होर्मुज में टोल नहीं पर्यावरण टैक्स वसूलेगा ईरान, अमेरिका से डील के बीच नया दांव

ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के बीच होर्मुज में टोल के बजाय पर्यावरण टैक्स लगाने का फैसला किया है। जानें इस रणनीतिक बदलाव के पीछे की पूरी कहानी।

May 25, 2026 - 21:35
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होर्मुज में टोल नहीं पर्यावरण टैक्स वसूलेगा ईरान, अमेरिका से डील के बीच नया दांव

ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी प्रकार का टोल नहीं वसूलेगा। इसके बजाय, ईरानी सरकार ने एक नई रणनीति अपनाते हुए जहाजों पर पर्यावरण टैक्स और सुरक्षा सेवा शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच एक अंतरिम परमाणु समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। सोमवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 'टोल टैक्स' शब्द पश्चिमी मीडिया द्वारा गढ़ा गया है ताकि ईरान की छवि को खराब किया जा सके।

टोल के बजाय पर्यावरण टैक्स और सुरक्षा शुल्क

प्रवक्ता के अनुसार, हालांकि अमेरिका के साथ होने वाले समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा, लेकिन ईरान उन सुरक्षा सेवाओं के लिए शुल्क लेने का अपना अधिकार सुरक्षित रखता है जो वह जहाजों को प्रदान करता है और बाघेई ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और प्रस्तावित पर्यावरण टैक्स इस जलमार्ग को स्वच्छ रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि ईरान वर्तमान में इन शुल्कों के संबंध में एक औपचारिक प्रोटोकॉल स्थापित करने के लिए ओमान के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है और एक बार जब यह प्रोटोकॉल तैयार होकर जारी हो जाएगा, तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए इन शुल्कों के विशिष्ट विवरण और वित्तीय प्रभाव स्पष्ट हो जाएंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी के मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है, जो इसे ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इस मार्ग के महत्व को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और इराक जैसे प्रमुख ऊर्जा निर्यातक देश अपने तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को वैश्विक उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह से इसी रास्ते पर निर्भर हैं। इस जलडमरूमध्य के संचालन प्रोटोकॉल में किसी भी प्रकार का बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर तत्काल और व्यापक प्रभाव डालता है।

ऐतिहासिक संदर्भ और पिछली टोल व्यवस्था

होर्मुज में शुल्क वसूलने का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। 28 फरवरी 2026 से पहले तक, जहाजों को इन जलक्षेत्रों में नेविगेट करने के लिए कोई टोल नहीं देना पड़ता था। हालांकि, अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव के बाद, ईरान ने एक टोल व्यवस्था लागू की थी। इस व्यवस्था के तहत, जहाजों को सुरक्षा शुल्क के नाम पर 10-10 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ता था। दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने कुछ देशों को इन शुल्कों से छूट दी थी; भारत, पाकिस्तान और चीन के जहाजों को बिना किसी वित्तीय दायित्व के जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी गई थी और इन कार्यों के प्रबंधन के लिए, ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के तहत एक समर्पित मंत्रालय बनाने की भी घोषणा की थी, जो जलडमरूमध्य की भौतिक सुरक्षा और गश्त की निगरानी भी करता है।

अंतरिम परमाणु समझौते का विवरण

सीएनएन की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और अमेरिका एक अंतरिम परमाणु समझौते पर आम सहमति पर पहुंच गए हैं। इस सौदे की आधिकारिक घोषणा जल्द ही होने की उम्मीद है। शुल्कों को पर्यावरण टैक्स और सुरक्षा शुल्क के रूप में नया नाम देकर, ईरान समझौते की कानूनी सीमाओं के भीतर रहते हुए भी इस रणनीतिक जलमार्ग से राजस्व सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।

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