइम पेमेंट्स का एक बड़ा बेंचमार्क बना दिया है और शुरुआत में इस नेटवर्क से सिर्फ 44 बैंक जुड़े थे, लेकिन आज इनकी संख्या बढ़कर 703 हो गई है।
साल 2026 में बने नए कीर्तिमान
यूपीआई के लिए साल 2026 काफी खास रहा है और इस दौरान कई नए रिकॉर्ड बने हैं। मई 2026 में पहली बार मासिक ट्रांजेक्शन वॉल्यूम 2300 करोड़ के पार चला गया। इस महीने में कुल 2320 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। इसके बाद जुलाई 2026 में यह आंकड़ा और ऊपर गया और 2366 करोड़ ट्रांजेक्शन तक पहुंच गया। यह यूपीआई के 10 साल के सफर में अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है। आज के समय में हर रोज औसतन 66 करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन सफलतापूर्वक पूरे किए जा रहे हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को दर्शाता है।
ग्लोबल मंच पर भी साबित की अपनी ताकत
यूपीआई का जलवा सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी सरजमीं पर भी इसका डंका बज रहा है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने ट्रांजेक्शन वॉल्यूम के लिहाज से इसे दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। साल 2025 तक ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी रही है। इस समय यूपीआई दुनिया के 11 देशों में सफलतापूर्वक काम कर रहा है, जिनमें यूएई, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव शामिल हैं।
अगले दशक की तैयारी और भविष्य का लक्ष्य
सरकार का मुख्य फोकस अब यूपीआई को और भी ज्यादा सुलभ और समावेशी बनाने पर है और यूपीआई ने भारत में डिजिटल डिवाइड यानी डिजिटल अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब लक्ष्य छोटे कारोबारियों से लेकर देश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को डिजिटल इकॉनमी से पूरी तरह जोड़ने का है। अगले दशक में यूपीआई इकोसिस्टम में नए यूजर्स को जोड़ने के साथ-साथ तकनीकी विकास और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारत डिजिटल पेमेंट्स के मामले में दुनिया का निर्विवाद रूप से सबसे बड़ा लीडर बना रहे।
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