रूस और बांग्लादेश के बीच अब रुपये में होगा व्यापार, अमेरिकी प्रतिबंधों का तोड़
रूस ने बांग्लादेश को भारतीय रुपये में व्यापार करने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच इस कदम से सस्ता यूरिया और नई भुगतान प्रणाली मिलने की उम्मीद है।
रूस अब बांग्लादेश के साथ अपने कारोबार को भारतीय रुपये के जरिए आगे बढ़ाने की तैयारी में पूरी गंभीरता से जुटा है और अमेरिका की तरफ से लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने रूसी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय भुगतान तंत्र से लगभग पूरी तरह बाहर कर दिया है, जिसकी वजह से डॉलर आधारित लेनदेन करना अब रूस के लिए बहुत मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में मॉस्को ने डॉलर का एक मजबूत विकल्प तलाशते हुए भारतीय रुपये को इस्तेमाल करने का औपचारिक प्रस्ताव बांग्लादेश के सामने रखा है। इस योजना में न केवल रुपये का उपयोग शामिल है, बल्कि दोनों देशों के बीच एक स्वतंत्र भुगतान व्यवस्था बनाने और ढाका में रूसी बैंक की एक शाखा खोलने की योजना भी शामिल है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बाद से दोनों देशों के व्यापार में काफी गिरावट आई है, और अब इस नई भुगतान व्यवस्था के जरिए कारोबार को फिर से पुरानी रफ्तार देने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिकी प्रतिबंध और भारतीय रुपये की भूमिका
अमेरिकी प्रतिबंधों ने रूस के बैंकिंग तंत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया है, जिससे पारंपरिक तरीकों से रूस को पैसा भेजना या वहां से पैसा मंगाना बांग्लादेश के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है और इस वित्तीय समस्या से निपटने के लिए रूस ने भारतीय रुपये को एक वैकल्पिक भुगतान माध्यम बनाने का सुझाव दिया है। यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत और रूस पहले से ही बिना किसी औपचारिक करेंसी समझौते के अपने द्विपक्षीय व्यापार का एक बड़ा हिस्सा रुपये में निपटा रहे हैं। बांग्लादेश भी वर्तमान में सीमित मात्रा में भारत के साथ रुपये में लेनदेन करता है। इसी अनुभव को आधार बनाकर रूस चाहता है कि बांग्लादेश के साथ भी ऐसी ही व्यवस्था लागू की जाए। बांग्लादेश के आर्थिक संबंध प्रभाग के अनुसार, इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सितंबर और अक्टूबर में होने वाली द्विपक्षीय आयोग की बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बैठक से पहले दोनों देशों के बीच तैयारियों का दौर भी शुरू हो चुका है।
युद्ध के कारण व्यापार में आई भारी गिरावट
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने से पहले बांग्लादेश हर साल रूस को 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा का निर्यात करता था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भुगतान से जुड़ी जटिलताओं के चलते यह आंकड़ा काफी नीचे गिर गया है। मौजूदा वित्त वर्ष के जुलाई से मई के बीच बांग्लादेश ने रूस को केवल 24 करोड़ 50 लाख डॉलर का ही सामान भेजा है, जिसका अर्थ है कि व्यापार अब आधे से भी कम रह गया है। इसके बावजूद बांग्लादेश अब भी रूस से खाद और गेहूं जैसी अत्यंत जरूरी चीजें मंगा रहा है। रूस को यह पूरी उम्मीद है कि यदि रुपये आधारित भुगतान व्यवस्था और अलग पेमेंट सिस्टम लागू हो जाता है, तो प्रतिबंधों से पैदा हुई वित्तीय अड़चनें काफी हद तक दूर होंगी और दोनों देशों का कारोबार फिर से पटरी पर लौट सकेगा।
रूपपुर परमाणु संयंत्र और कर्ज का संकट
इस नई पहल के पीछे एक बड़ी वजह रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए लिया गया कर्ज भी है। प्रतिबंधों की वजह से बांग्लादेश इस कर्ज की किस्तें समय पर नहीं चुका पा रहा है। शुरुआत में चीनी युआन में भुगतान करने का विकल्प आजमाया गया था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से बांग्लादेशी और चीनी बैंकों ने इस प्रक्रिया में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर कर्ज की किस्त सोनाली बैंक में रूस के नाम पर खुले एक विशेष खाते में जमा की जा रही है, लेकिन यह रकम अभी तक तकनीकी कारणों से रूस तक नहीं पहुंच पाई है। इसी उलझन को सुलझाने के लिए दोनों पक्ष अब वैकल्पिक भुगतान प्रणाली पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। पिछली सरकार के दौरान भी ऐसा ही एक प्रस्ताव आया था, लेकिन तब यह योजना अमल में नहीं आ सकी थी। अब यह मुद्दा दोबारा चर्चा में है और इस बार ठोस प्रगति के संकेत मिल रहे हैं।
सस्ता यूरिया और अन्य व्यापारिक प्रस्ताव
व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती देने के लिए रूस ने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय बाजार दर से करीब 10 डॉलर प्रति टन कम कीमत पर लगभग 2 लाख 80 हजार टन यूरिया उर्वरक देने की इच्छा जताई है। यह प्रस्ताव बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्री और ढाका में मौजूद रूसी राजनयिक के बीच हुई एक बैठक में रखा गया। इसके अलावा रूस ने सूरजमुखी तेल, गेहूं, चना, पीली मटर और विभिन्न प्रकार की दालों की आपूर्ति बढ़ाने में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। आगामी अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में रूस कारोबार और निवेश बढ़ाने से जुड़े कई और प्रस्ताव भी रखने वाला है। इनमें रूस-बांग्लादेश व्यापार परिषद का गठन करना, भरोसेमंद बांग्लादेशी वस्त्र निर्यातकों की एक पंजीकृत सूची तैयार करना, छोटे और मझोले उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाना और बांग्लादेश में विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना में मदद करना शामिल है।
बांग्लादेश की प्राथमिकताएं और भविष्य की राह
वहीं बांग्लादेश की तरफ से इस आगामी बैठक में तकनीकी ट्रांसफर यानी तकनीक के हस्तांतरण को सबसे ऊपर रखा जाएगा। ढाका प्रशासन नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, ई-कॉमर्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार, कृषि, खाद्य सुरक्षा, कृषि-प्रसंस्करण उद्योग, तकनीकी-व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के प्रस्ताव भी रूस के सामने रखेगा। कुल मिलाकर, प्रतिबंधों की मार झेल रहा रूस अब भारतीय रुपये के सहारे बांग्लादेश के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को एक नई दिशा देने की कोशिश में है और बांग्लादेश के लिए यह सस्ता उर्वरक, आसान भुगतान और तकनीकी सहयोग जैसे कई फायदों का एक बड़ा मौका साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें सितंबर और अक्टूबर में होने वाली उस अहम बैठक पर टिकी हैं, जहां इन सभी प्रस्तावों की अंतिम तस्वीर साफ होगी।
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