संसद मानसून सत्र: महिला आरक्षण परिसीमन और FCRA बिल पर सस्पेंस बरकरार विपक्ष का कड़ा विरोध

संसद के मानसून सत्र के आखिरी चार दिनों में महिला आरक्षण और FCRA बिल पर सस्पेंस बना हुआ है। विपक्ष के कड़े विरोध के बीच सरकार के लिए इन्हें पास कराना बड़ी चुनौती है।

Aug 10, 2026 - 07:35
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संसद मानसून सत्र: महिला आरक्षण परिसीमन और FCRA बिल पर सस्पेंस बरकरार विपक्ष का कड़ा विरोध

संसद के मानसून सत्र के समापन में अब केवल चार दिन का समय शेष रह गया है, लेकिन महिला आरक्षण, परिसीमन और फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) जैसे महत्वपूर्ण और चर्चित विधेयकों का भविष्य अब भी अधर में लटका हुआ है। इन विधेयकों को लेकर अनिश्चितता की स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि कांग्रेस और उसके अधिकांश सहयोगी दल इनके विरोध पर पूरी तरह अड़े हुए हैं और सोमवार के लिए लोकसभा की जो बिजनेस लिस्ट यानी कार्यसूची जारी की गई है, उसमें इन तीनों में से किसी भी विधेयक का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच इन मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।

संविधान संशोधन विधेयक और संख्या बल की चुनौती

संविधान संशोधन विधेयक, जिसमें वर्ष 2029 से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और लोकसभा चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल था, पहले भी बाधाओं का सामना कर चुका है। अप्रैल के महीने में यह विधेयक सदन में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त न कर पाने की वजह से गिर गया था। उस समय सदन में मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे जबकि विरोध में 230 वोट दर्ज किए गए थे, जो कि आवश्यक बहुमत से काफी कम थे। वर्तमान आंकड़ों की बात करें तो लोकसभा में एनडीए की सदस्य संख्या बढ़कर 299 हो गई है, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक 360 वोटों के आंकड़े से यह अब भी काफी दूर है। यही कारण है कि इन विधेयकों को पारित कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

FCRA संशोधन विधेयक पर बढ़ता विवाद

25 मार्च को सदन में पेश किया गया FCRA संशोधन विधेयक भी विवादों के केंद्र में है। यह विधेयक उन संगठनों पर कड़ी निगरानी रखने की वकालत करता है जिन्हें विदेशों से फंड प्राप्त होता है। इस विधेयक का ईसाई समूहों और विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है और कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अलप्पुझा में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार को सत्र के अंतिम दिनों में इस विधेयक को जबरन आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस प्रस्तावित कानून को "असंवैधानिक और जनविरोधी" करार दिया। वेणुगोपाल ने यह चेतावनी भी दी कि यदि गृह मंत्री अमित शाह इस बिल को पास कराने की कोशिश करते हैं, तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।

सदन में हंगामा और बातचीत का विफल दौर

20 जुलाई से शुरू हुए इस मानसून सत्र में अब तक काफी हंगामा देखने को मिला है। विशेष रूप से NEET पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष ने सदन की कार्यवाही को बार-बार बाधित किया है। विपक्ष की मांग है कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में अपना बयान दें। हंगामे के कारण सत्र के दौरान बहुत कम विधेयक पारित हो सके हैं और जो पारित हुए भी हैं, उन पर बहुत कम चर्चा हो पाई है। सरकार की ओर से विपक्ष को मनाने की कोशिशें भी अब तक विफल रही हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस संबंध में राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की, लेकिन राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि इन विधेयकों पर सर्वदलीय सहमति होना अनिवार्य है। महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी तीखी बहस देखने को मिली है।

विभिन्न दलों का रुख और आगामी रणनीति

विभिन्न राजनीतिक दलों ने इन विधेयकों पर अपनी अलग-अलग राय रखी है। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने परिसीमन के मुद्दे पर अपनी पार्टी के विरोध को एक बार फिर दोहराया है। इसके विपरीत, शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को अपना समर्थन दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में उनके एनडीए में वापस लौटने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। एनसीपी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले ने परिसीमन पर फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने को जल्दबाजी बताया, लेकिन उन्होंने FCRA बिल के वर्तमान स्वरूप का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने मांग की है कि इस बिल को या तो वापस लिया जाए या फिर इसे जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए। सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) के आठ सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेगा। कांग्रेस ने इस प्रतिनिधिमंडल से आग्रह किया है कि वे प्रधानमंत्री को महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के इंडिया ब्लॉक के विरोध के बारे में सूचित करें और इस बीच, कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10 से 12 अगस्त तक सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन दिन का व्हिप भी जारी किया है।

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