शेयर बाजार में बंपर रिकवरी: सेंसेक्स 600 अंक उछला, निवेशकों ने कमाए 5 लाख 50 हजार करोड़ रुपये
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को सेंसेक्स 635 अंक उछला। निवेशकों की संपत्ति में 5 लाख 57 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। जानिए तेजी के 5 बड़े कारण।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को शानदार रिकवरी देखने को मिली, जिससे पिछले सत्र में आई भारी गिरावट के बाद बाजार फिर से संभल गया। ट्रेडिंग फ्लोर पर निवेशकों का भरोसा लौटने के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही अच्छी बढ़त दर्ज की गई। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद, भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से लगातार छठे सत्र में की गई खरीदारी ने बाजार के सेंटिमेंट को सकारात्मक बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई।
सुबह के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 635 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाकर 77,139 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 195 अंकों की बढ़त के साथ 24,077 पर कारोबार करता दिखा। इस तेजी की वजह से बुधवार को डूबी निवेशकों की संपत्ति की काफी हद तक भरपाई हो गई। बुधवार को निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए थे, लेकिन गुरुवार की तेजी से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में लगभग 5 लाख 57 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इसके साथ ही कुल मार्केट कैप बढ़कर 477 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है।
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
सेंसेक्स की कंपनियों में भारती एयरटेल, एटरनल और सन फार्मा के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी देखी गई। इसके अलावा एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, आईटी सेक्टर के शेयरों में कुछ दबाव नजर आया। इंफोसिस और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ-साथ बजाज फाइनेंस के शेयरों में 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे ये बेंचमार्क इंडेक्स में नुकसान वाले शेयरों की सूची में सबसे आगे रहे।
बाजार में यह उत्साह केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि ब्रॉडर मार्केट में भी अच्छी खरीदारी देखी गई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 2 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया वीआईएक्स (VIX) पिछले सत्र में 26 प्रतिशत उछलने के बाद गुरुवार को 9 रुपये 34 पैसे प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 13 रुपये 34 पैसे पर आ गया, जिससे निवेशकों ने राहत की सांस ली।
सेक्टरवार प्रदर्शन और बाजार का रुख
विभिन्न सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे इंडेक्स में 1 से 2 प्रतिशत की तेजी रही। हालांकि, टीसीएस के तिमाही नतीजों से पहले निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। एनएसई पर कुल 2,506 शेयरों में बढ़त और 433 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 93 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह दर्शाता है कि बाजार में खरीदारी का माहौल काफी व्यापक था।
बाजार में तेजी के 5 प्रमुख कारण
तेजी का पहला बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान रहा। ट्रंप ने ईरान के साथ टकराव को लेकर भरोसा दिलाया कि उन्हें युद्ध के फिर से शुरू होने की उम्मीद नहीं है और उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो अमेरिका 10 गुना ज्यादा जोरदार जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी, जिससे वैश्विक बाजारों में स्थिरता आई और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता कम हुई।
दूसरा कारण सकारात्मक वैश्विक संकेत रहे। जापान का निक्केई इंडेक्स चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में रिकवरी के कारण लगभग 2 प्रतिशत चढ़ा। अमेरिकी बाजार में नैस्डैक बढ़त के साथ बंद हुआ और डॉव जोन्स फ्यूचर्स में भी सकारात्मक कारोबार देखा गया, जिसने भारतीय बाजार के लिए अच्छे संकेत दिए। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में मामूली गिरावट रही, लेकिन एशियाई बाजारों का कुल रुख स्थिर रहा।
तीसरा कारण विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद विदेशी निवेशकों ने बुधवार को लगातार छठे सत्र में भारतीय शेयरों की खरीदारी की। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने 1,962 रुपये 80 पैसे करोड़ के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली और गिरावट पर लगाम लगी।
चौथा कारण ईरान तनाव के बीच रुपये की स्थिरता रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95 रुपये 55 पैसे पर खुला, जो पिछले बंद भाव के लगभग बराबर था। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपया निकट भविष्य में 95 रुपये 20 पैसे से 95 रुपये 80 पैसे के दायरे में कारोबार कर सकता है। मुद्रा की इस स्थिरता ने विदेशी निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है।
पांचवां कारण कंपनियों की बेहतर कमाई की उम्मीदें हैं और जून 2026 की तिमाही में निफ्टी 50 कंपनियों के रेवेन्यू में 10 रुपये 6 पैसे प्रतिशत की डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि इनपुट कॉस्ट बढ़ने से नेट प्रॉफिट ग्रोथ 5 रुपये 8 पैसे प्रतिशत रहने की संभावना है, लेकिन रेवेन्यू में सुधार ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। पिछले साल की इसी तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ 4 रुपये 9 पैसे प्रतिशत और प्रॉफिट ग्रोथ 8 रुपये 5 पैसे प्रतिशत थी।
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