राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं लाएगी सरकार, भाषण होगा एक्सपंज

केंद्र सरकार राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी, लेकिन उनके भाषण के विवादित अंशों को सदन के रिकॉर्ड से हटाया जाएगा।

Feb 12, 2026 - 14:35
 0  1
राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं लाएगी सरकार, भाषण होगा एक्सपंज

केंद्र सरकार ने लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) नहीं लाने का निर्णय लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने यह रुख अपनाया है कि राहुल गांधी द्वारा सदन में दिए गए भाषण के उन हिस्सों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा (Expunge), जिन्हें उन्होंने प्रमाणित (Authenticate) नहीं किया है और यह घटनाक्रम संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है।

विवादास्पद भाषण और प्रमाणीकरण का मुद्दा

संसदीय सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने अपने हालिया संबोधन में कई गंभीर आरोप लगाए थे। नियमों के मुताबिक, यदि कोई सदस्य सदन के पटल पर किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोप लगाता है, तो उसे उन तथ्यों को प्रमाणित करना अनिवार्य होता है। भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किए और इसी आधार पर सरकार ने उनके भाषण के आपत्तिजनक और असत्यापित शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई है।

निशिकांत दुबे का निलंबन और सदस्यता पर कड़ा रुख

भले ही सरकार विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं ला रही है, लेकिन भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ एक अलग मोर्चा खोल दिया है। दुबे ने लोकसभा में एक प्रस्ताव पेश किया है जिसमें राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त करने और उन पर आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है। निशिकांत दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों, विशेष रूप से जॉर्ज सोरोस जैसे व्यक्तियों की मदद से देश को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राहुल गांधी को संसद से निलंबित करने के लिए एक 'जरूरी मोशन' पेश किया है, जो विशेषाधिकार प्रस्ताव से अलग प्रक्रिया है।

संसदीय कार्य मंत्री की प्रधानमंत्री से मुलाकात

सदन में जारी गतिरोध और राहुल गांधी के बयानों के बाद पैदा हुई स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा की गई। रिजिजू ने प्रधानमंत्री को सदन में हो रहे हंगामे और विपक्षी दलों के रुख के बारे में विस्तार से जानकारी दी और भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी की भाषा की मर्यादा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें संसदीय लोकतंत्र की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

अमेरिका व्यापार समझौते पर विपक्ष का भारी हंगामा

सदन की कार्यवाही केवल राहुल गांधी के मुद्दे तक ही सीमित नहीं रही। गुरुवार को विपक्षी दलों ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर लोकसभा में भारी नारेबाजी की। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के मात्र 7 मिनट के भीतर ही दोपहर 12:00 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। जब पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने प्रश्नकाल शुरू कराया, तो विपक्षी सदस्य आसन के निकट पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इस शोर-शराबे के बीच ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने एक पूरक प्रश्न का उत्तर दिया, लेकिन स्थिति अनियंत्रित होने पर सदन को स्थगित करना पड़ा।

विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य और संसदीय नियम

संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, लोकसभा के नियम 380 और 381 के तहत अध्यक्ष के पास यह अधिकार होता है कि वह सदन की कार्यवाही से अपमानजनक, असंसदीय या अमर्यादित शब्दों को हटा सकें। सरकार का विशेषाधिकार प्रस्ताव न लाने का निर्णय संभवतः मामले को और अधिक तूल देने से बचने की रणनीति हो सकता है। हालांकि, निशिकांत दुबे द्वारा पेश किया गया निलंबन प्रस्ताव सदन की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में प्रमाणीकरण के मुद्दे पर सदन में और अधिक तीखी बहस देखने को मिल सकती है, क्योंकि विपक्ष अपने आरोपों पर कायम है और सरकार नियमों का हवाला दे रही है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow