राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने MLC अक्षय प्रताप सिंह पर दर्ज कराई FIR, जालसाजी का आरोप

राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह पर फर्जी दस्तावेज और संपत्ति हड़पने के आरोप में लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराई है।

May 15, 2026 - 08:35
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राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने MLC अक्षय प्रताप सिंह पर दर्ज कराई FIR, जालसाजी का आरोप

उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शुमार प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के परिवार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह और उनके कई साथियों के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में एक महत्वपूर्ण प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है और यह कानूनी कार्रवाई लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद अमल में लाई गई है। भानवी सिंह ने अक्षय प्रताप सिंह पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें मुख्य रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनकी साझेदारी वाली फर्म तथा व्यक्तिगत संपत्तियों को अवैध रूप से हड़पने की कोशिश का मामला शामिल है।

जालसाजी और दस्तावेजों में हेराफेरी के गंभीर आरोप

भानवी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई इस शिकायत में अमेठी से एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। भानवी सिंह का आरोप है कि अक्षय प्रताप सिंह ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके साथ धोखाधड़ी की है और आरोपों के अनुसार, अक्षय प्रताप सिंह ने अपने कुछ करीबियों के साथ मिलकर भानवी सिंह की फर्म के जाली दस्तावेज तैयार किए। इन सहयोगियों में रोहित सिंह, अनिल सिंह, रामदेव यादव और दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। भानवी सिंह का कहना है कि इन लोगों ने न केवल दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही फर्म का आधिकारिक पता भी बदल दिया।

साझेदारी फर्म पर अवैध कब्जे की साजिश

शिकायत में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि यह पूरा विवाद एक साझेदारी फर्म और उससे जुड़ी संपत्तियों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। भानवी सिंह का दावा है कि नवंबर 2020 में आरोपियों ने बड़ी जालसाजी को अंजाम दिया। अक्षय प्रताप सिंह ने कथित तौर पर खुद को इस फर्म का साझेदार प्रदर्शित कर दिया, जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। भानवी सिंह के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी शपथ पत्र तैयार किए, जाली दस्तावेजों का सहारा लिया और उनके फर्जी हस्ताक्षर (सिग्नेचर) बनाकर फर्म की कीमती संपत्तियों पर कब्जा करने की एक विस्तृत साजिश रची। इस धोखाधड़ी का उद्देश्य भानवी सिंह को उनकी अपनी ही फर्म और संपत्तियों से बेदखल करना था।

एमपी एमएलए कोर्ट का हस्तक्षेप और पुलिस की कार्रवाई

इस मामले में कानूनी मोड़ तब आया जब भानवी सिंह ने न्याय के लिए लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत में एक अर्जी दाखिल कर अक्षय प्रताप सिंह और उनके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए विशेष एसीजेएम (ACJM) कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा और हजरतगंज पुलिस को अक्षय प्रताप सिंह, रोहित कुमार सिंह, अनिल सिंह, रामदेव यादव और अन्य के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पुलिस को इस पूरे प्रकरण की गहन विवेचना (जांच) करने के भी निर्देश दिए हैं।

कोर्ट के आदेश के अनुपालन में हजरतगंज पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। हजरतगंज थाने के एसएचओ (SHO) विक्रम सिंह ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट के निर्देशानुसार प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और अब पुलिस की टीम इस पूरे मामले की विस्तृत विवेचना कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस सभी उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी और जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले ने राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

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