विपक्षी सांसदों का काले कपड़ों में संसद में प्रदर्शन, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राहुल गांधी के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में काले कपड़े पहनकर संसद में प्रदर्शन किया।

Jul 23, 2026 - 08:35
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विपक्षी सांसदों का काले कपड़ों में संसद में प्रदर्शन, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को एक विशेष दृश्य देखने को मिला जब विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे। यह प्रतीकात्मक विरोध छात्र प्रदर्शनकारियों और विपक्षी सांसदों के खिलाफ की गई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था। काले कपड़ों में पहुंचे सांसदों ने केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और इस प्रदर्शन ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक सरगर्मी को तेज कर दिया है।

मकर द्वार पर विपक्षी एकजुटता

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर के भीतर स्थित मकर द्वार के सामने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। मकर द्वार पर जमा हुए इन सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग की। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार छात्रों के आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस बल का अनुचित उपयोग कर रही है और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है।

के. सुरेश के गंभीर आरोप

कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने इस विरोध प्रदर्शन के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि काले कपड़े पहनने का निर्णय मंगलवार को हुए घटनाक्रम के विरोध में लिया गया है और सुरेश ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई सांसदों के साथ पुलिस ने कथित रूप से सख्ती बरती और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि इसी दुर्व्यवहार और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के उल्लंघन के विरोध में विपक्ष ने संसद पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला किया।

विपक्ष की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं।

गर्माया राजनीतिक माहौल

विपक्ष के इस कड़े रुख और काले कपड़ों में किए गए प्रदर्शन के कारण संसद का माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा और हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों को लेकर अलग रुख अपनाया गया है, लेकिन छात्र आंदोलनों और पुलिस की भूमिका का मुद्दा अब चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि जब तक छात्रों और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित नहीं होती, वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। मकर द्वार पर हुआ यह प्रदर्शन विपक्ष की एकजुटता और सरकार के प्रति उनके कड़े विरोध को दर्शाता है।

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