फर्जी ITC मामला: ईडी ने गाजियाबाद समेत 3 शहरों के 9 ठिकानों पर की छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय ने गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और फरीदाबाद में फर्जी ITC मामले में 9 ठिकानों पर छापेमारी की। मेसर्स जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप है।

Aug 24, 2026 - 11:35
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फर्जी ITC मामला: ईडी ने गाजियाबाद समेत 3 शहरों के 9 ठिकानों पर की छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 24 अगस्त 2026 को धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग के विरुद्ध एक बड़ी और व्यापक कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी की टीमों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के साथ-साथ हरियाणा के फरीदाबाद में कुल 9 ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त करने और उसे अन्य कंपनियों को हस्तांतरित करने के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करना था।

मेसर्स जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड की भूमिका

) नामक कंपनी है। जांच के दौरान यह गंभीर आरोप सामने आए हैं कि इस कंपनी ने वास्तव में माल की किसी भी प्रकार की आवाजाही किए बिना ही फर्जी बिल और ई-वे बिल तैयार किए थे। इन फर्जी दस्तावेजों का उपयोग केवल कागजों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने और उसे दूसरी संस्थाओं को ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। ईडी की यह कार्रवाई जीएसटी अधिकारियों द्वारा कथित धोखाधड़ी वाले आईटीसी लेनदेन के बारे में मिली जानकारी के आधार पर की गई है।

सर्कुलर ट्रांजैक्शन और फंड की लेयरिंग का खेल

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि इस पूरे नेटवर्क में कई ऐसी कंपनियां शामिल थीं जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं था। इन फर्जी और अस्तित्वहीन कंपनियों के माध्यम से सर्कुलर ट्रांजैक्शन किए गए, जिसका अर्थ है कि पैसा एक कंपनी से दूसरी कंपनी में केवल कागजों पर घूमता रहा और जांच में यह भी पाया गया कि अवैध रूप से अर्जित की गई रकम को बहुत तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया ताकि उसकी लेयरिंग की जा सके। लेयरिंग की इस प्रक्रिया का उद्देश्य पैसे के वास्तविक स्रोत को छिपाना होता है। इसके बाद, विभिन्न स्थानों से भारी मात्रा में नकद निकासी भी की गई।

सरकारी राजस्व को पहुंचाई गई भारी क्षति

जीएसटी (GST) अधिकारियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क ने 9 करोड़ 63 लाख रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित लाभ उठाया है। इसके अतिरिक्त, जांच में यह भी पाया गया कि 10 करोड़ 28 लाख रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट को अन्य व्यावसायिक इकाइयों तक पहुंचाया गया। इस पूरी प्रक्रिया से सरकारी खजाने को गलत तरीके से भारी नुकसान पहुंचाया गया है। कानून के अनुसार, इस प्रकार अर्जित की गई राशि को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 'अपराध से अर्जित आय' यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम माना गया है।

ईडी की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य और भविष्य की जांच

ईडी द्वारा की गई इस तलाशी का मुख्य लक्ष्य अपराध से अर्जित उस रकम का पता लगाना है जिसे सिस्टम में घुमाया गया था। इसके साथ ही, एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने इस फर्जीवाड़े से लाभ कमाया है। छापेमारी के दौरान ईडी ने फर्जी आईटीसी नेटवर्क से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन तलाशी अभियानों से यह समझने में मदद मिलेगी कि फंड को अलग-अलग संस्थाओं के माध्यम से कैसे घुमाया गया और बाद में उसे कैसे निकाला या ट्रांसफर किया गया और इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की आगे की जांच अभी जारी है।

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