Yamuna Water MoA : हरियाणा से राजस्थान आएंगी 3 बड़ी पाइपलाइनें, शेखावाटी के प्यासे कंठों को मिलेगा पानी

राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल को लेकर ऐतिहासिक MoA साइन हुआ। शेखावाटी को 3 बड़ी पाइपलाइनों से मिलेगा 577 MCM पानी।

Jun 30, 2026 - 08:35
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Yamuna Water MoA : हरियाणा से राजस्थान आएंगी 3 बड़ी पाइपलाइनें, शेखावाटी के प्यासे कंठों को मिलेगा पानी

राजस्थान के इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। दिल्ली में हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल के बंटवारे को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से यमुना के पानी को राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना है। इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए तीन बड़ी पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी, जो चूरू, सीकर और झुंझुनूं जैसे जिलों की वर्षों पुरानी प्यास बुझाने का काम करेंगी। इस समझौते के बाद राजस्थान की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उनके पुराने वादे की याद दिलाई है।

परियोजना की तकनीकी बारीकियां और बुनियादी ढांचा

यमुना जल परियोजना केवल पानी लाने का एक जरिया नहीं है, बल्कि यह आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण साबित होगी और 6 मीटर व्यास वाली तीन विशाल भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी। इन पाइपलाइनों के माध्यम से राजस्थान के हिस्से का 577 मिलियन क्यूबिक मीटर यानी 577 एमसीएम पानी शेखावाटी के इलाकों में लाया जाएगा। इस परियोजना में केवल पाइपलाइन ही शामिल नहीं है, बल्कि उनके साथ निरीक्षण सड़कें, कृत्रिम जलाशय और एक अत्याधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली भी विकसित की जाएगी ताकि पानी का वितरण पारदर्शी और कुशल हो सके। यह परियोजना केवल राजस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि हरियाणा के लिए भी अत्यंत लाभकारी है क्योंकि इसमें हरियाणा के 10 स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने का विशेष प्रावधान रखा गया है, जिससे दोनों राज्यों के बीच सहयोग बढ़ेगा।

राजेंद्र राठौड़ का हमला और आधुनिक राजस्थान का भगीरथ

भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए उन्हें "आधुनिक राजस्थान का भगीरथ" की उपाधि दी है। राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उस यमुना जल परियोजना को साकार करने का साहस दिखाया है जो दशकों से फाइलों में दबी हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार के साथ लगातार संपर्क में है। राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि गहलोत ने पहले कहा था कि जिस दिन यमुना का पानी राजस्थान आएगा, वे मुख्यमंत्री का सम्मान करेंगे। अब जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा MoA साइन करने के बाद कल जयपुर लौट रहे हैं, तो गहलोत को अपने वादे के मुताबिक जयपुर एयरपोर्ट पहुंचकर उनका भव्य अभिनंदन करना चाहिए।

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शेखावाटी के लिए वरदान और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शेखावाटी क्षेत्र, जिसमें सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे जिले शामिल हैं, लंबे समय से गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। ये जिले मुख्य रूप से भूजल पर निर्भर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए संकट पैदा हो गया है। यमुना का पानी मिलने से न केवल लोगों को पीने के लिए स्वच्छ और स्थायी जल मिलेगा, बल्कि किसानों को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा, जिससे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि यमुना के पानी को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच सबसे पहले 1994 में समझौता हुआ था। उस समय राजस्थान को पानी का हिस्सा तो आवंटित किया गया था, लेकिन तकनीकी बाधाओं और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह पानी कभी राजस्थान की सीमा तक नहीं पहुंच सका। अब इस नए MoA से लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जगी है।

कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग

इस समझौते के बाद राजस्थान में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को MoA और MoU के बीच का बुनियादी अंतर भी पता नहीं है और वे बिना तथ्यों के जनता को भ्रमित कर रहे हैं और दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे कागजी समझौतों के बजाय धरातल पर होने वाले काम को अधिक महत्व देते हैं। गहलोत ने स्पष्ट किया कि जिस दिन यमुना का पानी वास्तव में शेखावाटी के लोगों के घरों तक पहुंच जाएगा, वे स्वयं मुख्यमंत्री आवास जाकर भजनलाल शर्मा को माला पहनाएंगे और उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उनकी सरकार के दौरान उन्होंने 2003 और 2012 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर राजस्थान के हक का पानी दिलाने के लिए गंभीर प्रयास किए थे।

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