राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नामांकन रद्द मामले में याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा नामांकन रद्द करने के खिलाफ याचिका खारिज की। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार किया।

Jun 12, 2026 - 16:35
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राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नामांकन रद्द मामले में याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को एक बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। राज्यसभा चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था, जिसे कांग्रेस नेता ने सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी। आज इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती क्योंकि यह याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां और नियम

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि फॉर्म 26 के नियमों के तहत आपराधिक मुकदमों की जानकारी देना पूरी तरह से अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 26 के तहत उम्मीदवार को हलफनामे के जरिए विभिन्न जानकारियां देनी होती हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ उन्हीं मामलों का खुलासा करना आवश्यक हो जिनमें संज्ञान लिया गया हो या फिर आरोप पत्र यानी चार्जशीट दायर की गई हो। अदालत ने नियमों की व्याख्या करते हुए उम्मीदवार की जवाबदेही पर जोर दिया।

पुन्नू स्वामी मामले का हवाला और कानूनी मिसाल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पुन्नू स्वामी मामले का जिक्र किया और कहा कि इस मामले में कोर्ट ने पहले ही एक मिसाल तय की थी। अदालत ने कहा कि नामांकन रद्द किए जाने के मामले में वह हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। पूर्व के फैसलों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाने पर अदालत उसमें दखल नहीं दे सकती और चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति में रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती और किसी भी प्रकार के उपचार या राहत की मांग केवल इलेक्शन याचिका (चुनाव याचिका) के जरिए ही की जा सकती है। इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन रद्द करने के रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सही माना है।

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें

मीनाक्षी नटराजन का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में कड़े तर्क दिए और उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को बहुत अजीब बताया। सिंघवी ने कहा कि अगर मामले का संज्ञान लिया गया है, तो उन्हें यह दिखाने का मौका मिलना चाहिए कि क्या आरोप तय किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि शिकायत में उनके मुवक्किल के खिलाफ कुछ भी ठोस नहीं है। सिंघवी ने तर्क दिया कि यदि आरओ मनमाने ढंग से काम करता है और केवल एक पक्ष की बात सुनता है, तो अदालत को दखल देना चाहिए। उन्होंने संवैधानिक बेंच के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई आरोप तय नहीं हुए, तो वह जानकारी क्यों दी जानी चाहिए? उन्होंने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और इसे निंदनीय बताया।

घटनाक्रम और मध्य प्रदेश चुनाव के नतीजे

सिंघवी ने अदालत को बताया कि 9 तारीख को आदेश आया, 10 तारीख को वे चुनाव आयोग के पास गए और 11 तारीख को उन्होंने इस मामले का जिक्र किया। उन्हें डर था कि नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे और कल ऐसा ही हुआ। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आरओ 2+2=6 लिख दे, तो क्या कानून चुप रहेगा? उन्होंने चिंता जताई कि चुनाव याचिका का फैसला होने में 2 से 3 साल लग सकते हैं, जिससे उम्मीदवार चुनाव लड़ने से वंचित रह जाता है। इस फैसले पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है, लेकिन वे निराश नहीं हैं और जनता के बीच जाएंगी। इस बीच, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीनों सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है और निर्वाचन अधिकारी ने तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया है।

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