जयशंकर की ईरानी समकक्ष से वार्ता, होर्मुज से सुरक्षित निकले भारतीय जहाज

विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरानी समकक्ष से वार्ता के बाद भारतीय तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले।

Mar 12, 2026 - 17:35
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जयशंकर की ईरानी समकक्ष से वार्ता, होर्मुज से सुरक्षित निकले भारतीय जहाज

मध्य पूर्व में जारी गंभीर सैन्य तनाव के बीच भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच तीन बार टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत हुई है। इस संवाद का मुख्य केंद्र क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम स्वरूप भारतीय झंडे वाले दो प्रमुख तेल टैंकर, 'पुष्पक' और 'परिमल', रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित रूप से गुजरने में सफल रहे हैं।

इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने 13वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, विशेष रूप से उस समुद्री मार्ग में जहां से दुनिया का एक बड़ा तेल हिस्सा गुजरता है और विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों के अनुसार, जयशंकर ने ईरान के साथ ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग की सुरक्षा पर गहन चर्चा की है। हालांकि मंत्रालय ने इस पर विस्तृत विवरण साझा करने से परहेज किया है, लेकिन सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारत ने तेहरान के साथ तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर स्पष्ट संवाद किया है।

कूटनीतिक संवाद और ऊर्जा सुरक्षा

विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के बीच हुई तीन दौर की बातचीत ने भारत की ऊर्जा हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अंतिम बातचीत विशेष रूप से शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े तकनीकी और कूटनीतिक पहलुओं पर केंद्रित थी। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है और विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने संकेत दिया है कि भारत ने तेहरान के साथ तेल व्यापार की निरंतरता पर भी चर्चा की है।

भारतीय टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही

क्षेत्र में जारी मिसाइल हमलों और सैन्य गतिविधियों के बावजूद, कम से कम दो भारतीय टैंकर, 'पुष्पक' और 'परिमल', होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर गए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर इस क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध या खतरे बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा एक लाइबेरियाई झंडे वाला टैंकर भी दो दिन पहले इस मार्ग से सुरक्षित निकला और इस जहाज के कैप्टन एक भारतीय नागरिक थे। यह जहाज मुंबई बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया है, जो इस तनावपूर्ण जलमार्ग से भारत की ओर आने वाला हालिया सफल शिपमेंट बन गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा एक जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, आमतौर पर प्रतिदिन लगभग 13 मिलियन बैरल तेल इस मार्ग से गुजरता है, जो वैश्विक समुद्री तेल शिपमेंट का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर पड़ता है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

दुनिया की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा भी इसी होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है। वर्तमान सैन्य संघर्ष के कारण इस जलमार्ग पर यातायात लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जो जहाज अमेरिका और इजरायल के हितों के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें इस जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, भारत के साथ ईरान के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों के कारण भारतीय जहाजों को इस संकट के बीच भी मार्ग उपलब्ध कराया गया है।

क्षेत्रीय स्थिति और सुरक्षा चुनौतियां

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने समुद्री सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पेश की हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संभावित हमलों की खबरों के बीच समुद्री यातायात की निगरानी बढ़ा दी गई है। भारतीय नौसेना और संबंधित एजेंसियां भी क्षेत्र में भारतीय वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर निरंतर नजर रख रही हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत का प्राथमिक उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता को बनाए रखना है। वर्तमान में, भारतीय कूटनीति इस क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने और अपने व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क में है।

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