एशियन गेम्स 2026: डाइसुके शीबा ने बनाए खास मेडल, ई-कचरे से हुआ है निर्माण

एशियन गेम्स 2026 के मेडल्स का डिजाइन और उनकी विशेषताएं जानें। डाइसुके शीबा द्वारा डिजाइन किए गए ये मेडल ई-कचरे और जापानी संस्कृति का संगम हैं।

Sep 19, 2026 - 12:35
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एशियन गेम्स 2026: डाइसुके शीबा ने बनाए खास मेडल, ई-कचरे से हुआ है निर्माण

जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स के मेडल्स का डिजाइन अपनी कलात्मकता, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सोच के चलते दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इन मेडल्स के डिजाइन को एक नेशनल डिजाइन कॉम्पिटिशन के जरिए चुना गया है, जिसे जाने-माने जापानी डिजाइनर डाइसुके शीबा ने तैयार किया है। शीबा का यह कॉन्सेप्ट खेलों के आधिकारिक नारे इमेजिन वन एशिया और विविधता में एकता की थीम पर पूरी तरह आधारित है। यह डिजाइन न केवल खेल भावना को दर्शाता है बल्कि जापान की समृद्ध परंपराओं को भी दुनिया के सामने पेश करता है।

किसने बनाया और क्या है इसके पीछे का अनोखा कॉन्सेप्ट?

डिजाइनर डाइसुके शीबा ने इस मेडल को तैयार करने के लिए एक बहुत ही अनोखा और प्रेरणादायक प्रोसेस अपनाया है और मेडल का फाइनल रूप तय करने के दौरान उन्होंने जानबूझकर कई सेरामिक डिस्क्स को तोड़ा और फिर उनके टुकड़ों के जुड़ाव का गहराई से अध्ययन किया। शीबा का मानना है कि एक एथलीट का सफर केवल जीत का नहीं होता, बल्कि वह असफलताओं, चोटों, संघर्ष और कड़ी मेहनत के बिखरे हुए पलों से बनता है। जब ये सभी बिखरे हुए टुकड़े एक साथ जुड़ते हैं, तो वह मेडल के रूप में एथलीट की सफलता का प्रतीक बन जाते हैं। यह डिजाइन एशिया की अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के खेलों के मंच पर एक साथ आने को भी खूबसूरती से रिप्रेजेंट करता है।

एशियन गेम्स 2026 मेडल की 5 सबसे बड़ी खासियत

इन मेडल्स को खास बनाने वाली 5 प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • रिसाइकिल्ड ई-कचरे का इस्तेमाल: पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए इन मेडल्स का निर्माण जापान के नगर निगमों की ओर से जमा किए गए पुराने और छोटे इलेक्ट्रॉनिक कचरे से धातु निकालकर किया गया है। यह कदम स्थिरता के प्रति जापान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • काकित्सुबाता फूल से इंस्पायर रिबन: मेडल के रिबन पर आइची प्रांत के आधिकारिक फूल काकित्सुबाता का खूबसूरत सिल्हूट उकेरा गया है। इसके घुमावदार पैटर्न एथलीटों के लचीलेपन और उनकी आंतरिक शक्ति को दर्शाते हैं।
  • हिनोकी लकड़ी का बॉक्स: मेडल को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया बॉक्स आइची की प्रसिद्ध हिनोकी लकड़ी से बना है। यह बॉक्स जापानी पारंपरिक चाय संस्कृति से प्रेरित है, जो इसे एक विशिष्ट पहचान देता है।
  • मेडल्स की लंबाई और चौड़ाई: सभी मेडल 8 सेंटीमीटर डायमीटर और 5 मिलीमीटर मोटाई के गोलाकार फॉर्मेट में बनाए गए हैं, जो इन्हें देखने में भव्य और प्रभावशाली बनाते हैं।
  • मेडल्स का वजन और धातु संरचना: गोल्ड मेडल लगभग 265 ग्राम का है, जिसमें शुद्ध चांदी पर कम से कम 1 ग्राम सोने की परत चढ़ाई गई है। वहीं, सिल्वर मेडल लगभग 264 ग्राम का है, जो प्योर सिल्वर का बना है। इनके अलावा ब्रॉन्ज मेडल लगभग 222 ग्राम का है, जो 95 प्रतिशत तांबा और 5 प्रतिशत जिंक के मिश्रण से तैयार किया गया है।

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