101 समझौतों की समीक्षा पर भारत सख्त: बांग्लादेश के बदलते रुख पर दिल्ली की पैनी नजर

बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा कर रही है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए तैयार है।

Sep 19, 2026 - 17:35
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101 समझौतों की समीक्षा पर भारत सख्त: बांग्लादेश के बदलते रुख पर दिल्ली की पैनी नजर

भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है और बांग्लादेश की वर्तमान तारिक रहमान सरकार ने भारत के साथ पिछली सरकार के दौरान हुए 101 द्विपक्षीय समझौतों और सहमति पत्रों (MoUs) की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। ढाका के इस कदम ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और रहमान सरकार का स्पष्ट कहना है कि भारत के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। यह समीक्षा केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उन सभी समझौतों की गहराई से जांच है जो पिछले कई वर्षों में दोनों देशों के बीच हुए हैं।

समीक्षा के दायरे में शामिल प्रमुख क्षेत्र

इस समीक्षा प्रक्रिया के दायरे में वे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं जो भारत और बांग्लादेश के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की रीढ़ माने जाते हैं और इनमें मुख्य रूप से बंदरगाहों का उपयोग, क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी), द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सहयोग और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। विशेष रूप से चटगांव और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर गहन चर्चा हो रही है। ये बंदरगाह भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके माध्यम से भारत को अपने पूर्वोत्तर राज्यों तक माल पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक और सुगम रास्ता मिलता है और इन व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार का बदलाव भारत की लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

दोस्ती और राष्ट्रीय हित का संतुलन

बांग्लादेश की नई सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि भारत के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं, लेकिन देश का हित सबसे ऊपर रहेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि नई सरकार पिछली अवामी लीग सरकार के दौरान तैयार किए गए सहयोग के पूरे ढांचे को अब नए सिरे से परख रही है। सरकार यह देखना चाहती है कि क्या ये समझौते बांग्लादेश के लिए वास्तव में फायदेमंद हैं या इनमें कुछ बदलाव की आवश्यकता है। ढाका की ओर से यह संकेत दिया गया है कि वे किसी भी ऐसे प्रावधान को जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं जो उनके राष्ट्रीय हितों के अनुकूल न हो।

क्या हैं ये 101 समझौते?

ये 101 द्विपक्षीय समझौते और सहमति पत्र मुख्य रूप से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षरित किए गए थे। मौजूदा तारिक रहमान सरकार ने इन्हीं समझौतों की समीक्षा का काम हाथ में लिया है। हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन समझौतों को पूरी तरह से रद्द करने की उनकी फिलहाल कोई योजना नहीं है और सरकार का मुख्य उद्देश्य इन समझौतों में मौजूद कमियों, विसंगतियों और तकनीकी खामियों की पहचान करना है। समीक्षा के माध्यम से इन समझौतों को और अधिक प्रभावी बनाने और उन्हें बांग्लादेश के वर्तमान राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ढालने की कोशिश की जा रही है।

बंदरगाह और ऋण शर्तों पर सवाल

समझौतों की इस समीक्षा में कुछ विशिष्ट मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। बांग्लादेश के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने चटगांव बंदरगाह से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि भारत के साथ हुए कुछ समझौतों को बांग्लादेश के हितों के नजरिए से फिर से देखने की जरूरत है। इसके अलावा, भारत द्वारा दी गई ऋण सहायता (Line of Credit) से बनी परियोजनाओं और उनकी शर्तों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। सरकार यह जांच रही है कि इन ऋणों की शर्तें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए कितनी व्यावहारिक हैं और क्या इनसे देश को अपेक्षित लाभ मिल रहा है।

भारत सरकार का कड़ा रुख और संदेश

बांग्लादेश के इस बदलते रुख पर भारत सरकार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत को इन 101 समझौतों की समीक्षा के संबंध में बांग्लादेश की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक या औपचारिक जानकारी नहीं मिली है। भारत ने मीडिया में चल रही खबरों का संज्ञान लिया है, लेकिन वह ढाका की ओर से आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही, भारत सरकार ने एक कड़ा संदेश भी दिया है कि यदि इस समीक्षा प्रक्रिया के दौरान भारत के रणनीतिक या आर्थिक हित प्रभावित होते हैं, तो भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक और कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

बदलते रिश्तों की नई जमीन

101 समझौतों की यह समीक्षा भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने रेल, सड़क, जलमार्ग और ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया था और अब उसी व्यवस्था की शर्तों पर ढाका द्वारा सवाल उठाए जाना यह दर्शाता है कि आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों की दिशा बदल सकती है। बंदरगाहों से लेकर बुनियादी ढांचे तक, इन समझौतों पर होने वाली समीक्षा का परिणाम ही यह तय करेगा कि भविष्य में भारत और बांग्लादेश की साझेदारी किस स्वरूप में आगे बढ़ेगी। दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम को अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और कनेक्टिविटी के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहा है।

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