हनुमान बेनीवाल ने संसद में दुर्लभ बीमारियों की दवाएं मुफ्त करने की मांग की

सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को मुफ्त करने और PKCL परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग की।

Mar 14, 2026 - 08:35
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हनुमान बेनीवाल ने संसद में दुर्लभ बीमारियों की दवाएं मुफ्त करने की मांग की

नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए उपयोग होने वाली दवाओं और इंजेक्शनों को निःशुल्क उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। शुक्रवार को सदन की कार्यवाही के दौरान बेनीवाल ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इन बीमारियों के इलाज में काम आने वाले अत्यधिक महंगे इंजेक्शनों को गरीब मरीजों के लिए वहनीय बनाने की कोई विशेष योजना है। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि इन बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाले कुछ इंजेक्शनों की कीमत ₹10 करोड़ से भी अधिक होती है, जो आम नागरिक की पहुंच से पूरी तरह बाहर है।

दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति और वित्तीय सहायता

सांसद के सवाल के जवाब में सरकार ने 'राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति-2021' के प्रावधानों की जानकारी दी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस नीति के तहत वर्तमान में देश भर में 15 उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence) स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से चिन्हित 63 दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए प्रति मरीज ₹50 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह सहायता उन मरीजों को दी जाती है जो इन विशिष्ट केंद्रों में उपचार प्राप्त कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य दुर्लभ बीमारियों के प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करना और मरीजों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है।

दवाओं का घरेलू उत्पादन और पीएलआई योजना

हनुमान बेनीवाल ने दवाओं के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू करने के संदर्भ में भी सवाल किया था। इसके उत्तर में सरकार ने बताया कि औषध क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना लागू की गई है। इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके तहत स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के उपचार में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण एपीआई ‘रिस्डिप्लाम’ का उत्पादन अब भारत में शुरू हो गया है। इसके अतिरिक्त, नैटको फार्मा लिमिटेड ने इस दवा का जेनेरिक संस्करण भारतीय बाजार में पेश किया है, जिससे इसकी लागत में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। सरकार के अनुसार, घरेलू उत्पादन बढ़ने से भविष्य में इन दवाओं की उपलब्धता और सस्ती दरों पर सुनिश्चित की जा सकेगी।

पीकेसीएल परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग

सत्र के दौरान बेनीवाल ने राजस्थान की महत्वपूर्ण जल परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKCL) लिंक परियोजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस परियोजना को 'राष्ट्रीय परियोजना' घोषित करने का आग्रह किया और सांसद ने तर्क दिया कि यह परियोजना राजस्थान के कई जिलों में पेयजल और सिंचाई की दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि 28 जनवरी 2024 को केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अभी तक परियोजना की अंतिम स्वीकृति और विस्तृत वित्तीय संरचना को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

राजस्थान के जल संकट और अंतर-राज्यीय समझौते की स्थिति

बेनीवाल ने कहा कि पूर्वी राजस्थान के जिलों के लिए यह परियोजना जीवनदायिनी साबित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि चूंकि यह एक अंतर-राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना है, इसलिए इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना मानते हुए केंद्र सरकार द्वारा पूर्णतः वित्त पोषित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, वित्तीय स्पष्टता के अभाव में परियोजना के क्रियान्वयन में देरी हो सकती है, जिससे राजस्थान के किसानों और आम जनता को जल संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करने और बजटीय आवंटन सुनिश्चित करने की अपील की ताकि परियोजना का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।

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