राहुल गांधी समेत 11 नेताओं की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी और 11 विपक्षी नेताओं ने SIR और मतदाता सूची की अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग। मंगलवार को सुनवाई।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के 11 अन्य प्रमुख नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की है। यह याचिका मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर दाखिल की गई है और याचिका में SIR की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग की गई है। विपक्ष ने बड़े पैमाने पर वोट चोरी और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है।
कानूनी चुनौती और याचिकाकर्ता
कांग्रेस पार्टी की लीगल टीम ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की। इस याचिका में कुल 11 याचिकाकर्ता शामिल हैं, जो इंडिया ब्लॉक के विभिन्न घटक दलों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ए. बेबी (CPI-M), डी. टी. मोहम्मद बशीर (IUML) के नाम शामिल हैं और यह ध्यान देने योग्य है कि आम आदमी पार्टी की ओर से इस याचिका में कोई भी नेता शामिल नहीं है। याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को प्रतिवादी बनाया गया है।
मंगलवार को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि राहुल गांधी की याचिका से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाए। अदालत ने कहा कि याचिका में यदि कोई तकनीकी खामी है, तो उसे तुरंत दूर किया जाए ताकि मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया था कि यदि याचिका सोमवार शाम तक दाखिल हो जाती है, तो इसे अगले दिन सुनवाई के लिए लिया जा सकता है। याचिका में मुख्य रूप से SIR के दौरान मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है।
लोकतंत्र के लिए मार्च
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' का आयोजन किया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में निकले इस मार्च में सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, शशि थरूर, सचिन पायलट और मुकुल वासनिक के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष भी शामिल हुईं। मार्च में डी राजा, एमए बेबी, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत, दीपांकर भट्टाचार्य और ईटी मोहम्मद बशीर जैसे इंडिया ब्लॉक के दिग्गज नेता मौजूद रहे। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, नंदिता नारायण और आइसा की प्रमुख नेहा बोरा ने भी इस प्रदर्शन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मार्च का मार्ग और पुलिस की कार्रवाई
सभी नेता और समर्थक सबसे पहले संविधान क्लब में एकत्रित हुए। इसके बाद वे 4 एसी बसों के जरिए बाराखंभा रोड जंक्शन पहुंचे और वहां से सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च शुरू किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोक दिया। इस दौरान स्थिति को देखते हुए राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत कुछ नेता एक वाहन के ऊपर चढ़ गए और वहां से अपना विरोध दर्ज कराया। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग पर मतदाताओं के नाम हटाने और चुनावी प्रक्रिया में धांधली करने के गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी का मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर तीखा हमला
मार्च शुरू होने से पहले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए और दावा किया कि पुलिस को युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि सरकार के भीतर के कुछ अधिकारी विपक्ष के साथ गोपनीय सूचनाएं साझा कर रहे हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से सीधे तौर पर इस्तीफे की मांग की और उन्हें सरकारी गवाह बनने की सलाह दी। राहुल गांधी ने कहा, "इस्तीफा दीजिए, सरकारी गवाह बनिए। " उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और विपक्ष की यह लड़ाई उन ताकतों के खिलाफ है जो उनके पीछे काम कर रही हैं।
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