लेबनान में इजराइली एयरस्ट्राइक: महिला पत्रकार अमल खलील की मौत, इस साल 9 जर्नलिस्टों ने गंवाई जान

दक्षिणी लेबनान में इजराइली एयरस्ट्राइक में पत्रकार अमल खलील की मौत। इस साल लेबनान में 9 पत्रकार मारे गए। पूरी खबर और आंकड़े यहां पढ़ें।

Apr 23, 2026 - 11:35
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लेबनान में इजराइली एयरस्ट्राइक: महिला पत्रकार अमल खलील की मौत, इस साल 9 जर्नलिस्टों ने गंवाई जान

लेबनान में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान एक बड़ी घटना सामने आई है। दक्षिणी लेबनान में हुई इजराइली एयरस्ट्राइक में लेबनानी पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई। यह हमला अल-तिरी गांव में हुआ, जहां वह रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी निभा रही थीं। खलील ने हमले के दौरान एक घर में शरण ली थी, लेकिन वही घर हमले की चपेट में आ गया।

हमले का घटनाक्रम और रेस्क्यू ऑपरेशन

जानकारी के मुताबिक, अमल खलील की मौत से पहले उनकी कार के पास एक एयरस्ट्राइक हुई थी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद वह अपनी सहयोगी जीनाब फराज के साथ सुरक्षित स्थान की तलाश में एक घर में शरण लेने पहुंचीं और कुछ समय बाद उस घर पर भी हमला हुआ और खलील मलबे में दब गईं। इस घटना में वह और उनकी सहयोगी जीनाब फराज गंभीर रूप से घायल हो गईं। हमले के तुरंत बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उन्हें इजराइली बमबारी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण कुछ समय के लिए बचाव कार्य रोकना पड़ा। अंततः लेबनानी सेना, सिविल डिफेंस और रेड क्रॉस की मदद से 6 घंटे बाद खलील का शव मलबे से निकाला गया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात पूरा हुआ।

पत्रकारिता करियर और मीडिया पर हमले के आंकड़े

अमल खलील वर्ष 2006 से 'अल-अखबार' अखबार के लिए काम कर रही थीं और दक्षिणी लेबनान के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से लगातार रिपोर्टिंग कर रही थीं। इस दुखद घटना के साथ ही लेबनान में इस साल अब तक मारे गए पत्रकारों की संख्या 9 हो गई है। युद्ध क्षेत्र में मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं।

लेबनान सरकार की प्रतिक्रिया और इजराइल का पक्ष

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने अमल खलील की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है और उन्होंने इसे 'वॉर क्राइम' (युद्ध अपराध) करार देते हुए कहा कि लेबनान इस मामले में कानूनी जवाबदेही तय करेगा। लेबनान के सूचना मंत्री पॉल मोरकोस ने भी घटना की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया। दूसरी ओर, इजराइली सेना ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उस इलाके में कुछ लोगों ने सीजफायर का उल्लंघन किया था, जिससे उसके सैनिकों को खतरा पैदा हुआ था। सेना ने पत्रकारों को जानबूझकर निशाना बनाने और रेस्क्यू रोकने के आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि मामले की जांच की जा रही है।

अन्य पत्रकारों की मौत और मानवीय संकट

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इजराइल और लेबनान के बीच सीजफायर को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने वाली है। इससे पहले मार्च के अंत में भी दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले में तीन पत्रकार मारे गए थे। हिज्बुल्लाह के अल-मनार टीवी ने बताया कि उनका रिपोर्टर अली शोएब मारा गया है और इजराइली सेना ने शोएब पर हिज्बुल्लाह का खुफिया एजेंट होने का आरोप लगाते हुए उसे निशाना बनाने की बात स्वीकार की थी। इसी हमले में बेरूत स्थित अल-मयादीन टीवी की पत्रकार फातिमा फ्तौनी और उनके भाई मोहम्मद फ्तौनी (वीडियो जर्नलिस्ट) की भी मौत हुई थी। 2 मार्च से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 2,300 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।

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