सऊदी अरब और हूतियों में छिड़ी भीषण जंग, रियाद में अरामको पर हमला

हूती विद्रोहियों ने रियाद में अरामको के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। सऊदी अरब अब हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है।

Oct 4, 2026 - 09:35
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सऊदी अरब और हूतियों में छिड़ी भीषण जंग, रियाद में अरामको पर हमला

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच चल रहा संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित दिग्गज तेल कंपनी अरामको के एक महत्वपूर्ण ठिकाने को अपना निशाना बनाया है। हूतियों के अनुसार, यह हमला मिसाइलों और ड्रोन के जरिए किया गया। विद्रोहियों का कहना है कि यह कार्रवाई यमन की राजधानी सना और देश के अन्य हिस्सों पर सऊदी अरब द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों का एक करारा जवाब है।

रियाद में अरामको के ठिकानों पर हमले का असर

रियाद से मिली खबरों के मुताबिक, अरामको के ठिकाने के पास हमले के बाद भीषण आग लग गई और आसमान में धुएं का एक विशाल गुबार देखा गया और रियाद के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक तेल रिफाइनरी में दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने की कोशिश करते हुए देखा गया है। हालांकि, इस पूरी घटना पर सऊदी अरब के अधिकारियों की ओर से अब तक आग लगने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके साथ ही, तेल कंपनी अरामको ने भी इस हमले या उससे हुए नुकसान के संबंध में फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया है।

ऊर्जा ठिकानों पर बढ़ते हमले और पिछला घटनाक्रम

ईरान का समर्थन प्राप्त हूती विद्रोहियों ने पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरब के ऊर्जा और रणनीतिक ठिकानों पर अपने हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है। इससे पहले 24 सितंबर को भी हूतियों ने यानबू में स्थित अरामको के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने का दावा किया था। उस समय सऊदी अरब ने जानकारी दी थी कि उसने ताइफ और यानबू के आसपास के इलाकों में दागी गई 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया था। हालांकि, उस समय अरामको के ठिकानों को किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई थी।

तेल बुनियादी ढांचे पर हमलों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। 13 सितंबर को एक ड्रोन हमले के कारण सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन प्रभावित हुई थी, जिससे यानबू तक होने वाली तेल की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हुई। इससे पहले 20 जुलाई को हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ एक समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। उन्होंने इसे यमन के उन क्षेत्रों पर सऊदी अरब की समुद्री और हवाई घेराबंदी का जवाब बताया था, जो हूतियों के नियंत्रण में हैं।

हूतियों के विरुद्ध सऊदी अरब की बड़ी सैन्य तैयारी

क्षेत्रीय और पश्चिमी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि सऊदी अरब अब हूतियों के खिलाफ एक बहुत बड़े और निर्णायक सैन्य अभियान की शुरुआत करने की योजना बना रहा है। इस अभियान के तहत लाल सागर के तटीय क्षेत्रों में हमले करने और एक साथ कई मोर्चों पर कार्रवाई करने जैसे विकल्पों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह बड़ा सैन्य अभियान आने वाले कुछ हफ्तों में शुरू हो सकता है। इस कार्रवाई में जमीन पर सऊदी अरब समर्थित सेनाएं मोर्चा संभालेंगी, जबकि आसमान से सऊदी वायुसेना के लड़ाकू विमान हूतियों के ठिकानों को ध्वस्त करेंगे।

24 घंटे में 94 हमले और भारी तबाही का दावा

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने शनिवार को एक बयान जारी कर दावा किया कि पिछले 24 घंटों के भीतर सऊदी अरब ने यमन के सना, सादा, ताइज, हज्जा, अमरान और इब्ब प्रांतों में कुल 94 हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। सरी के अनुसार, इन हमलों में कई आम नागरिकों की जान गई है और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि सऊदी अरब के F-15 और टाइफून जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों ने खामिस मुशैत और ताइफ के हवाई ठिकानों से उड़ान भरकर इन हमलों को अंजाम दिया। इसके अलावा, नजरान और जीजान के इलाकों से मिसाइलें दागी गईं। सरी के आंकड़ों के मुताबिक, हालिया तनाव बढ़ने के बाद से सऊदी अरब द्वारा किए गए हमलों की कुल संख्या 1350 तक पहुंच गई है।

संचार नेटवर्क और रणनीतिक क्षेत्रों पर प्रभाव

हूती समर्थक मीडिया चैनल अल-मसीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के विमानों ने सादा के साकैन जिले और अमरान में स्थित दूरसंचार नेटवर्क को भी मिसाइलों से निशाना बनाया है। वहीं, वेबसाइट अल-मसदर ऑनलाइन ने खबर दी है कि सना में हुए हवाई हमलों के दौरान कम से कम 8 जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। हालांकि, इन विशिष्ट हमलों में हुए कुल नुकसान और हताहतों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि हूतियों ने पिछले महीने यमन के लगभग पूरे लाल सागर तट पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। सऊदी अरब द्वारा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों के बीच, तेल ठिकानों पर भविष्य में और भी बड़े हमलों का खतरा मंडरा रहा है।

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