ट्रंप की ईरान को चेतावनी: बातचीत नहीं की तो पावर प्लांट और पुलों पर होगा हमला

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि बातचीत न करने पर अगले हफ्ते उसके पावर प्लांट और पुलों पर हमला होगा। अमेरिकी नाकेबंदी और हमले जारी हैं।

Jul 15, 2026 - 09:35
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ट्रंप की ईरान को चेतावनी: बातचीत नहीं की तो पावर प्लांट और पुलों पर होगा हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को एक सीधी और गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि तेहरान कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार नहीं होता है, तो अमेरिकी सेना अगले सप्ताह से ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जिसमें पावर प्लांट और पुल शामिल हैं, को निशाना बनाना शुरू कर देगी। तनाव में यह वृद्धि दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इसके साथ ही, संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी भी फिर से शुरू कर दी है, जिससे इस्लामी गणराज्य पर दबाव और बढ़ गया है और इस कदम ने मध्य पूर्व में, विशेष रूप से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास, एक पूर्ण युद्ध के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।

फॉक्स न्यूज पर ट्रंप का अल्टीमेटम

फॉक्स न्यूज को दिए एक हालिया साक्षात्कार में, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने प्रशासन के रुख को स्पष्ट करते हुए चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में ईरान के लिए स्थिति और खराब हो जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता है, तो अमेरिका उनके पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर देगा और ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। यह अल्टीमेटम राष्ट्रपति की आक्रामक बयानबाजी का हिस्सा है, जिन्होंने पहले मार्च में भी सुझाव दिया था कि यदि शांति समझौता जल्द नहीं हुआ, तो अमेरिकी सेना ईरान के बिजली और पानी के संयंत्रों को निशाना बना सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने ऐसी धमकियों की आलोचना की है, क्योंकि बिजली और पानी जैसी नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है और इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है।

जारी सैन्य अभियान और नौसैनिक नाकेबंदी

राष्ट्रपति की यह ताजा चेतावनी सक्रिय सैन्य संघर्ष के बीच आई है। पिछले 4 दिनों से अमेरिकी सेना लगातार ईरानी ठिकानों पर हमले कर रही है। इसके साथ ही, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी फिर से शुरू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड, जिसे सेंटकॉम के नाम से जाना जाता है, ने स्पष्ट किया है कि इन सैन्य अभियानों का प्राथमिक उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म करना है। विशेष रूप से, अमेरिका उन संपत्तियों को नष्ट करना चाहता है जिनका उपयोग ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक और मालवाहक जहाजों पर हमला करने के लिए करता है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण गलियारा है।

जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय प्रभाव

ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित केश्म द्वीप सहित कई प्रमुख स्थानों पर धमाके दर्ज किए गए हैं। इन अमेरिकी हमलों के जवाब में, ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने दावा किया कि ईरानी सेना ने जॉर्डन में स्थित एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया है। यह सैन्य अड्डा अमेरिकी लड़ाकू विमानों की तैनाती के लिए जाना जाता है, जो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के खिलाफ सीधे जवाबी हमले का संकेत देता है। इन घटनाक्रमों ने एक अस्थिर वातावरण पैदा कर दिया है, जिसमें दोनों पक्ष सीधे सैन्य टकराव में शामिल हैं।

गार्जियन फीस नीति पर ट्रंप का यू-टर्न

एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम में, राष्ट्रपति ट्रंप ने समुद्री सुरक्षा के संबंध में पहले घोषित की गई एक नीति को वापस लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने शुरू में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अमेरिकी सुरक्षा के बदले 20 प्रतिशत गार्जियन फीस लगाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, ट्रंप ने इस शुल्क के लागू होने से ठीक 5 घंटे पहले इसे रद्द करने की घोषणा कर दी। राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि यह निर्णय मध्य पूर्व के विभिन्न नेताओं के साथ सकारात्मक चर्चा के बाद लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब क्षेत्र में व्यापार और निवेश समझौतों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस नीति परिवर्तन के बावजूद, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, जिससे तेहरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बना रहेगा।

कूटनीतिक प्रयासों की विफलता

शत्रुता में हालिया वृद्धि ने स्थायी युद्धविराम या शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है और 17 जून को स्थापित युद्धविराम समझौते को अब व्यापक रूप से निष्प्रभावी माना जा रहा है। विवाद का मुख्य बिंदु अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बना हुआ है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिकी कार्रवाइयों का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि नई नौसैनिक नाकेबंदी ने इस्लामाबाद समझौते को प्रभावी रूप से बेअसर कर दिया है। जैसे-जैसे दोनों देश अपने रुख पर अड़े हुए हैं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की संभावना को लेकर गहराई से चिंतित है।

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