राम मंदिर चंदा चोरी मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सरकार पर तीखा हमला
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों पर सरकार को घेरा। सीएम योगी ने अखिलेश यादव के अयोध्या वादों पर पलटवार किया।
जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी के कथित मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और रामपुर से जारी अपने बयान में शंकराचार्य ने मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि इस तरह की घटनाओं से हिंदुओं का अटूट विश्वास खत्म हो जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सीसीटीवी में 40 दिन तक चंदा चोरी होने के प्रमाण मिल चुके हैं, तो अब ट्रस्ट इस पर सफाई देने या बोलने की कोशिश क्यों कर रहा है। महाराज के अनुसार, राम जी के दरबार में जो कुछ भी हो रहा है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए था।
धर्माचार्यों की अनदेखी और ट्रस्ट पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर शंकराचार्यों और प्रमुख धर्माचार्यों को मंदिर की समिति से दूर रखा। उन्होंने कहा कि आप लोगों ने शंकराचार्य को इसलिए हटाया था ताकि आप लोग अपनी मनमर्जी कर सकें और जो चाहें वो कर सकें। अब उस पूरी योजना का भांडा फूट चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि धार्मिक संस्थाओं में इस प्रकार की अनियमितताएं जारी रहीं, तो समाज का भरोसा डगमगा जाएगा। उनके अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में कैद 40 दिन के साक्ष्य इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि मंदिर के चंदे के साथ हेराफेरी हुई है, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। उन्होंने सवाल किया कि प्रमाण सामने आने के बाद भी ट्रस्ट अब क्यों बोलने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक रुख और सामाजिक मुद्दों पर प्रहार
राम मंदिर के मुद्दे के अलावा शंकराचार्य ने कई अन्य ज्वलंत विषयों पर भी सरकार को घेरा। आगामी 2027 के चुनावों के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह और उनके अनुयायी उसी पार्टी का साथ देंगे जो गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा प्रदान करेगी। नागरिकता के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पासपोर्ट और आधार कार्ड नागरिकता का वास्तविक प्रमाण नहीं रह गए हैं, बल्कि अब केवल भाजपा की सदस्यता का प्रमाण पत्र ही नागरिकता का पैमाना माना जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने पेपर लीक मामले पर छात्रों का पक्ष लेते हुए मांग की कि प्रभावित छात्र-छात्राओं को 10 से 15 गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस बार हिंदू समुदाय पापियों को अपना वोट नहीं देगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पलटवार
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर जोरदार हमला किया। मुख्यमंत्री ने 548 करोड़ रुपये की लागत वाली 143 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से हिंदू धर्म की परंपराओं और विकास की विरोधी रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज अयोध्या वैश्विक पटल पर अपनी खोई हुई गरिमा वापस पा चुकी है और वहां त्रेता युग जैसी भव्यता का अनुभव हो रहा है। योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के उस बयान पर तंज कसा जिसमें उन्होंने सरकार बनने पर अयोध्या को धार्मिक शहर बनाने का वादा किया था।
अयोध्या के विकास और इतिहास पर छिड़ी जंग
मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव के वादों को उनके पुराने इतिहास से जोड़ते हुए याद दिलाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान राम भक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं और उन्होंने सवाल किया कि जो लोग राम भक्तों के खून के प्यासे थे, वे अब अयोध्या को कैसा धार्मिक शहर बनाएंगे। गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने एक दिन पहले ही संकल्प लिया था कि उनकी सरकार आने पर अयोध्या को बेमिसाल और अद्वितीय पवित्र शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने इसे सियाराम धाम के रूप में स्थापित करने और स्थानीय निवासियों के पारंपरिक अधिकारों को बहाल करने का वादा किया था। हालांकि, योगी आदित्यनाथ ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि आज की अयोध्या राम भक्तों के परिश्रम और मोदी सरकार के प्रयासों का परिणाम है, जो अपनी शाश्वत पहचान को फिर से स्थापित कर रही है।
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