संसद मानसून सत्र: सरकार के दांव और विपक्ष की तैयारी, मानसून सत्र से पहले शुरू हुई मीटिंग पॉलिटिक्स
संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार और विपक्ष ने अपनी रणनीतियां तेज कर दी हैं। परिसीमन बिल और अन्य मुद्दों पर बैठकों का दौर जारी है।
संसद के मानसून सत्र के शुरू होने में अब केवल 4 दिन का समय बाकी है। इस महत्वपूर्ण सत्र से पहले देश की राजनीति में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। सरकार और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं और इसके लिए बैठकों का दौर शुरू हो गया है। जहां सत्ता पक्ष ने बुधवार को अपनी रणनीति पर चर्चा की, वहीं विपक्ष ने गुरुवार को बैठक कर सरकार को घेरने का खाका तैयार किया। गौरतलब है कि बीती रात प्रधानमंत्री आवास पर एक हाई-लेवल मीटिंग हुई थी, जबकि आज सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने मंथन किया।
प्रधानमंत्री आवास पर हुई उच्च स्तरीय बैठक
प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में पीएम मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष भी मौजूद थे। हालांकि, इस बैठक में किन विशिष्ट मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि सरकार सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विधेयकों और विपक्ष के संभावित हमलों से निपटने की योजना पर काम कर रही है।
सोनिया गांधी के घर कांग्रेस की रणनीतिक बैठक
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी अपनी कमर कस ली है। आज सोनिया गांधी के घर पर हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल जैसे बड़े नेता शामिल हुए और इस बैठक की एक तस्वीर भी जारी की गई है, जो विपक्ष की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने के लिए एक ठोस रणनीति बनाना था। कांग्रेस न केवल वर्तमान मुद्दों पर ध्यान दे रही है, बल्कि वह इस बात के लिए भी तैयार है कि अगर सरकार परिसीमन बिल जैसा कोई बड़ा कदम उठाती है, तो उससे कैसे निपटा जाए।
मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री को चिट्ठी
परिसीमन बिल की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखा है। खरगे ने अपने पत्र में लिखा है कि हमने पहले भी परिसीमन पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस अनुरोध को नहीं माना और लोकसभा में बिल गिर गया। उन्होंने आगे लिखा, "ऐसी चर्चा है कि आगामी सत्र में संशोधित परिसीमन बिल लाया जाएगा। मैं फिर से अनुरोध करता हूं कि इस पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
सहयोगी दलों के बदलते रुख और कांग्रेस की चिंता
कांग्रेस की इस सक्रियता के पीछे एक बड़ी वजह उसके सहयोगी दलों के बदलते संकेत भी हैं। हाल ही में एनसीपी शरद गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा था कि अगर परिसीमन बिल 50 प्रतिशत सीट बढ़ोतरी पर आधारित होता है, तो वे इसके समर्थन पर विचार कर सकते हैं। वहीं, शिवसेना यूबीटी गुट के संजय राउत ने भी संकेत दिया था कि यदि बिल में विपक्ष के सुझावों को शामिल किया जाता है, तो उनकी पार्टी अपना रुख बदल सकती है। इन संकेतों के बीच कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री विपक्षी पार्टियों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि सरकार चालाकी से 2 तिहाई बहुमत हासिल कर सके। उन्होंने इसे कलंकित 2 तिहाई बहुमत करार देते हुए कहा कि कांग्रेस परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध करेगी।
विपक्ष के एजेंडे में शामिल प्रमुख मुद्दे
परिसीमन के अलावा कांग्रेस ने उन मुद्दों की एक लंबी सूची तैयार की है, जिन पर वह सरकार को सदन में घेरेगी। इस सूची में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप, एथेनॉल मिक्स पेट्रोल का मुद्दा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताएं शामिल हैं। इसके अलावा, राजनीतिक दलों को तोड़ने की कोशिश, भ्रष्टाचार और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। सत्ता पक्ष की ओर से सांसद जगदंबिका पाल ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर सदन की कार्यवाही में बाधा डालना चाहती है।
सरकार ने जारी किया मानसून सत्र का एजेंडा
बीजेपी नेता बीएल वर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनकी राम में आस्था नहीं है, उन्हें इस विषय पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। इस बीच, सरकार ने मानसून सत्र का आधिकारिक एजेंडा जारी कर दिया है। इस सत्र के दौरान सरकार 5 नए बिल और 2 लंबित बिल पेश करने की योजना बना रही है। आगामी रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार इन बिलों के बारे में सभी दलों को विस्तार से जानकारी देगी। हालांकि, वर्तमान अस्थायी सूची में किसी संविधान संशोधन विधेयक का उल्लेख नहीं है, लेकिन 5 नए महत्वपूर्ण विधेयक इस सत्र का मुख्य आकर्षण होंगे।
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