सर्राफा बाजार धड़ाम: चांदी दो लाख के नीचे और सोना चार प्रतिशत तक हुआ सस्ता

एमसीएक्स पर चांदी दो लाख रुपये से नीचे फिसल गई है और सोना चार प्रतिशत तक सस्ता होकर एक लाख बयालीस हजार रुपये पर आ गया है।

Oct 26, 2026 - 09:35
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सर्राफा बाजार धड़ाम: चांदी दो लाख के नीचे और सोना चार प्रतिशत तक हुआ सस्ता

घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी दो लाख के नीचे फिसल गई है। अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से तय होगा कि आगे बाजार की चाल कैसी रहने वाली है। अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अभी जल्दबाजी न करें। बीते हफ्ते सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दाम धड़ाम हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गिरावट का यह सिलसिला इस हफ्ते भी जारी रह सकता है। असल में, महंगे होते कच्चे तेल ने महंगाई की टेंशन बढ़ा दी है, और अब पूरी दुनिया के निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जिससे बाजार की आगे की चाल तय होगी।

एमसीएक्स पर औंधे मुंह गिरे सोने और चांदी के दाम

घरेलू वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में बीते हफ्ते बिकवाली का भारी दबाव रहा। दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पांच हजार सात सौ अड़सठ रुपये यानी करीब चार प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ एक लाख बयालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। चांदी में तो सोने से भी ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बीते हफ्ते चांदी का भाव पन्द्रह हजार सत्तासी रुपये यानी सात प्रतिशत 14 पैसे तक टूट गया। इस भारी गिरावट के बाद चांदी दो लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर एक लाख छियानवे हजार रुपये प्रति किलो पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमोबेश यही हाल रहा। कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना चार प्रतिशत 14 पैसे लुढ़ककर चार हजार सात रुपये 90 पैसे प्रति औंस पर बंद हुआ। शुक्रवार के कारोबार में तो यह भाव एक समय तीन हजार नौ सौ निवासी डॉलर तक गिर गया था। वहीं वैश्विक बाजार में चांदी भी करीब छह प्रतिशत टूटकर त्रेपन डॉलर 95 सेंट प्रति औंस पर आ गई।

कच्चे तेल की तेजी से सहमा सर्राफा बाजार

सोने और चांदी में आई इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण काम कर रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत एक सौ पंद्रह डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है। नियम सीधा है कि जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो हर चीज की ढुलाई और लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। महंगाई को काबू में करने के लिए दुनियाभर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक सोने और चांदी से पैसा निकालकर बॉन्ड और डॉलर में लगाना शुरू कर देते हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के साथ-साथ डॉलर में आई मजबूती की वजह से सोने को निचले स्तरों पर भी सहारा नहीं मिल पा रहा है। वहीं जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रणव मेर बताते हैं कि औद्योगिक धातुओं में आई कमजोरी ने चांदी का खेल बिगाड़ा है। इसके अलावा, चांदी के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गए थे, जिससे बाजार में इसकी मांग में नरमी आई है। इसी कम मांग ने कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया।

सत्ताईस और अट्ठाईस अक्टूबर की बैठक से तय होगी आगे की राह

अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा। अब सारी निगाहें सत्ताईस और अट्ठाईस अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हैं। फेड चेयरमैन के बयान से ही यह साफ हो पाएगा कि सोने और चांदी की कीमतें मौजूदा स्तर पर संभलेंगी या इनमें गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। इस हफ्ते सिर्फ अमेरिकी फेड ही नहीं, बल्कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक सहित बैंक ऑफ जापान के फैसलों पर भी बाजार की नजर रहेगी। इसके अलावा अमेरिका के महंगाई के आंकड़े, तीसरी तिमाही की जीडीपी के नंबर और उपभोक्ता विश्वास से जुड़े डेटा भी सामने आएंगे। ये तमाम आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो डॉलर के साथ बॉन्ड यील्ड में और तेजी आएगी। इसका मतलब है कि सोने और चांदी के दाम और गिर सकते हैं और इसके उलट, अगर फेड का रुख नरम रहता है, तो कीमती धातुओं को इस गिरावट से थोड़ी राहत मिल सकती है।

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