अमेरिका ने रूस प्रतिबंध बिल में किया बड़ा बदलाव, भारत और चीन को मिली राहत

अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध बिल में बदलाव कर तेल और गैस पर टैरिफ को 500 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया है, जिससे भारत और चीन को राहत मिलेगी।

Jul 15, 2026 - 10:35
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अमेरिका ने रूस प्रतिबंध बिल में किया बड़ा बदलाव, भारत और चीन को मिली राहत

अमेरिकी सरकार ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से तैयार किए गए एक नए विधायी बिल का संशोधित संस्करण पेश किया है, जो उन देशों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है जो अभी भी मॉस्को से ऊर्जा संसाधनों की खरीद जारी रखे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस नए कानून के मसौदे में रूसी तेल और गैस का आयात करने वाले देशों पर लगाए जाने वाले संभावित वित्तीय दंड के प्रावधानों में बड़ी ढील दी गई है। इस बिल के माध्यम से रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर लगाए जाने वाले अधिकतम टैरिफ यानी आयात शुल्क को 500 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। इस रणनीतिक बदलाव से भारत और चीन जैसे प्रमुख वैश्विक देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर हैं।

द्विदलीय समर्थन और रणनीतिक लक्ष्य

अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए इस नए बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही पार्टियों के सांसदों का मजबूत समर्थन प्राप्त है। इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े पैमाने के ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को सीधे तौर पर निशाना बनाकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव को और अधिक बढ़ाना है। टैरिफ को एक रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और रूस पर अपनी दीर्घकालिक निर्भरता को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। यह बिल वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और रूस की आर्थिक शक्ति को सीमित करने के बीच एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।

टैरिफ प्रस्तावों में महत्वपूर्ण कटौती

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए बिल में रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े खरीदारों पर लगाए जा सकने वाले अधिकतम टैरिफ की सीमा को 100 प्रतिशत पर सीमित कर दिया गया है। यह पिछले प्रस्ताव की तुलना में एक बहुत बड़ा बदलाव है, जिसमें 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का सुझाव दिया गया था, जो संबंधित देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक अत्यंत भारी बोझ साबित हो सकता था। इस कानून की मूल रूपरेखा दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार की गई थी। अपनी यूक्रेन यात्रा के दौरान सीनेटर ग्राहम ने घोषणा की थी कि वे इस कानून को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ पूरी तरह सहमत हैं। हालांकि, शनिवार को सीनेटर ग्राहम के अचानक निधन के बाद इस विधायी प्रक्रिया में यह नया मोड़ आया है।

लक्षित देश और छूट के कड़े प्रावधान

सीनेट के सहयोगियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह नया प्रस्ताव विशेष रूप से रूसी कच्चे तेल के पांच सबसे बड़े खरीदारों को लक्षित करता है। इन देशों की सूची में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान के नाम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बिल में रूसी प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े आयातकों की भी पहचान की गई है, जिनमें चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम शामिल हैं और कानून में लचीलापन बनाए रखने के लिए उन देशों के लिए विशेष छूट का प्रावधान रखा गया है जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम हिस्सा आयात करते हैं और इस आपूर्ति को कम करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं। इस प्रावधान का सीधा लाभ जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम जैसे देशों को मिलने की संभावना है।

प्रतिबंधों का विस्तृत दायरा और वित्तीय लक्ष्य

ऊर्जा आयात पर टैरिफ के अलावा, इस बिल में रूस के खिलाफ कई अन्य कठोर प्रतिबंधों का प्रस्ताव दिया गया है। इसमें रूस के तथाकथित शैडो फ्लीट यानी उन गुप्त टैंकरों के बेड़े पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए पश्चिमी समुद्री सेवाओं के दायरे से बाहर काम करते हैं। इसके साथ ही, रूस के केंद्रीय बैंक सहित अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों के संचालन को रोकने का भी प्रस्ताव है। यह बिल रूस के महत्वपूर्ण सरकारी ऊर्जा प्रोजेक्ट्स जैसे यामल एलएनजी और आर्कटिक एलएनजी को भी निशाना बनाता है, जो रूस की भविष्य की ऊर्जा निर्यात क्षमता और आर्थिक राजस्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

राष्ट्रपति की शक्तियां और बिल का भविष्य

संशोधित बिल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन प्रतिबंधों से छूट देने का अधिकार दिया गया है। यदि राष्ट्रपति को लगता है कि ऐसा करना अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा या आर्थिक हितों के लिए फायदेमंद है, तो वे संबंधित देशों या संस्थाओं को राहत प्रदान कर सकते हैं और वर्तमान में इस कानून के 26 को-स्पांसर्स हैं और सीनेट के सहयोगियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि जैसे-जैसे बिल आगे बढ़ेगा, और भी सांसद इसके समर्थन में आएंगे। इस संस्करण को पेश करने से पहले सीनेटरों और व्हाइट हाउस के बीच महीनों तक गहन बातचीत हुई है, ताकि कानून के अंतिम कार्यान्वयन के लिए एक व्यापक सहमति बनाई जा सके।

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