सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस के खिलाफ 146 वकीलों का मोर्चा, हिरासत और पाबंदियों पर मांगा जवाब
दिल्ली पुलिस के खिलाफ 146 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। 7,000 लोगों की हिरासत और 45 मेट्रो स्टेशनों की बंदी पर कोर्ट ने 13 अक्टूबर तक जवाब मांगा है।
दिल्ली पुलिस और प्रशासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है, जिसमें 146 वकीलों ने एक साथ मोर्चा खोल दिया है। यह मामला 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन, हजारों लोगों को हिरासत में लेने, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाओं को रोकने से जुड़ा है। इस महत्वपूर्ण मामले में 11 अक्टूबर को जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने विशेष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होने वाले वकीलों की संख्या और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे इस मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं।
दिल्ली पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों की अनदेखी की है। आरोपों के अनुसार, दिल्ली में 45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया था, जिनमें जीटीबी नगर और विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल थे। इसके अलावा, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर भी पाबंदियां लगाई गईं और इंटरनेट सेवाओं को ठप कर दिया गया, जिससे पूरे शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल बन गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि लगभग 7,000 लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है। वकीलों ने यह भी मुद्दा उठाया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू करने के नोटिस बोर्ड लगाए गए थे, जिससे वकीलों, पत्रकारों और आम नागरिकों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हुई।
दिग्गज वकीलों की फौज ने संभाली कमान
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से देश के कई जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हुए। के. वेणुगोपाल ने कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर सवाल उठाए और कपिल सिब्बल ने नागरिक अधिकारों के हनन और पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ जोरदार बहस की। गोपाल शंकरनारायणन ने सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगाने को गलत बताया, जबकि एन. हरिहरन ने दिल्ली में आवाजाही पर लगी पाबंदियों को असंवैधानिक करार दिया।
इनके अलावा शादान फरासत, शोएब आलम, संजय हेगड़े, डॉ. मोनिका गुसाईं और अरुंधति काटजू जैसे वरिष्ठ वकीलों ने भी नागरिकों की स्वतंत्रता और अवैध हिरासत के खिलाफ अपनी दलीलें पेश कीं। अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने व्यक्तिगत रूप से याचिका पेश की, जिसके समर्थन में 139 अन्य वकील भी कोर्ट में मौजूद रहे।
कोर्ट में पेश हुए सभी 146 वकीलों की सूची
याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेप करने वालों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सभी वकीलों के नाम इस प्रकार हैं:
- डॉ. मेनका गुरुस्वामी
- चांद कुरैशी
- शैलेंद्र मणि त्रिपाठी
- राकेश कुमार
- प्रदीप कुमार यादव
- पूजा शिल्पकार
- प्रियेंदु राघव मिश्रा
- विशाल कुमार
- तैयब खान सलमानी
- हरीश लोढ़ी
- मुजाहिद अहमद
- मोहित यादव
- इमरान सिद्दीकी
- शाहिद अली सिद्दीकी
- गौरव यादव
- दविंदर पाल कौर
- मोहम्मद शहजाद अंसारी
- शहजाद नकवी
- आरिफ अली
- अंजलि कुमारी
- दीपक यादव
- संजय हेगड़े
- देवव्रत
- युगंधरा पवार झा
- खुशबू साहू
- निवेदिता नायर
- मीनाक्षी कालरा
- अनस तनवीर
- गौरव कुमार
- एस. मिश्रा
- नमन श्रेष्ठ
- विशाल तिवारी
- अनुज सक्सेना
- कपिल सिब्बल
- एन. हरिहरन
- पी.वी. दिनेश
- सुभाष चंद्रन
- अनिरुद्ध के.पी.
- असीमा मंडला
- अपराजिता जामवाल
- सिद्धार्थ के.
- सुमेध सरकार
- निखिल पाहवा
- अर्जन सिंह मंडला
- मंदाकिनी सिंह
- फिडेल टॉम
- ध्रुव कुमार
- सुनीता मजूमदार
- रंजीत कुमार बिस्वास
- शाह मोहम्मद
- के.के. वेणुगोपाल
- गोपाल शंकरनारायणन
- पूजा धर
- चिन्मयी चंद्रा
- विशाल सिन्हा
- शौर्य दासगुप्ता
- सिद्धार्थ वेणुगोपाल
- तुषार श्रीवास्तव
- बिजहारिणी गोपाल कृष्णन
- ऋषव रंजन
- समृद्धि अग्रवाल
- दिव्यांश ठाकुर
- गंतव्य वशिष्ठ
- निवेदिता रानी
- अर्पित मालवीय
- प्रतिष्ठा अग्रवाल
- अपार गुप्ता
- आदित्य मिश्रा
- आदित्य दुबे
- धंडापानी एम.
- शोएब आलम
- फौजिया शकील
- रश्मि सिंह
- उज्ज्वल सिंह
- खालिद अली
- नाजमीन अहमद
- सुरित चौबे
- इष्टा सिंह
- अवि सिंह
- अरुंधति काटजू
- लवकेश भंभानी
- रितिका मीणा
- स्पृहा पचौरी
- शाश्वती परही
- अनमोल गुप्ता
- भूमिका यादव
- अल्जो जोसेफ
- पल्लवी बरुआ
- रीना पांडे
- नरेंद्र मिश्रा
- आकांक्षा तिवारी
- तनुश्री भल्ला
- आशीष पांडे
- मीनू पाधा
- मोहसिन आलम
- शादान फरासत
- डॉ. मोनिका गुसाईं
- विपिन
- हेमराज मुर्मू
- अजीत कुमार एक्का
- सुनील रॉय
- डिंपल सिंह
- कैफी बेनीवाल
- प्रणीत प्रणव
- भास्कर गौतम
- वी.सी. शुक्ला
- लक्ष्य एस. पांडे
- आस्था सिंह
- ईशा बी.
- सौरभ मिश्रा
- संतोष कुमार
- ताडिमल्ला भास्कर गौतम
- अलभ्य धमीजा
- विशाल कुमार सिंह
- विवेक कुमार पांडे
- ज्योति तिवारी
- कृष्ण कांत दुबे
- गोपाल झा
- जाह्नवी वर्मा
- जैनेंद्र कुमार
- महिमा पांडे
- सूर्य प्रताप त्यागी
- सुनील कुमार
- श्रेय रवि दंभारे
- धीरज
- संजीव कुमार
- कुणाल मेहरा
- पवन नारंग
- पीयूष बेरिवाल
- रुचिता श्रीवास्तव
- स्पर्श जैन
- कीर्ति उप्पल
- नीरज
- सत्य रंजन स्वैन
- शौमेंदु मुखर्जी
- राजेश सिंह चौहान
- कौटिल्य बिराट
- तुषार हजरती
- बी.एल. शिवहरे
- शिवम कुमार
- हिमांशु पाठक
- वेदांश आनंद
- राहुल जी. तंवर
- निशांत कुमार
- रचना श्रीवास्तव
- आकाश वाजपेयी
सरकार का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट का आदेश
वी. राजू ने इन आरोपों का खंडन किया। सरकार ने तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली के 303 मेट्रो स्टेशनों में से केवल 45 को अस्थायी रूप से बंद किया गया था, जिन्हें बाद में खोल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया और 13 अक्टूबर तक विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर से धारा 163 के बोर्ड हटाने का भी आदेश दिया और कहा कि वकीलों व पत्रकारों को उनके काम से नहीं रोका जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
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